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पर्यावरण और पारिस्थितिकी समसामयिकी: जलवायु, वन्यजीव और नीति अपडेट

जलवायु लचीलापन और अनुकूलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता
2026-06-21
पृष्ठभूमि: भारत जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को संबोधित करने के लिए वैश्विक जलवायु वार्ताओं में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है और राष्ट्रीय नीतियों को लागू कर रहा है। देश अपनी लंबी तटरेखा और कृषि जैसे जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों पर निर्भरता के कारण महत्वपूर्ण कमजोरियों का सामना करता है। वर्तमान संदर्भ: हालिया रिपोर्टें भारत के जलवायु लचीलेपन पर बढ़े हुए ध्यान को उजागर करती हैं, जिसमें चरम मौसम की घटनाओं के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों में निवेश में वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन अनुकूलन कोष (NAFCC) विभिन्न क्षेत्रों की भेद्यता को कम करने के उद्देश्य से परियोजनाओं का समर्थन करना जारी रखता है। प्रभाव: ये प्रयास कमजोर समुदायों की रक्षा करने, कृषि उत्पादकता की रक्षा करने और जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करके दीर्घकालिक सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
बाघ जनगणना से संरक्षित क्षेत्रों में आबादी में वृद्धि का खुलासा
2026-06-20
पृष्ठभूमि: बाघ शीर्ष शिकारी हैं जो पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनका संरक्षण भारत के लिए प्राथमिकता है, जो दुनिया की बाघ आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के भीतर विभिन्न संरक्षण प्रयास किए जाते हैं। वर्तमान संदर्भ: नवीनतम अखिल भारतीय बाघ अनुमान रिपोर्ट भारत के संरक्षित क्षेत्रों में बाघों की आबादी में लगातार वृद्धि का संकेत देती है। इस वृद्धि का श्रेय प्रभावी संरक्षण रणनीतियों, बढ़ी हुई गश्त, आवास सुधार और अवैध शिकार विरोधी प्रयासों में सामुदायिक भागीदारी को दिया जाता है। विशिष्ट आरक्षित वनों ने उल्लेखनीय सुधार दिखाया है। प्रभाव: बाघों की बढ़ती संख्या सफल संरक्षण पहलों और बेहतर आवास स्थितियों का प्रतीक है। यह जैव विविधता संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और वन्यजीव संरक्षण में एक वैश्विक नेता के रूप में उसकी स्थिति को पुष्ट करता है। हालांकि, यह आवास विखंडन और मानव-वन्यजीव संघर्ष के खिलाफ निरंतर सतर्कता की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
हरित हाइड्रोजन के लिए राष्ट्रीय मिशन से नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा
2026-06-20
पृष्ठभूमि: जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य स्वच्छ विकल्पों की ओर बढ़ रहा है। हरित हाइड्रोजन, जो नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके उत्पादित की जाती है, को एक प्रमुख समाधान के रूप में देखा जा रहा है। वर्तमान संदर्भ: भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, जिसे महत्वपूर्ण वित्तीय परिव्यय के साथ लॉन्च किया गया है, का उद्देश्य देश को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाना है। यह स्वदेशी इलेक्ट्रोलाइज़र विनिर्माण क्षमता विकसित करने, अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने और रिफाइनिंग, उर्वरक और परिवहन जैसे क्षेत्रों में हरित हाइड्रोजन की मांग पैदा करने पर केंद्रित है। प्रभाव: इस मिशन से भारत की आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता काफी कम होने, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आने और पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। यह भारत के शुद्ध-शून्य लक्ष्यों के अनुरूप है और देश को उभरती हुई हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था में एक अग्रणी के रूप में स्थापित करता है।
2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लिए भारत की प्रतिबद्धता
2026-06-20
पृष्ठभूमि: भारत, एक प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्था, आर्थिक विकास और जलवायु परिवर्तन शमन की दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। अपनी वैश्विक जिम्मेदारी को पहचानते हुए, भारत ने महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्य निर्धारित किए हैं। वर्तमान संदर्भ: COP26 में, भारत ने 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने का संकल्प लिया। इस प्रतिबद्धता में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर एक महत्वपूर्ण परिवर्तन, ऊर्जा दक्षता में सुधार और टिकाऊ औद्योगिक प्रथाओं को अपनाना शामिल है। सरकार सक्रिय रूप से सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा दे रही है। प्रभाव: इस दीर्घकालिक लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों, तकनीकी प्रगति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है। इसका उद्देश्य भारत के कार्बन फुटप्रिंट को कम करना, ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना और वैश्विक जलवायु स्थिरता में योगदान देना है, साथ ही हरित क्षेत्रों में नए आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देना है।
पश्चिमी घाट में उभयचर विविधता में गिरावट पर नई रिपोर्ट
2026-06-19
पृष्ठभूमि: पश्चिमी घाट, एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट, अपनी अद्वितीय उभयचर प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है, जिनमें से कई स्थानिक हैं। हालांकि, आवास हानि, जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण ने महत्वपूर्ण खतरे पैदा किए हैं। वर्तमान संदर्भ: भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) द्वारा 17 जून, 2026 को जारी एक व्यापक रिपोर्ट में पिछले दशक में पश्चिमी घाट के प्रमुख क्षेत्रों में उभयचर आबादी में चिंताजनक 15% की गिरावट का खुलासा हुआ है। अध्ययन इस गिरावट का मुख्य कारण वनों की कटाई, कृषि क्षेत्रों में कीटनाशकों का उपयोग और वर्षा के बदलते पैटर्न को बताता है। प्रभाव: यह रिपोर्ट पर्यावरण नियमों के सख्त प्रवर्तन, पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने और अधिक संरक्षित क्षेत्रों की स्थापना सहित उन्नत संरक्षण प्रयासों की तत्काल आवश्यकता पर जोर देती है। यह इस महत्वपूर्ण जैव विविधता के आगे अपरिवर्तनीय नुकसान को रोकने के लिए तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप का आह्वान करती है।
भारत ने राष्ट्रीय तटीय लचीलापन मिशन शुरू किया
2026-06-19
पृष्ठभूमि: भारत की विशाल तटरेखा समुद्र-स्तर में वृद्धि, तूफान और तटीय कटाव जैसे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, जिससे आजीविका और पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में हैं। पिछले प्रयास अक्सर स्थानीयकृत थे। वर्तमान संदर्भ: 18 जून, 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने "राष्ट्रीय तटीय लचीलापन मिशन 2030" का शुभारंभ किया। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का उद्देश्य जलवायु अनुकूलन रणनीतियों को एकीकृत करना, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करना, मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना और सभी तटीय राज्यों में लचीले बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है। यह सामुदायिक भागीदारी और सतत संसाधन प्रबंधन पर जोर देता है। प्रभाव: इस मिशन से तटीय खतरों के खिलाफ भारत की तैयारी में उल्लेखनीय वृद्धि होने, कमजोर समुदायों की रक्षा करने और महत्वपूर्ण तटीय जैव विविधता को सुरक्षित रखने की उम्मीद है। यह जलवायु कार्रवाई और जलीय जीवन से संबंधित सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी योगदान देगा, जिससे एक अधिक सुरक्षित और पारिस्थितिक रूप से संतुलित तटीय भविष्य का निर्माण होगा।
शहरी ताप शमन और जैव विविधता रणनीति
2026-06-18
पृष्ठभूमि: तेजी से शहरीकरण ने 'अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव को जन्म दिया है, जो स्थानीय वनस्पतियों और जीवों के लिए खतरा है। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 में, सरकार ने बढ़ते तापमान से निपटने के लिए महानगरों में 'ग्रीन कॉरिडोर' के लिए दिशानिर्देश पेश किए। ये कॉरिडोर शहरी वातावरण को ठंडा करने और शहरी वन्यजीवों को आश्रय प्रदान करने के लिए देशी वनस्पतियों को एकीकृत करते हैं। प्रभाव: इस रणनीति से अगले पांच वर्षों में शहर के तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की कमी आने की उम्मीद है। शहरी वानिकी को बढ़ावा देकर, यह नीति जैव विविधता लचीलेपन को बढ़ावा देती है।
राष्ट्रीय जैव विविधता कार्य योजना 2026 अपडेट
2026-06-18
पृष्ठभूमि: भारत कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क का हस्ताक्षरकर्ता है। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 तक, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राष्ट्रीय लक्ष्यों को वैश्विक लक्ष्यों के साथ संरेखित करने के लिए एक संशोधित कार्य योजना शुरू की है। इसमें 2030 तक 30% खराब पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना शामिल है। प्रभाव: इस पहल का उद्देश्य आवास कनेक्टिविटी को बढ़ाना और लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा करना है। यह राज्यों को स्थानीयकृत संरक्षण रणनीतियों को लागू करने के लिए एक रोडमैप प्रदान करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि जैव विविधता के नुकसान को रोका जा सके।
सरकार ने ई-कचरा प्रबंधन नीति फ्रेमवर्क 2.0 का अनावरण किया
2026-06-17
पृष्ठभूमि: भारत में तेजी से तकनीकी प्रगति के कारण इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-कचरा) में काफी वृद्धि हुई है, जिससे अनुचित निपटान के कारण महत्वपूर्ण पर्यावरणीय और स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो रहे हैं। बढ़ती चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए मौजूदा नियमों में व्यापक अपडेट की आवश्यकता थी। वर्तमान संदर्भ: सरकार ने 'ई-कचरा प्रबंधन नीति फ्रेमवर्क 2.0' पेश किया है, जो एक संशोधित और मजबूत नीति है। यह विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (ईपीआर) मानदंडों को सख्त करता है, औपचारिक रीसाइक्लिंग इकाइयों की स्थापना और संचालन को प्रोत्साहित करता है, और ई-कचरे के लिए एक डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली लागू करता है। यह फ्रेमवर्क इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में चक्रीय अर्थव्यवस्था सिद्धांतों को बढ़ावा देने पर भी जोर देता है। प्रभाव: इस अद्यतन नीति से ई-कचरा संग्रह और रीसाइक्लिंग दरों में उल्लेखनीय सुधार होने, खतरनाक सामग्रियों से होने वाले पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करने और अधिक टिकाऊ इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह औपचारिक रीसाइक्लिंग क्षेत्र में नए हरित रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा।
भारत ने राष्ट्रीय मैंग्रोव बहाली मिशन 2026 का शुभारंभ किया
2026-06-17
पृष्ठभूमि: मैंग्रोव महत्वपूर्ण तटीय पारिस्थितिक तंत्र हैं जो प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा प्रदान करते हैं और समृद्ध जैव विविधता का समर्थन करते हैं। भारत को विकासात्मक दबावों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण अपने मैंग्रोव आवरण को संरक्षित करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने आधिकारिक तौर पर 'राष्ट्रीय मैंग्रोव बहाली मिशन 2026' का शुभारंभ किया है। इस महत्वाकांक्षी पहल का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में विभिन्न तटीय राज्यों में 10,000 हेक्टेयर खराब हुए मैंग्रोव वनों को बहाल करना है, जिसमें उन्नत उपग्रह निगरानी और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को एकीकृत किया जाएगा। प्रभाव: यह मिशन भारत के तटीय लचीलेपन को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा, कमजोर पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा करेगा और जैव विविधता संरक्षण में योगदान देगा। यह तटीय समुदायों की आजीविका का भी समर्थन करता है और भारत की राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय जलवायु कार्रवाई प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
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