चराइदेव मोइदम को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा मिला
2026-04-23पृष्ठभूमि: चराइदेव मोइदम असम में अहोम राजाओं और रानियों के पवित्र श्मशान टीले हैं, जिन्हें अक्सर 'असम के पिरामिड' कहा जाता है। ये ताई-अहोम समुदाय की अनूठी गुंबददार टीला वास्तुकला और अंत्येष्टि परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। वर्तमान संदर्भ: 23 अप्रैल 2026 को, यूनेस्को ने आधिकारिक तौर पर चराइदेव मोइदम को सांस्कृतिक श्रेणी के तहत विश्व धरोहर सूची में शामिल किया। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए गए व्यापक संरक्षण प्रयासों का परिणाम है। प्रभाव: यह मान्यता असम को वैश्विक विरासत मानचित्र पर रखती है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलता है और उन्नत संरक्षण निधि सुनिश्चित होती है। यह अहोम राजवंश की 600 साल पुरानी वास्तुकला विरासत को उजागर करता है और भारत के सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूत करता है।
हम्पी में 10वीं शताब्दी के शिलालेखों की खोज
2026-04-23पृष्ठभूमि: कर्नाटक में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हम्पी, विजयनगर साम्राज्य की राजधानी के रूप में कार्य करता था। हालांकि यह मुख्य रूप से 14वीं-16वीं शताब्दी की संरचनाओं के लिए जाना जाता है, लेकिन इसका पूर्व-साम्राज्य इतिहास गहन शोध का विषय बना हुआ है। वर्तमान संदर्भ: 21 अप्रैल 2026 को, ASI के पुरातत्वविदों ने विट्ठल मंदिर परिसर के पास 10वीं शताब्दी के शिलालेखों की एक श्रृंखला की खोज की। ये शिलालेख प्रारंभिक कन्नड़ लिपि में लिखे गए हैं और स्थानीय देवताओं को दिए गए भूमि अनुदान का विवरण देते हैं। प्रभाव: यह खोज विजयनगर युग से पहले, होयसल और उत्तरवर्ती चालुक्य काल के दौरान हम्पी के महत्व का महत्वपूर्ण प्रमाण प्रदान करती है। यह क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक संक्रमण में नई अंतर्दृष्टि प्रदान करता है और दक्षिण भारत के पुरालेख अभिलेखों को समृद्ध करता है।