कच्छी रोगन कला को मिला प्रतिष्ठित जीआई टैग
2026-05-18पृष्ठभूमि: कच्छ, गुजरात की रोगन कला एक अनूठी वस्त्र चित्रकला शिल्प है, जिसका समृद्ध इतिहास है। इसे पारंपरिक रूप से कुछ ही परिवार अरंडी के तेल-आधारित रंगों का उपयोग करके जटिल पैटर्न बनाते हैं। यह प्राचीन कला लुप्तप्राय कारीगरों और बाजार प्रतिस्पर्धा की चुनौतियों का सामना कर रही थी। वर्तमान संदर्भ: भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए, भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री ने 18 मई, 2026 को 'कच्छी रोगन कला' को आधिकारिक तौर पर जीआई टैग प्रदान किया। यह मान्यता स्थानीय कारीगर समुदायों और सांस्कृतिक निकायों के वर्षों के प्रयासों का परिणाम है। प्रभाव: जीआई टैग कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा, अनधिकृत उपयोग को रोकेगा और प्रामाणिकता सुनिश्चित करेगा। इससे कारीगरों की आर्थिक आजीविका को बढ़ावा मिलेगा, कला रूप की वैश्विक दृश्यता बढ़ेगी और गुजरात में सांस्कृतिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा।
ओडिशा के जाजपुर जिले में प्राचीन बौद्ध स्तूप की खोज
2026-05-18पृष्ठभूमि: ओडिशा में समृद्ध बौद्ध विरासत है, जिसमें ललितगिरि, रत्नागिरि और उदयगिरि जैसे महत्वपूर्ण प्राचीन स्थल शामिल हैं। पुरातात्विक अन्वेषणों से अक्सर क्षेत्र के ऐतिहासिक धार्मिक परिदृश्य में नई अंतर्दृष्टि मिलती है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 17 मई, 2026 को ओडिशा के जाजपुर जिले में एक उल्लेखनीय रूप से अच्छी तरह से संरक्षित प्राचीन बौद्ध स्तूप और मठ परिसर की खोज की घोषणा की। प्रारंभिक आकलन से पता चलता है कि यह स्थल 7वीं-8वीं शताब्दी ईस्वी का है, जिसमें जटिल नक्काशी और संभवतः अवशेष शामिल हैं। प्रभाव: यह महत्वपूर्ण खोज भारत के बौद्ध पुरातात्विक मानचित्र को समृद्ध करती है, पूर्वी भारत में बौद्ध धर्म के प्रसार और विकास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है। इससे विद्वानों और पर्यटकों को आकर्षित होने की उम्मीद है, जिससे यह स्थल एक प्रमुख विरासत पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है।