अहोम राजवंश के मोइदम को यूनेस्को की मान्यता
2026-05-17पृष्ठभूमि: मोइदम असम में अहोम राजवंश की टीला-दफन प्रणाली है, जो उनकी स्थापत्य कला के शिखर का प्रतिनिधित्व करती है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 तक, चराइदेव के मोइदम को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा देने के लिए प्राथमिकता दी गई है, जो उनकी अनूठी अंतिम संस्कार परंपराओं को उजागर करता है। प्रभाव: यह मान्यता असम में वैश्विक पर्यटन को बढ़ावा देगी और इन प्राचीन दफन टीलों के दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करेगी। यह अहोम साम्राज्य की प्रशासनिक और सांस्कृतिक परिष्कार का प्रमाण है, जो पूर्वोत्तर भारत की ऐतिहासिक पहचान के संरक्षण को बढ़ावा देता है।
ओडिशा के प्राचीन ढोकरा धातु शिल्प का पुनरुद्धार
2026-05-17पृष्ठभूमि: ढोकरा 'लॉस्ट-वैक्स' प्रक्रिया का उपयोग करके एक अलौह धातु कास्टिंग तकनीक है, जिसका अभ्यास सदियों से ओडिशा के आदिवासी समुदायों द्वारा किया जा रहा है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 में, संस्कृति मंत्रालय ने इस लुप्त होती कला को पुनर्जीवित करने के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। प्रभाव: इस पहल का उद्देश्य आदिवासी कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़कर उन्हें स्थायी आजीविका प्रदान करना है। इस प्राचीन शिल्प को संरक्षित करके, सरकार भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की रक्षा कर रही है और कौशल विकास के माध्यम से ग्रामीण कारीगरों के लिए आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा दे रही है।