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भारत में हरित हाइड्रोजन और शहरी आर्द्रभूमि संरक्षण प्रगति

पर्यावरण मंत्रालय ने शहरी आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए व्यापक राष्ट्रीय नीति का अनावरण किया
2026-06-30
पृष्ठभूमि: शहरी आर्द्रभूमियाँ महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र हैं जो बाढ़ नियंत्रण, जल शुद्धिकरण और जैव विविधता समर्थन जैसी महत्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान करती हैं। हालाँकि, वे तीव्र शहरीकरण, अतिक्रमण और प्रदूषण से गंभीर खतरों का सामना करती हैं, जिससे भारतीय शहरों में उनका क्षरण और नुकसान हो रहा है। मौजूदा संरक्षण प्रयासों में अक्सर एक एकीकृत राष्ट्रीय ढाँचे का अभाव होता है। वर्तमान संदर्भ: एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने जून 2026 में शहरी आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए एक नई, व्यापक राष्ट्रीय नीति शुरू की। यह नीति एकीकृत प्रबंधन योजनाओं को अनिवार्य करती है, सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देती है और इन महत्वपूर्ण शहरी हरित स्थानों की रक्षा और बहाली के लिए नियामक ढाँचे को मजबूत करती है। प्रभाव: इस नीति से शहरी पारिस्थितिक लचीलेपन में उल्लेखनीय वृद्धि होने, जल सुरक्षा में सुधार होने और अद्वितीय शहरी जैव विविधता के संरक्षण की उम्मीद है। यह शहरी बाढ़ को कम करने, वायु गुणवत्ता में सुधार करने और मनोरंजक स्थान प्रदान करने में मदद करेगा, जिससे देश भर में स्वस्थ और अधिक टिकाऊ शहरी वातावरण में योगदान मिलेगा।
भारत ने हरित हाइड्रोजन उत्पादन लक्ष्यों को पार किया, ऊर्जा संक्रमण को मिला बढ़ावा
2026-06-30
पृष्ठभूमि: भारत ने हरित हाइड्रोजन उत्पादन और उपयोग में वैश्विक अग्रणी बनने के उद्देश्य से राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन शुरू किया था, जिसका लक्ष्य विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण डीकार्बोनाइजेशन प्राप्त करना है। यह मिशन स्वदेशी विनिर्माण क्षमताओं के विकास और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने पर केंद्रित है। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 तक, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने घोषणा की है कि भारत ने कई बड़े पैमाने पर हरित हाइड्रोजन उत्पादन सुविधाओं को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है, विशेष रूप से तटीय राज्यों में, जिससे प्रारंभिक चरण के लक्ष्यों को पार कर लिया गया है। यह उपलब्धि मजबूत नीतिगत समर्थन, निजी क्षेत्र के निवेश और इलेक्ट्रोलाइजर प्रौद्योगिकी में प्रगति के कारण संभव हुई है। प्रभाव: यह त्वरित प्रगति भारत के जलवायु परिवर्तन शमन प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान देती है, ऊर्जा स्वतंत्रता को बढ़ावा देती है और कई हरित रोजगार सृजित करती है। यह भारत को वैश्विक हरित ऊर्जा बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है, जिससे सतत औद्योगिक विकास और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।
शहरी ताप शमन और हरित आवरण विस्तार
2026-06-29
पृष्ठभूमि: तीव्र शहरीकरण के कारण 'अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव बढ़ा है, जो स्थानीय जैव विविधता को प्रभावित कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 के अंत में, सरकार ने टियर-1 शहरों में शहरी हरित आवरण को 15% तक बढ़ाने के लिए एक नई पहल शुरू की। इसमें देशी प्रजातियों का रोपण और खाली नगरपालिका भूमि पर 'मियावाकी' वन बनाना शामिल है। प्रभाव: इस पहल का उद्देश्य परिवेश के तापमान को कम करना और शहरी वायु गुणवत्ता में सुधार करना है। स्थानीय वनस्पतियों को बहाल करके, यह शहरी वन्यजीवों के लिए सूक्ष्म-आवास बनाता है, जिससे पारिस्थितिक संतुलन बढ़ता है।
राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) अपडेट
2026-06-29
पृष्ठभूमि: भारत कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क का हस्ताक्षरकर्ता है। NBSAP राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए रोडमैप के रूप में कार्य करता है। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 तक, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 30x30 लक्ष्य के साथ संरेखित करने के लिए राज्य-स्तरीय कार्यान्वयन रणनीतियों की समीक्षा शुरू की है। प्रभाव: यह अपडेट सुनिश्चित करता है कि भारत आवास बहाली और प्रजातियों के संरक्षण की प्रभावी ढंग से निगरानी करे। यह राज्यों के लिए जैव विविधता संरक्षण को विकास योजना में एकीकृत करने हेतु एक संरचित ढांचा प्रदान करता है।
ई-कचरा प्रबंधन नीति ढांचा 2.0
2026-06-28
पृष्ठभूमि: इलेक्ट्रॉनिक कचरा (ई-कचरा) खतरनाक घटकों और बढ़ती मात्रा के कारण एक बड़ी पर्यावरणीय चुनौती है। भारत के पिछले ई-कचरा नियमों को लागू करने में बाधाएं थीं, जिससे अनौपचारिक क्षेत्र का प्रभुत्व रहा। वर्तमान संदर्भ: 26 जून, 2026 को पर्यावरण मंत्रालय ने "ई-कचरा प्रबंधन नीति ढांचा 2.0" का अनावरण किया। यह नीति सख्त विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) लक्ष्य, उन्नत रीसाइक्लिंग प्रौद्योगिकियों और ई-कचरा प्रवाह के लिए डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली पेश करती है। प्रभाव: नए ढांचे से ई-कचरा रीसाइक्लिंग क्षेत्र औपचारिक होगा, अनुचित निपटान से प्रदूषण कम होगा और संसाधन पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा मिलेगा। यह हरित रोजगार भी पैदा करेगा और भारत की ई-कचरा प्रथाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाएगा।
भारत ने राष्ट्रीय मैंग्रोव बहाली पहल शुरू की
2026-06-28
पृष्ठभूमि: मैंग्रोव महत्वपूर्ण तटीय पारिस्थितिकी तंत्र हैं, जो तूफानों से सुरक्षा, जैव विविधता और कार्बन पृथक्करण प्रदान करते हैं। भारत के मैंग्रोव वन मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन से क्षरण का सामना कर रहे हैं। वर्तमान संदर्भ: 27 जून, 2026 को पर्यावरण मंत्रालय ने "राष्ट्रीय मैंग्रोव बहाली पहल 2026" (NMRI-2026) शुरू की। यह कार्यक्रम 10 तटीय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मैंग्रोव आवरण को पांच वर्षों में बहाल और विस्तारित करेगा, जिसमें उपग्रह मानचित्रण और सामुदायिक भागीदारी शामिल है। प्रभाव: यह पहल तटीय लचीलेपन को बढ़ाएगी, समुदायों को अत्यधिक मौसम से बचाएगी और समुद्री जैव विविधता को बढ़ावा देगी। यह जलवायु लक्ष्यों में योगदान देगी और स्थानीय मछली पकड़ने वालों के लिए स्थायी आजीविका को प्रोत्साहित करेगी।
ई-कचरा प्रबंधन 2.0 के लिए नए दिशानिर्देश जारी
2026-06-27
पृष्ठभूमि: भारत में भारी ई-कचरा उत्पन्न होता है, जिसका अनुचित प्रबंधन पर्यावरणीय और स्वास्थ्य खतरे पैदा करता है। मौजूदा नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन में चुनौतियां थीं। वर्तमान संदर्भ: 26 जून, 2026 को, MoEFCC के तहत CPCB ने "ई-कचरा प्रबंधन दिशानिर्देश 2.0" जारी किए। ये दिशानिर्देश सख्त EPR लक्ष्य, उन्नत रीसाइक्लिंग प्रौद्योगिकियां और ई-कचरा संग्रह के लिए डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली अनिवार्य करते हैं। प्रभाव: संशोधित ढांचा ई-कचरा संग्रह को सुव्यवस्थित करेगा, रीसाइक्लिंग दरों में सुधार करेगा और अवैध डंपिंग घटाएगा। यह चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा, संसाधन क्षरण कम करेगा, और खतरनाक सामग्री प्रदूषण को रोकेगा, जिससे स्वच्छ वातावरण बनेगा।
भारत ने राष्ट्रीय मैंग्रोव बहाली पहल शुरू की
2026-06-27
पृष्ठभूमि: मैंग्रोव महत्वपूर्ण तटीय पारिस्थितिकी तंत्र हैं, जो तटरेखाओं की रक्षा और जैव विविधता का समर्थन करते हैं। मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन से भारत के मैंग्रोव आवरण में काफी गिरावट आई है। वर्तमान संदर्भ: 25 जून, 2026 को, MoEFCC ने नौ तटीय राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में "राष्ट्रीय मैंग्रोव बहाली पहल" शुरू की। इसका उद्देश्य सामुदायिक भागीदारी और वैज्ञानिक तरीकों से degraded मैंग्रोव वनों को बहाल करना और उनका विस्तार करना है। प्रभाव: यह पहल तटीय लचीलेपन को बढ़ाएगी, समुद्री जैव विविधता की रक्षा करेगी और कार्बन पृथक्करण को बढ़ावा देगी। यह स्थायी आजीविका भी बनाएगी, जिससे भारत की जलवायु कार्रवाई और संरक्षण प्रयासों को मजबूती मिलेगी।
पश्चिमी घाट हरित गलियारा परियोजना का शुभारंभ
2026-06-26
पृष्ठभूमि: यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल पश्चिमी घाट, आवास हानि, जलवायु परिवर्तन और अस्थिर विकास के गंभीर खतरों का सामना कर रहा एक वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट है। वर्तमान संदर्भ: सरकार ने गैर-सरकारी संगठनों और स्थानीय समुदायों के सहयोग से "पश्चिमी घाट हरित गलियारा परियोजना" शुरू की है। इसका उद्देश्य कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में पारिस्थितिक गलियारे स्थापित करना, degraded वन क्षेत्रों को बहाल करना और स्वदेशी समुदायों हेतु स्थायी आजीविका को बढ़ावा देना है। प्रभाव: यह पहल स्थानिक प्रजातियों के संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और महत्वपूर्ण नदी प्रणालियों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। यह स्थानीय समुदायों को जैव विविधता के संरक्षक के रूप में सशक्त बनाएगी, सहभागी संरक्षण को बढ़ावा देगी।
भारत ने राष्ट्रीय जलवायु सुदृढ़ता कार्य योजना का अनावरण किया
2026-06-26
पृष्ठभूमि: भारत गंभीर जलवायु परिवर्तन प्रभावों का सामना कर रहा है, जिसके लिए अनुकूलन और शमन हेतु एक एकीकृत राष्ट्रीय रणनीति आवश्यक है। पूर्व के खंडित प्रयासों ने दीर्घकालिक सुदृढ़ता निर्माण को सीमित किया था। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने राष्ट्रीय जलवायु सुदृढ़ता कार्य योजना (NCRAP) 2026-2030 का शुभारंभ किया। यह जल सुरक्षा, जलवायु-स्मार्ट कृषि, तटीय संरक्षण और आपदा जोखिम न्यूनीकरण को प्राथमिकता देती है, हरित प्रौद्योगिकी निवेश से समर्थित है। प्रभाव: NCRAP का लक्ष्य भारत की अनुकूलन क्षमता बढ़ाना, जलवायु कमजोरियों को कम करना और सतत विकास को बढ़ावा देना है। यह अंतर-मंत्रालयी समन्वय को बढ़ावा देगा, राष्ट्रीय प्रयासों को वैश्विक जलवायु लक्ष्यों से संरेखित करेगा।
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