हैदराबाद में राष्ट्रीय पुरालेख संग्रहालय का उद्घाटन
2026-05-04पृष्ठभूमि: पुरालेख (Epigraphy) शिलालेखों का अध्ययन है, जो भारत के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास के पुनर्निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) शिलालेखों के एक विशाल संग्रह का प्रबंधन करता है जो पहले विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों में बिखरे हुए थे। वर्तमान संदर्भ: 4 मई 2026 को, संस्कृति मंत्रालय ने हैदराबाद के सालार जंग संग्रहालय परिसर में 'राष्ट्रीय पुरालेख संग्रहालय' का आधिकारिक उद्घाटन किया। इस अत्याधुनिक सुविधा में ब्राह्मी, खरोष्ठी और संस्कृत सहित विभिन्न भाषाओं और लिपियों के 1 लाख से अधिक शिलालेख रखे गए हैं। प्रभाव: यह संग्रहालय शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में कार्य करता है, जो प्राचीन अभिलेखों तक डिजिटल पहुंच प्रदान करता है। यह भारत की भाषाई विरासत का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करता है और प्राचीन भारतीय शासन और संस्कृति के बारे में सार्वजनिक जागरूकता को बढ़ावा देता है।
कोणार्क सूर्य मंदिर में बहाली का महत्वपूर्ण पड़ाव
2026-05-04पृष्ठभूमि: कोणार्क का 13वीं शताब्दी का सूर्य मंदिर, एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। 1903 में ब्रिटिश इंजीनियरों द्वारा ढहने से बचाने के लिए जगमोहन (सभा कक्ष) के अंदर भरी गई रेत के कारण इसे संरचनात्मक जोखिमों का सामना करना पड़ा था। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 में, ASI ने उन्नत गैर-आक्रामक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग करके रेत को सुरक्षित रूप से निकालने और आंतरिक भाग को स्थिर करने की एक बहु-वर्षीय परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह परियोजना रेत के बैठने के कारण उत्पन्न रिक्तियों और मंदिर की स्थिरता के खतरे को दूर करने के लिए शुरू की गई थी। प्रभाव: सफल बहाली अधिक सटीक संरचनात्मक मूल्यांकन की अनुमति देती है और आंतरिक कक्षों तक सीमित सार्वजनिक या वैज्ञानिक पहुंच की संभावना खोलती है। यह भारतीय विरासत संरक्षण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो आधुनिक भूकंप-प्रतिरोधी तकनीक के साथ पारंपरिक वास्तुकला का मेल कराती है।