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भारत का AI पुश: नवाचार और अपनाने के लिए MeitY की पहलें

MeitY AI अपनाने और प्रतिभा विकास में तेजी ला रहा है
2026-06-12
पृष्ठभूमि: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) भारत के डिजिटल परिवर्तन को चलाने में महत्वपूर्ण रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भविष्य के विकास और सामाजिक विकास के लिए एक प्रमुख तकनीक के रूप में पहचाना गया है। वर्तमान संदर्भ: MeitY स्वास्थ्य सेवा, कृषि और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में AI को अपनाने को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है। मंत्रालय विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से AI प्रतिभा का निर्माण, अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देकर और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करके एक मजबूत AI पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। पहलों का उद्देश्य AI को समाज के सभी वर्गों के लिए सुलभ और फायदेमंद बनाना है। प्रभाव: इस प्रयास से सार्वजनिक सेवाओं में दक्षता बढ़ने, आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिलने और नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य भारत को AI नवाचार और जिम्मेदार AI परिनियोजन में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करना भी है, साथ ही नैतिक चिंताओं को दूर करना और समान लाभ सुनिश्चित करना है।
राष्ट्रीय AI रणनीति नैतिक ढांचे और अनुसंधान पर केंद्रित
2026-06-12
पृष्ठभूमि: भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की परिवर्तनकारी क्षमता को पहचानता है और जोखिमों को कम करते हुए इसे राष्ट्रीय विकास के लिए उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार AI के लिए एक व्यापक रणनीति पर काम कर रही है। वर्तमान संदर्भ: चल रही राष्ट्रीय AI रणनीति AI परिनियोजन के लिए एक नैतिक ढांचे के विकास पर जोर देती है। इसमें डेटा गोपनीयता, एल्गोरिथम पारदर्शिता और जवाबदेही पर दिशानिर्देश शामिल हैं। AI अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण निवेश किया जा रहा है, विशेष रूप से प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण, कंप्यूटर विजन और सामाजिक भलाई के लिए AI जैसे क्षेत्रों में। शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग और सरकार के बीच सहयोग को मजबूत किया जा रहा है। प्रभाव: इस रणनीतिक फोकस का उद्देश्य AI प्रौद्योगिकियों में जनता का विश्वास बनाना, जिम्मेदार नवाचार सुनिश्चित करना और भारत में एक प्रतिस्पर्धी AI उद्योग को बढ़ावा देना है। यह भारतीय जरूरतों और चुनौतियों के अनुरूप AI समाधान विकसित करने में मदद करेगा, जिससे सामाजिक-आर्थिक प्रगति में तेजी आएगी और राष्ट्रीय सुरक्षा बढ़ेगी।
जी7 शिखर सम्मेलन इटली में संपन्न, वैश्विक आर्थिक स्थिरता और एआई शासन पर रहा ध्यान
2026-06-12
पृष्ठभूमि: ग्रुप ऑफ सेवन (जी7) कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका से बना एक अंतर-सरकारी राजनीतिक और आर्थिक मंच है। यह वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के लिए सालाना मिलता है। वर्तमान संदर्भ: 10-12 जून, 2026 को इटली में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन का समापन हुआ, जिसमें नेताओं ने वैश्विक आर्थिक स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और उभरती चुनौतियों के समाधान की पुष्टि की। चर्चाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जिम्मेदार विकास और परिनियोजन के लिए ढांचे स्थापित करने के लिए समर्पित था, जिसका उद्देश्य इसके लाभों का उपयोग करते हुए जोखिमों को कम करना है। नेताओं ने यूक्रेन की संप्रभुता और पुनर्निर्माण प्रयासों के लिए अपने मजबूत समर्थन को भी दोहराया। प्रभाव: शिखर सम्मेलन के परिणामों से अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक नीतियों को प्रभावित करने और एआई विनियमन पर अधिक सहयोग को बढ़ावा देने की उम्मीद है। यूक्रेन के साथ निरंतर एकजुटता का उद्देश्य उसके रक्षा और आर्थिक सुधार को बढ़ावा देना है, जो पूर्वी यूरोप में भू-राजनीतिक गतिशीलता को प्रभावित करेगा।
जी7 चर्चाओं के बीच इटली और जापान ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया
2026-06-12
पृष्ठभूमि: इटली और जापान जी7 के प्रमुख सदस्य हैं, जो एक स्वतंत्र और खुले अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने में साझा मूल्यों और रणनीतिक हितों को साझा करते हैं। दोनों देशों के मजबूत आर्थिक संबंध हैं और वे विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर सहयोग करते हैं। वर्तमान संदर्भ: इटली में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने 11 जून, 2026 को एक द्विपक्षीय बैठक की। उन्होंने अपनी आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने, हरित प्रौद्योगिकी और डिजिटल नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और विशेष रूप से इंडो-पैसिफिक में क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर समन्वय करने के तरीकों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने बहुपक्षवाद के महत्व और वैश्विक संकटों से निपटने में जी7 की भूमिका पर जोर दिया। प्रभाव: इस द्विपक्षीय जुड़ाव से इटली और जापान के बीच व्यापार और निवेश में वृद्धि होने की उम्मीद है। प्रौद्योगिकी और सुरक्षा में बढ़ा हुआ सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता में भी योगदान दे सकता है और द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने की चाह रखने वाले अन्य जी7 सदस्य देशों के लिए एक मॉडल प्रदान कर सकता है।
मई 2026 में भारत का विनिर्माण पीएमआई मजबूत बना रहा
2026-06-12
पृष्ठभूमि: परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के लिए आर्थिक स्वास्थ्य का एक प्रमुख संकेतक है। 50 से ऊपर का पीएमआई विस्तार का संकेत देता है, जबकि 50 से नीचे संकुचन का सुझाव देता है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 में, भारत का विनिर्माण पीएमआई मजबूत रहने की सूचना मिली, जो संभवतः 50-अंकों के निशान से ऊपर बना रहा। यह मजबूत मांग और बेहतर उत्पादन स्तरों से प्रेरित विनिर्माण क्षेत्र के भीतर निरंतर विकास और सकारात्मक भावना का संकेत देता है। प्रभाव: लगातार उच्च पीएमआई आंकड़े स्वस्थ औद्योगिक उत्पादन का सुझाव देते हैं, जो सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि में सकारात्मक योगदान देता है। यह रोजगार के अवसरों में वृद्धि और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में और निवेश की क्षमता का भी संकेत देता है।
आरबीआई मौद्रिक नीति पर यथास्थिति बनाए रखने की संभावना
2026-06-12
पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मुद्रास्फीति को प्रबंधित करने और आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए समय-समय पर अपनी मौद्रिक नीति, जिसमें रेपो दरें शामिल हैं, की समीक्षा करता है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ये निर्णय लेती है। वर्तमान संदर्भ: मुद्रास्फीति में नरमी के संकेत दिखने के बावजूद चिंता का विषय बने रहने और आर्थिक विकास की गति पकड़ने के साथ, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) से जून 2026 की समीक्षा में वर्तमान रेपो दर को बनाए रखने की व्यापक रूप से उम्मीद है। विकास के लिए पर्याप्त तरलता सुनिश्चित करते हुए मुद्रास्फीति लक्ष्य को प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित है। प्रभाव: यथास्थिति बनाए रखने से व्यवसायों और उधारकर्ताओं के लिए स्थिरता और पूर्वानुमेयता मिलेगी। यह चल रही आर्थिक सुधार को बाधित किए बिना आरबीआई की मुद्रास्फीति जनादेश के प्रति प्रतिबद्धता का संकेत देता है।
सरकार ने बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा निवेश को बढ़ावा दिया
2026-06-12
पृष्ठभूमि: भारत आर्थिक विकास को गति देने और स्थिरता लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा में पूंजीगत व्यय पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 के वित्तीय अवधि से पहले, सरकार ने सड़कों, रेलवे और बंदरगाहों सहित प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही, जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए, विशेष रूप से सौर और पवन ऊर्जा में, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में पर्याप्त प्रोत्साहन और नीतिगत समर्थन प्रदान किया जा रहा है। प्रभाव: इन बढ़ते निवेशों से कई रोजगार के अवसर पैदा होने, सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिलने, लॉजिस्टिक दक्षता में सुधार होने और भारत के हरित अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा मिलेगा।
इसरो ने गगनयान क्रू मॉड्यूल रिकवरी परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किए
2026-06-12
पृष्ठभूमि: गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य स्वदेशी क्षमता का प्रदर्शन करना है। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 तक, इसरो ने बंगाल की खाड़ी में क्रू मॉड्यूल रिकवरी परीक्षणों की एक श्रृंखला सफलतापूर्वक पूरी कर ली है, जो समुद्र में उतरने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। इन परीक्षणों में भारतीय नौसेना और विशेष रिकवरी टीमें शामिल थीं। प्रभाव: यह उपलब्धि आगामी मानव मिशन के जोखिम को कम करती है, वास्तविक समुद्री परिस्थितियों में रिकवरी प्रोटोकॉल और हार्डवेयर प्रदर्शन को मान्य करती है, जिससे भारत अपने लक्ष्य के करीब पहुंच गया है।
भारत ने नए सुपरकंप्यूटिंग हब के साथ एआई अनुसंधान बुनियादी ढांचे का विस्तार किया
2026-06-12
पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय एआई मिशन के तहत, भारत का लक्ष्य शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के लिए उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाना है। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 में, सरकार ने बड़े पैमाने पर एआई मॉडल प्रशिक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए समर्पित तीन नए सुपरकंप्यूटिंग हब के संचालन की घोषणा की। ये हब नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) ग्रिड के साथ एकीकृत हैं। प्रभाव: यह विस्तार स्वदेशी एआई विकास में तेजी लाने के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग शक्ति प्रदान करता है, विदेशी क्लाउड बुनियादी ढांचे पर निर्भरता कम करता है और स्वास्थ्य सेवा, कृषि और जलवायु मॉडलिंग जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देता है।
भारत-फ्रांस संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 'वरुण 2026' संपन्न
2026-06-12
पृष्ठभूमि: भारत और फ्रांस अंतरसंचालनीयता तथा समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए नियमित रूप से संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करते हैं। ये अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान संदर्भ: 'वरुण 2026' का नवीनतम संस्करण 10 जून, 2026 को अरब सागर में संपन्न हुआ। इसमें उन्नत पनडुब्बी रोधी युद्ध अभ्यास, वायु रक्षा अभ्यास और संयुक्त सामरिक युद्धाभ्यास शामिल थे, जो दोनों नौसेनाओं के बीच उच्च स्तर के समन्वय को प्रदर्शित करते हैं। प्रभाव: सफल समापन भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक रक्षा संबंधों को मजबूत करता है, क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री डोमेन जागरूकता में योगदान देता है। यह मूल्यवान परिचालन अनुभव भी प्रदान करता है और आपसी विश्वास को मजबूत करता है, जो उभरती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए महत्वपूर्ण है।
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