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भारत के राष्ट्रीय मामले: डिजिटल स्वास्थ्य और शहरी पारगमन 2026

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के बड़े विस्तार की घोषणा की
2026-05-17
पृष्ठभूमि: भारत में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) की शुरुआत एक मजबूत राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र बनाने और डिजिटल माध्यमों से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने के उद्देश्य से की गई थी। वर्तमान संदर्भ: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के एक महत्वपूर्ण विस्तार चरण की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य 2026 के अंत तक टियर-2 और टियर-3 शहरों में सभी सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को एकीकृत करना है। इस महत्वाकांक्षी योजना में सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य डिजिटल स्वास्थ्य आईडी जारी करना और अंतर-संचालनीय इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड स्थापित करना शामिल है। प्रभाव: यह विस्तार स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच और वितरण में क्रांति लाने, रोगी डेटा प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने, सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों की दक्षता बढ़ाने और संभावित रूप से समग्र स्वास्थ्य सेवा लागत को कम करने के लिए तैयार है। यह देश भर में रोगी परिणामों और पहुंच में उल्लेखनीय सुधार करेगा।
आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय शहरी पारगमन नीति 2026 का अनावरण किया
2026-05-17
पृष्ठभूमि: भारतीय शहर लंबे समय से गंभीर यातायात भीड़, बढ़ते प्रदूषण स्तर और अपर्याप्त सार्वजनिक परिवहन बुनियादी ढांचे से जूझ रहे हैं, जो सतत शहरी विकास में बाधा डाल रहे हैं। वर्तमान संदर्भ: आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर "राष्ट्रीय शहरी पारगमन नीति 2026" का अनावरण किया है। यह व्यापक नीति एकीकृत बहु-मॉडल परिवहन प्रणालियों के विकास, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और समर्पित हरित गलियारों के निर्माण पर जोर देती है। यह राज्य-स्तरीय शहरी परिवहन परियोजनाओं का समर्थन करने के लिए पर्याप्त केंद्रीय सरकारी धन आवंटित करती है और प्रमुख शहरों में उन्नत स्मार्ट यातायात प्रबंधन समाधानों के कार्यान्वयन को अनिवार्य करती है। प्रभाव: इस परिवर्तनकारी नीति का उद्देश्य शहरी गतिशीलता में उल्लेखनीय सुधार करना, कार्बन उत्सर्जन को कम करना और शहरवासियों के लिए जीवन की समग्र गुणवत्ता को बढ़ाना है, जिससे बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार पर चर्चा तेज
2026-05-17
पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार की मांग दशकों से जारी है, जिसका उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की संरचना के बजाय समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाना है। प्रमुख मुद्दों में स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यता का विस्तार, वीटो शक्ति और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व शामिल हैं। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 में, संयुक्त राष्ट्र महासभा के भीतर चर्चा तेज हो गई है, जिसमें भारत, जर्मनी, जापान और ब्राजील (जी4 राष्ट्र) सहित कई सदस्य देश विस्तार की दिशा में ठोस कदमों पर जोर दे रहे हैं। बातचीत के लिए एक मसौदा प्रस्ताव प्रतिनिधिमंडलों के बीच प्रसारित हो रहा है। प्रभाव: सफल सुधार वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में यूएनएससी की वैधता और प्रभावशीलता को बढ़ा सकता है, जिससे उभरती शक्तियों को अधिक प्रतिनिधि आवाज मिलेगी। हालांकि, मौजूदा स्थायी सदस्यों का प्रतिरोध और विस्तार की विधियों पर अन्य देशों के बीच असहमति महत्वपूर्ण बाधाएं बनी हुई हैं, जिससे सुधार प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है।
नए आसियान-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत में प्रगति
2026-05-17
पृष्ठभूमि: दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) और यूरोपीय संघ (ईयू) लंबे समय से आर्थिक संबंधों को गहरा करने का प्रयास कर रहे हैं। क्षेत्र-से-क्षेत्र मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के पिछले प्रयासों को चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिससे व्यक्तिगत आसियान सदस्यों के साथ द्विपक्षीय एफटीए पर ध्यान केंद्रित किया गया। वर्तमान संदर्भ: नई राजनीतिक इच्छाशक्ति और सफल द्विपक्षीय समझौतों के बाद, मई 2026 तक एक व्यापक आसियान-ईयू एफटीए के लिए बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति देखी गई है। चर्चा के प्रमुख क्षेत्रों में डिजिटल व्यापार, हरित अर्थव्यवस्था मानक और बौद्धिक संपदा अधिकार शामिल हैं, जिसका लक्ष्य वर्ष के अंत तक एक व्यापक समझौते पर पहुंचना है। प्रभाव: एक सफल आसियान-ईयू एफटीए दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक गुटों में से एक का निर्माण करेगा, जिससे दोनों क्षेत्रों के लिए व्यापार और निवेश प्रवाह को बढ़ावा मिलेगा। यह आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन को बढ़ाएगा, सतत विकास को बढ़ावा देगा और भू-राजनीतिक संरेखण को मजबूत करेगा, अन्य प्रमुख आर्थिक शक्तियों के लिए एक संतुलन प्रदान करेगा।
खुदरा मुद्रास्फीति 12 महीने के निचले स्तर पर
2026-05-17
पृष्ठभूमि: उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) भारत में खुदरा मुद्रास्फीति को मापने का प्राथमिक पैमाना है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 तक, खुदरा मुद्रास्फीति 12 महीने के निचले स्तर पर आ गई है, जिसका मुख्य कारण खाद्य और ईंधन की कीमतों में नरमी है। सरकार के आपूर्ति-पक्ष के हस्तक्षेप और अनुकूल मानसून के अनुमानों ने इस गिरावट में योगदान दिया है। प्रभाव: यह कमी परिवारों को राहत देती है और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को भविष्य में ब्याज दरों में समायोजन पर विचार करने का अवसर देती है, जिससे आने वाली तिमाहियों में उपभोक्ता खर्च और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
आरबीआई ने मौद्रिक नीति पर सतर्क रुख बनाए रखा
2026-05-17
पृष्ठभूमि: आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) विकास का समर्थन करते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 की अपनी मध्य-मासिक समीक्षा में, आरबीआई ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अस्थिर कमोडिटी बाजारों का हवाला देते हुए रेपो दर को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति को 4% (+/- 2%) के लक्ष्य दायरे में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रभाव: यह निर्णय 'प्रतीक्षा करो और देखो' के दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि बैंकिंग प्रणाली में तरलता बनी रहे और मुद्रास्फीति का दबाव फिर से न बढ़े, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता बनी रहे।
इसरो ने उन्नत नेविगेशनल सैटेलाइट NVS-03 लॉन्च किया
2026-05-17
पृष्ठभूमि: भारत का नेविगेशनल विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन (NavIC) सिस्टम विदेशी जीपीएस पर निर्भरता कम करने के लिए सटीक स्थिति और समय सेवाएं प्रदान करता है। इसरो अपनी क्षमताओं और कवरेज को बढ़ाने के लिए इस तारामंडल को नियमित रूप से उन्नत करता है। यह प्रणाली रणनीतिक और नागरिक अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण है। वर्तमान संदर्भ: 15 मई, 2026 को, इसरो ने श्रीहरिकोटा से जीएसएलवी रॉकेट पर NVS-03 उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। इस अगली पीढ़ी के उपग्रह में उन्नत रूबिडियम परमाणु घड़ियाँ, बेहतर सिग्नल शक्ति और उन्नत डेटा प्रोसेसिंग इकाइयाँ शामिल हैं, जो NavIC उपयोगकर्ताओं के लिए अधिक सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करती हैं। प्रभाव: NVS-03 का प्रक्षेपण भारत के स्वदेशी नेविगेशन बुनियादी ढांचे को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करता है, जो स्थलीय, हवाई और समुद्री नेविगेशन, आपदा प्रबंधन और सटीक समय के लिए बेहतर सटीकता प्रदान करता है। यह महत्वपूर्ण अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा आर्थिक विकास में योगदान देता है।
भारतीय शोधकर्ताओं ने तीव्र दवा खोज के लिए एआई प्लेटफॉर्म का अनावरण किया
2026-05-17
पृष्ठभूमि: पारंपरिक दवा खोज एक लंबी और महंगी प्रक्रिया है, जिसमें अक्सर एक दशक से अधिक और अरबों डॉलर लगते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विशेष रूप से जटिल बीमारियों और उपेक्षित स्थितियों के लिए, दवा उम्मीदवारों की पहचान और अनुकूलन में तेजी लाकर परिवर्तनकारी क्षमता प्रदान करती है। वर्तमान संदर्भ: आईआईटी दिल्ली के भारतीय वैज्ञानिकों और एक प्रमुख बायोटेक फर्म के एक संघ ने तीव्र दवा खोज के लिए डिज़ाइन किए गए एक उन्नत एआई-संचालित प्लेटफॉर्म "औषधएआई" के लॉन्च की घोषणा की। औषधएआई लाखों यौगिकों की जांच करने, आणविक अंतःक्रियाओं की भविष्यवाणी करने और विभिन्न बीमारियों, जिसमें एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध भी शामिल है, के लिए आशाजनक चिकित्सीय अणुओं की पहचान करने के लिए डीप लर्निंग एल्गोरिदम का लाभ उठाता है। प्रभाव: यह सफलता दवा विकास की समय-सीमा को काफी कम करती है और लागत घटाती है, जिससे नए उपचार अधिक सुलभ हो जाते हैं। यह भारत को स्वास्थ्य सेवा में एआई के क्षेत्र में सबसे आगे रखता है, फार्मास्युटिकल अनुसंधान में नवाचार को बढ़ावा देता है और वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से समाधान करता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होता है।
भारत-फ्रांस संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 'वरुण-26' संपन्न
2026-05-17
पृष्ठभूमि: भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग में एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी है। 'वरुण' जैसे संयुक्त नौसैनिक अभ्यास दोनों नौसेनाओं के बीच अंतरसंचालनीयता और समुद्री डोमेन जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। वर्तमान संदर्भ: द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'वरुण-26' का 26वां संस्करण 15 मई, 2026 को अरब सागर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इसमें दोनों देशों के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों, पनडुब्बियों और समुद्री गश्ती विमानों की भागीदारी के साथ उन्नत पनडुब्बी रोधी युद्ध अभ्यास, वायु रक्षा अभ्यास और सामरिक युद्धाभ्यास शामिल थे। प्रभाव: यह अभ्यास भारतीय और फ्रांसीसी नौसेनाओं के बीच परिचालन तत्परता और समन्वय को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। यह सहयोगी सुरक्षा ढाँचों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है और द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करता है।
डीआरडीओ ने उन्नत पारंपरिक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल 'प्रलय-II' का सफल परीक्षण किया
2026-05-17
पृष्ठभूमि: भारत लगातार अपनी मिसाइल क्षमताओं को बढ़ाने पर काम कर रहा है, जिसमें रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) स्वदेशी विकास में सबसे आगे है। 'प्रलय' श्रृंखला सटीक हमलों के लिए डिज़ाइन की गई पारंपरिक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइलों की एक नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती है। वर्तमान संदर्भ: डीआरडीओ ने 16 मई, 2026 को ओडिशा तट से अब्दुल कलाम द्वीप से अपनी पारंपरिक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल के उन्नत संस्करण 'प्रलय-II' के सफल परीक्षण की घोषणा की। मिसाइल ने बढ़ी हुई रेंज और सटीक मारक क्षमता का प्रदर्शन किया, उच्च सटीकता के साथ सभी मिशन उद्देश्यों को पूरा किया। प्रभाव: यह सफल परीक्षण भारत की पारंपरिक प्रतिरोधक क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करता है और इसकी रणनीतिक रक्षा स्थिति को सुदृढ़ करता है। यह महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को रेखांकित करता है और सशस्त्र बलों को भविष्य की परिचालन आवश्यकताओं के लिए एक शक्तिशाली, उच्च-सटीक हथियार प्रणाली प्रदान करता है।
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