कच्छी रोगन कला को जीआई टैग
2026-05-21पृष्ठभूमि: रोगन कला गुजरात के कच्छ क्षेत्र की एक प्राचीन वस्त्र चित्रकला शिल्प है, जिसमें अरंडी के तेल से बने गाढ़े रंग का उपयोग करके जटिल पैटर्न बनाए जाते हैं। यह अनूठी कला, जिसे पारंपरिक रूप से कुछ ही परिवार अभ्यास करते हैं, हाल के दशकों में पहचान और बाजार पहुंच की कमी के कारण गिरावट का सामना कर रही थी।
वर्तमान संदर्भ: 20 मई, 2026 को, भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री ने 'कच्छी रोगन कला' को प्रतिष्ठित जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग प्रदान किया। संस्कृति मंत्रालय द्वारा समर्थित यह महत्वपूर्ण कदम, इस उत्कृष्ट शिल्प से जुड़े पारंपरिक ज्ञान और अनूठी पहचान को सुरक्षित रखने का लक्ष्य रखता है।
प्रभाव: जीआई टैग अनधिकृत उपयोग के खिलाफ कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा, प्रामाणिकता और गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा। इससे शेष कारीगर परिवारों की आजीविका को बढ़ावा मिलने, कला के बाजार मूल्य में वृद्धि होने और इसकी वैश्विक पहचान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे इसके दीर्घकालिक संरक्षण और सांस्कृतिक पुनरुद्धार में योगदान मिलेगा।
अजंता गुफाओं के प्राचीन भित्तिचित्रों का जीर्णोद्धार पूर्ण
2026-05-21पृष्ठभूमि: महाराष्ट्र में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल अजंता गुफाएं, अपनी उत्कृष्ट बौद्ध शैलकृत गुफाओं और 200 ईसा पूर्व से 5वीं शताब्दी ईस्वी तक के जीवंत भित्तिचित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं। सदियों से, ये अमूल्य चित्र प्राकृतिक तत्वों, मानवीय गतिविधियों और उम्र बढ़ने के कारण क्षरण का शिकार हुए हैं।
वर्तमान संदर्भ: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने गुफा 17 और गुफा 19 के भीतर कई महत्वपूर्ण भित्तिचित्रों के लिए एक व्यापक, बहु-वर्षीय जीर्णोद्धार परियोजना के सफल समापन की घोषणा की। उन्नत लेजर सफाई और संरक्षण तकनीकों का उपयोग करते हुए, 19 मई, 2026 को पूरी हुई इस परियोजना ने कलाकृतियों को महत्वपूर्ण रूप से स्थिर और पुनर्जीवित किया है।
प्रभाव: यह सावधानीपूर्वक जीर्णोद्धार भविष्य की पीढ़ियों के लिए इन अमूल्य ऐतिहासिक और कलात्मक खजानों के दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। यह आगंतुकों के अनुभव को बढ़ाएगा, अधिक सांस्कृतिक पर्यटकों को आकर्षित करेगा, और पूरे भारत में चल रहे विरासत संरक्षण प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा, जिससे राष्ट्र की अपनी समृद्ध अतीत के प्रति प्रतिबद्धता मजबूत होगी।