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विज्ञान और प्रौद्योगिकी: इसरो नेविक, एआई दवा खोज अपडेट

इसरो के अगली पीढ़ी के NavIC उपग्रह प्रक्षेपण से भारत की नेविगेशन क्षमताएं बढ़ीं
2026-07-03
पृष्ठभूमि: भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली, NavIC (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन), सामरिक और नागरिक अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण रही है, जिससे विदेशी जीपीएस पर निर्भरता कम हुई है। इसरो लगातार अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इस महत्वपूर्ण तारामंडल को उन्नत और विस्तारित करने पर काम कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: 2 जुलाई, 2026 को, इसरो ने श्रीहरिकोटा से एक उन्नत GSLV Mk-III रॉकेट पर सवार होकर अगली पीढ़ी के NavIC उपग्रह, NVS-03 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। इस उपग्रह में बेहतर नागरिक उपयोग के लिए L1 बैंड सिग्नल और उन्नत परमाणु घड़ियाँ शामिल हैं, जो मौजूदा तारामंडल के लिए एक महत्वपूर्ण उन्नयन है। प्रभाव: यह प्रक्षेपण NavIC की सटीकता, विश्वसनीयता और सिग्नल उपलब्धता को बढ़ाएगा, विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण वातावरण में। यह उपग्रह नेविगेशन में भारत की आत्मनिर्भरता को और मजबूत करेगा, जिससे रक्षा, आपदा प्रबंधन, परिवहन और स्थान-आधारित सेवाओं जैसे क्षेत्रों को लाभ होगा, और वैश्विक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
राष्ट्रीय एआई कंप्यूटिंग अवसंरचना का विस्तार
2026-07-02
पृष्ठभूमि: सरकार ने एआई तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए इंडियाएआई मिशन शुरू किया। वर्तमान संदर्भ: जुलाई 2026 तक, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने प्रमुख अनुसंधान केंद्रों में जीपीयू-आधारित कंप्यूटिंग क्लस्टर की तैनाती को बढ़ाया है। यह अवसंरचना स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों को उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग शक्ति प्रदान करती है। प्रभाव: यह पहल विदेशी क्लाउड प्रदाताओं पर निर्भरता कम करती है और एआई मॉडल प्रशिक्षण की लागत को घटाती है। यह स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs) के विकास में तेजी लाती है और कृषि, स्वास्थ्य सेवा और शासन क्षेत्रों के लिए स्थानीय एआई समाधानों को बढ़ावा देती है।
इसरो ने गगनयान क्रू मॉड्यूल परीक्षण को आगे बढ़ाया
2026-07-02
पृष्ठभूमि: गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य स्वदेशी क्षमता का प्रदर्शन करना है। वर्तमान संदर्भ: जुलाई 2026 तक, इसरो ने अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उच्च-ऊंचाई वाले एबॉर्ट परीक्षण और एकीकृत मॉड्यूल सिमुलेशन सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। ये परीक्षण क्रू एस्केप सिस्टम (CES) और पैराशूट परिनियोजन तंत्र पर केंद्रित हैं। प्रभाव: इन प्रणालियों का सफल सत्यापन आगामी मानव मिशन के लिए महत्वपूर्ण है। यह भारत को मानव अंतरिक्ष अन्वेषण में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है और भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशन लक्ष्यों का मार्ग प्रशस्त करता है।
भारत ने राष्ट्रीय क्वांटम कंप्यूटिंग अनुसंधान को बढ़ावा दिया
2026-07-01
पृष्ठभूमि: क्वांटम प्रौद्योगिकियों, जिसमें कंप्यूटिंग, संचार और सेंसिंग शामिल हैं, में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) शुरू किया गया था। वर्तमान संदर्भ: जुलाई 2026 में, सरकार ने स्वदेशी क्वांटम प्रोसेसर विकसित करने के लिए शैक्षणिक-उद्योग साझेदारी के लिए नई फंडिंग की घोषणा की। यह पहल क्यूबिट स्थिरता और त्रुटि सुधार एल्गोरिदम को बढ़ाने पर केंद्रित है। प्रभाव: यह विकास क्रिप्टोग्राफी, दवा खोज और सामग्री विज्ञान जैसे क्षेत्रों में क्रांति लाने के लिए तैयार है। एक स्वदेशी क्वांटम पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर, भारत तकनीकी संप्रभुता प्राप्त करना चाहता है।
इसरो ने गगनयान क्रू मॉड्यूल परीक्षण को आगे बढ़ाया
2026-07-01
पृष्ठभूमि: गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य स्वदेशी क्षमता का प्रदर्शन करना है। वर्तमान संदर्भ: जुलाई 2026 तक, इसरो ने पैराशूट परिनियोजन प्रणालियों को मान्य करने के लिए क्रू मॉड्यूल (CM) के लिए उच्च-ऊंचाई ड्रॉप परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। ये परीक्षण पुनः प्रवेश के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। प्रभाव: इन प्रणालियों का सफल सत्यापन भारत को मानव मिशन लॉन्च करने के लक्ष्य के करीब लाता है, जिससे देश वैश्विक मानव अंतरिक्ष उड़ान में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित होता है।
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