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राष्ट्रीय मामले: आयुष्मान भव, यूपीआई लाइट, एनसीएफ, डिजिटल लेंडिंग

व्यापक स्वास्थ्य कवरेज के लिए 'आयुष्मान भव' अभियान शुरू
2026-04-27
पृष्ठभूमि: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय लगातार भारत के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और सभी नागरिकों के लिए पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 'आयुष्मान भव' अभियान शुरू किया है। इस राष्ट्रव्यापी पहल का उद्देश्य प्रत्येक गांव और शहरी वार्ड तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, यह सुनिश्चित करते हुए कि कोई भी पीछे न छूटे। अभियान का ध्यान आयुष्मान कार्ड वितरण, आयुष्मान मेलों और स्वास्थ्य जांच जैसी सेवाएं प्रदान करने पर है। प्रभाव: 'आयुष्मान भव' अभियान से निवारक, प्रवर्तक और उपचारात्मक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाकर स्वास्थ्य परिणामों में काफी सुधार होने की उम्मीद है, जिससे एक स्वस्थ भारत में योगदान मिलेगा।
NPCI ने UPI लाइट में लेनदेन सीमाएं बढ़ाकर किया सुधार
2026-04-27
पृष्ठभूमि: नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) यूपीआई जैसे अभिनव प्लेटफार्मों के माध्यम से भारत में डिजिटल भुगतान को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्तमान संदर्भ: छोटे मूल्य के डिजिटल लेनदेन को और सुव्यवस्थित करने और उपयोगकर्ता की सुविधा को बढ़ाने के लिए, NPCI ने UPI लाइट के लिए लेनदेन सीमा को संशोधित किया है। प्रति-लेनदेन सीमा बढ़ा दी गई है, और UPI लाइट वॉलेट के लिए समग्र शेष राशि की सीमा भी समायोजित की गई है। इस कदम का उद्देश्य अधिक उपयोगकर्ताओं को रोजमर्रा के, कम मूल्य वाले भुगतानों के लिए UPI लाइट का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे मुख्य यूपीआई नेटवर्क पर भार कम हो। प्रभाव: बढ़ी हुई UPI लाइट सीमाओं से माइक्रो-लेनदेन के लिए डिजिटल भुगतान को अपनाने में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे यह आबादी के एक बड़े वर्ग के लिए, विशेष रूप से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में, तेज और अधिक सुलभ हो जाएगा।
प्रारंभिक चरण के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा जारी
2026-04-27
पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 बच्चे के समग्र विकास के लिए प्रारंभिक बचपन की शिक्षा और देखभाल (ECCE) के महत्वपूर्ण महत्व पर जोर देती है। वर्तमान संदर्भ: शिक्षा मंत्रालय ने प्रारंभिक चरण (3-8 वर्ष की आयु) के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) जारी की है। यह रूपरेखा प्रारंभिक बचपन की शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम, शिक्षणशास्त्र और मूल्यांकन के लिए दिशानिर्देश प्रदान करती है, जो खेल-आधारित और गतिविधि-आधारित सीखने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य छोटे बच्चों के लिए विकासात्मक रूप से उपयुक्त, आकर्षक और समावेशी सीखने का माहौल बनाना है। प्रभाव: प्रारंभिक चरण के लिए NCF एक ऐतिहासिक दस्तावेज है जो भारत भर में प्रारंभिक सीखने के अनुभवों को आकार देगा, बच्चों में संज्ञानात्मक, सामाजिक, भावनात्मक और शारीरिक विकास को बढ़ावा देगा, और भविष्य की शिक्षा के लिए एक मजबूत नींव रखेगा।
RBI ने डिजिटल ऋण के लिए नए दिशानिर्देश पेश किए
2026-04-27
पृष्ठभूमि: डिजिटल ऋण प्लेटफार्मों की तीव्र वृद्धि ने सुविधा प्रदान की है, लेकिन पारदर्शिता, निष्पक्षता और उपभोक्ता संरक्षण के संबंध में चिंताएं भी बढ़ाई हैं। वर्तमान संदर्भ: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इन चिंताओं को दूर करने के लिए डिजिटल ऋण के लिए व्यापक नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। दिशानिर्देशों का उद्देश्य उधारकर्ताओं को अनुचित प्रथाओं से बचाना, ऋण मूल्य निर्धारण और शुल्कों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना, और मजबूत डेटा गोपनीयता और सुरक्षा उपायों को अनिवार्य करना है। वे सभी शुल्कों के अग्रिम प्रकटीकरण, कूलिंग-ऑफ अवधि और शिकायत निवारण तंत्र जैसे पहलुओं को कवर करते हैं। प्रभाव: इन विनियमों से डिजिटल ऋण पारिस्थितिकी तंत्र में अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता आने की उम्मीद है, जिससे उपभोक्ताओं के बीच विश्वास बढ़ेगा और उधारकर्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए फिनटेक क्षेत्र में जिम्मेदार नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गाजा संकट और युद्धविराम पर बहस की
2026-04-27
पृष्ठभूमि: गाजा में चल रहे संघर्ष के कारण बड़े पैमाने पर विस्थापन और विनाश के साथ एक गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है। शत्रुता की समाप्ति के लिए अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ा है। वर्तमान संदर्भ: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 26 अप्रैल, 2026 को मध्य पूर्व में बिगड़ती स्थिति पर चर्चा करने के लिए एक उच्च-स्तरीय बहस आयोजित की। मुख्य एजेंडा मदों में युद्धविराम की तत्काल आवश्यकता, निर्बाध मानवीय पहुंच और नागरिकों की सुरक्षा शामिल थी। सदस्य देशों ने द्वि-राष्ट्र समाधान के लिए अपने आह्वान को दोहराया। प्रभाव: इस बहस का उद्देश्य तनाव कम करने और मानवीय सहायता पहुंचाने पर अंतर्राष्ट्रीय सहमति को बढ़ावा देना था। इसने अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने में सुरक्षा परिषद की भूमिका को उजागर किया, जो स्थायी समाधान की दिशा में राजनयिक प्रयासों को प्रभावित कर सकता है।
आईएमएफ ने मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच वैश्विक विकास का अनुमान घटाया
2026-04-27
पृष्ठभूमि: हाल की भू-राजनीतिक घटनाओं के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था ऊँची मुद्रास्फीति दर और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों से जूझ रही है। केंद्रीय बैंक बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए मौद्रिक नीतियों को सख्त कर रहे हैं। वर्तमान संदर्भ: 25 अप्रैल, 2026 को, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपना नवीनतम विश्व आर्थिक आउटलुक जारी किया। रिपोर्ट में 2026 के लिए वैश्विक विकास दर 2.8% रहने का अनुमान लगाया गया है, जो पिछली 3.1% की भविष्यवाणी से कम है। इसके कारणों में लगातार मुद्रास्फीति, पूर्वी यूरोप में युद्ध का प्रभाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में धीमी वृद्धि बताई गई है। प्रभाव: यह संशोधित अनुमान अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश के लिए संभावित बाधाओं का संकेत देता है। यह सरकारों और केंद्रीय बैंकों को अपनी आर्थिक रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित कर सकता है और निवेशकों द्वारा धीमी वृद्धि की उम्मीदों पर प्रतिक्रिया करने पर वित्तीय बाजारों में बढ़ी हुई अस्थिरता पैदा कर सकता है।
डब्ल्यूएचओ ने कोविड-19 के नए वेरिएंट्स की चेतावनी दी, महामारी की तैयारी बढ़ाने का आग्रह किया
2026-04-27
पृष्ठभूमि: कोविड-19 महामारी का गहरा वैश्विक प्रभाव पड़ा है, जिसके लिए वायरल विकास और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रियाओं की निरंतर निगरानी की आवश्यकता है। वर्तमान संदर्भ: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 27 अप्रैल, 2026 को एक बयान जारी किया, जिसमें SARS-CoV-2 के कई नए वेरिएंट्स के उद्भव पर प्रकाश डाला गया। ये वेरिएंट, हालांकि अभी तक चिंताजनक वेरिएंट (VOCs) के रूप में वर्गीकृत नहीं किए गए हैं, प्रारंभिक अध्ययनों में बढ़ी हुई संक्रामकता प्रदर्शित करते हैं। डब्ल्यूएचओ ने सदस्य देशों से अपनी जीनोमिक निगरानी क्षमताओं और टीकाकरण कार्यक्रमों को मजबूत करने का आग्रह किया। प्रभाव: यह चेतावनी वायरस के खिलाफ निरंतर सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करती है। बेहतर तैयारी भविष्य की लहरों के प्रभाव को कम करने, स्वास्थ्य प्रणाली पर बोझ को रोकने और अद्यतन टीकों और उपचारों के समय पर विकास और तैनाती सुनिश्चित करने में मदद कर सकती है।
आरबीआई ने नई तरलता प्रबंधन रूपरेखा की घोषणा की
2026-04-27
पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मूल्य स्थिरता और वित्तीय विकास सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर अपने तरलता प्रबंधन उपकरणों की समीक्षा करता है। वर्तमान संदर्भ: 26 अप्रैल, 2026 को, आरबीआई ने अंतर-बैंक बाजार में अल्पकालिक अस्थिरता को दूर करने के लिए तरलता समायोजन सुविधा (LAF) के लिए एक संशोधित ढांचा पेश किया। यह कदम वाणिज्यिक बैंकों को अपने दैनिक नकद भंडार के प्रबंधन में अधिक लचीलापन प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रभाव: इस नीति से रातोंरात ब्याज दर में उतार-चढ़ाव कम होने की उम्मीद है, जिससे अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों में ऋण प्रवाह सुचारू होगा।
कॉर्पोरेट क्षेत्र ने हरित ऊर्जा बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाया
2026-04-27
पृष्ठभूमि: भारत ने महत्वाकांक्षी नेट-जीरो लक्ष्यों के लिए प्रतिबद्धता जताई है, जिसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा में निजी क्षेत्र की भारी भागीदारी आवश्यक है। वर्तमान संदर्भ: अप्रैल 2026 के अंत तक, प्रमुख भारतीय समूहों ने ग्रीन हाइड्रोजन और सौर विनिर्माण केंद्रों में 15 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड निवेश की घोषणा की है। यह उछाल टिकाऊ औद्योगिक प्रथाओं के लिए सरकार द्वारा हाल ही में दिए गए प्रोत्साहनों के बाद आया है। प्रभाव: यह भारी पूंजी निवेश जीवाश्म ईंधन आयात पर भारत की निर्भरता को काफी कम करेगा, हजारों हरित नौकरियां पैदा करेगा और भारत को नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करेगा।
इसरो ने शुक्रयान-1 शुक्र मिशन के लिए पेलोड एकीकरण पूरा किया
2026-04-27
पृष्ठभूमि: इसरो का शुक्रयान-1 हमारे सौर मंडल के सबसे गर्म ग्रह, शुक्र के वायुमंडल और सतह का अध्ययन करने के लिए एक नियोजित ऑर्बिटर मिशन है। वर्तमान संदर्भ: 27 अप्रैल, 2026 को, इसरो ने हाई-रिज़ॉल्यूशन सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) और वीनशियन न्यूट्रल्स एनालाइजर के सफल एकीकरण की घोषणा की। यह 2026 के अंत में निर्धारित लॉन्च विंडो से पहले एक महत्वपूर्ण तकनीकी मील का पत्थर है। प्रभाव: यह मिशन शुक्र के 'रनवे ग्रीनहाउस प्रभाव' पर अभूतपूर्व डेटा प्रदान करेगा, जो पृथ्वी के जलवायु मॉडलिंग के लिए महत्वपूर्ण सुराग देगा। यह मंगल और चंद्रमा से आगे ग्रह अन्वेषण में भारत की स्थिति को मजबूत करता है और वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देता है।
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