Current Affairs & MCQs
Latest Questions, Daily Updates & More

भारत की जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आक्रामक प्रजातियों का खतरा

भारत की जैव विविधता के लिए आक्रामक विदेशी प्रजातियों का बढ़ता खतरा
2026-05-04
पृष्ठभूमि: आक्रामक विदेशी प्रजातियां (IAS) गैर-देशी जीव हैं जो नए वातावरण में स्थापित हो जाती हैं, अक्सर देशी प्रजातियों को पछाड़ देती हैं और पारिस्थितिक तंत्र को बाधित करती हैं। भारत, अपने विविध आवासों के साथ, विशेष रूप से संवेदनशील है। वर्तमान संदर्भ: हालिया अध्ययनों और रिपोर्टों में स्थलीय, मीठे पानी और समुद्री वातावरण सहित विभिन्न भारतीय पारिस्थितिक तंत्रों में IAS की उपस्थिति और प्रभाव में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। पार्थेनियम खरपतवार, जलकुंभी और कुछ कीटों जैसी प्रजातियां महत्वपूर्ण पारिस्थितिक और आर्थिक क्षति पहुंचा रही हैं। प्रभाव: ये आक्रमण जैव विविधता के नुकसान का कारण बनते हैं, आवास संरचना को बदलते हैं, कृषि उत्पादकता को प्रभावित करते हैं, और मानव स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकते हैं। इन खतरों को कम करने और भारत की प्राकृतिक विरासत की रक्षा के लिए प्रभावी निगरानी, शीघ्र पता लगाने और एकीकृत प्रबंधन रणनीतियाँ महत्वपूर्ण हैं।
राष्ट्रीय उद्यान वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को बढ़ाते हैं
2026-05-03
पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय उद्यान महत्वपूर्ण पारिस्थितिक, वनस्पतिक और जीव-जंतु महत्व के नामित क्षेत्र हैं, जिन्हें प्राकृतिक परिदृश्यों और वन्यजीवों की रक्षा के लिए स्थापित किया गया है। वर्तमान संदर्भ: भारत सरकार, विभिन्न पहलों के माध्यम से, अपने राष्ट्रीय उद्यानों के प्रबंधन और सुरक्षा को मजबूत करना जारी रखे हुए है। हालिया प्रयासों में गश्त बढ़ाना, आवास बहाली परियोजनाएं और संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी पर ध्यान केंद्रित किया गया है। निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप और ड्रोन जैसी तकनीक का तेजी से उपयोग किया जा रहा है। प्रभाव: ये उन्नत संरक्षण उपाय महत्वपूर्ण आवासों को संरक्षित करने, लुप्तप्राय प्रजातियों के अस्तित्व को सुनिश्चित करने, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और इको-पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद करते हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और संरक्षण के वित्तपोषण में योगदान देता है।
जलवायु परिवर्तन जैव विविधता हॉटस्पॉट के लिए खतरा
2026-05-03
पृष्ठभूमि: जैव विविधता हॉटस्पॉट स्थानिक प्रजातियों की असाधारण रूप से उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र हैं जो मानव गतिविधियों से भी महत्वपूर्ण खतरे में हैं। ये क्षेत्र वैश्विक पारिस्थितिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान संदर्भ: हालिया वैज्ञानिक रिपोर्टों से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते वैश्विक तापमान और परिवर्तित मौसम के पैटर्न इन संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं। प्रजातियां अनुकूलन के लिए संघर्ष कर रही हैं, जिससे आवास का नुकसान और संभावित विलुप्त होने का खतरा बढ़ रहा है। इन नई चुनौतियों से निपटने के लिए संरक्षण रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है। प्रभाव: जैव विविधता हॉटस्पॉट का क्षरण वैश्विक पारिस्थितिक तंत्र पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा, जल संसाधन और जलवायु के प्राकृतिक विनियमन पर असर पड़ सकता है। इन महत्वपूर्ण प्राकृतिक संपत्तियों की रक्षा के लिए तत्काल संरक्षण कार्यों की आवश्यकता है।
एकल-उपयोग प्लास्टिक के खिलाफ वैश्विक प्रयास तेज
2026-05-03
पृष्ठभूमि: एकल-उपयोग प्लास्टिक, जैसे स्ट्रॉ, बैग और पैकेजिंग, वैश्विक प्रदूषण में एक प्रमुख योगदानकर्ता हैं, विशेष रूप से समुद्री वातावरण में। पर्यावरण में उनका बने रहना व्यापक पारिस्थितिक क्षति का कारण बनता है। वर्तमान संदर्भ: अंतर्राष्ट्रीय निकाय और कई राष्ट्र विशिष्ट एकल-उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं पर नियमों और प्रतिबंधों को मजबूत कर रहे हैं। प्लास्टिक के पूर्ण जीवन चक्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए, प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी वैश्विक संधि पर चर्चा चल रही है। जागरूकता अभियान भी सार्वजनिक जुड़ाव बढ़ा रहे हैं। प्रभाव: इन उपायों का उद्देश्य महासागरों और लैंडफिल में प्रवेश करने वाले प्लास्टिक कचरे को काफी कम करना, जानवरों को निगलने और उलझने से बचाना और एक चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देते हुए टिकाऊ विकल्पों को अपनाना है।
वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ाने के लिए 'प्रोजेक्ट ग्रीन कॉरिडोर' लॉन्च किया गया
2026-05-02
पृष्ठभूमि: सड़कों और रेलवे जैसे बढ़ते बुनियादी ढाँचे के कारण आवास विखंडन वन्यजीवों के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा पैदा करता है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष और आनुवंशिक अलगाव बढ़ता है। संरक्षित क्षेत्रों के बीच पारिस्थितिक संपर्क बनाए रखने के लिए वन्यजीव गलियारे महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान संदर्भ: राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NWB) और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने संयुक्त रूप से 'प्रोजेक्ट ग्रीन कॉरिडोर 2026' लॉन्च किया है। इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य कई राज्यों में महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारों को स्थापित और बहाल करना है, विशेष रूप से उच्च जैव विविधता और चल रहे बुनियादी ढाँचे के विकास वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना। यह परियोजना सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए इको-ब्रिज, अंडरपास और व्यापक आवास बहाली तकनीकों को तैनात करेगी। प्रभाव: यह परियोजना प्रवासी और निवासी वन्यजीव प्रजातियों के लिए सुरक्षित मार्ग को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगी, सड़क दुर्घटनाओं को नाटकीय रूप से कम करेगी और अलग-थलग पशु आबादी के बीच आनुवंशिक आदान-प्रदान में सुधार करेगी। यह संरक्षण निकायों और बुनियादी ढाँचे के डेवलपर्स के बीच एक ऐतिहासिक सहयोग का प्रतिनिधित्व करता है, जो बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं में पारिस्थितिक विचारों को एकीकृत करने और दीर्घकालिक वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करता है।
वैश्विक रिपोर्ट में महासागर अम्लीकरण के बढ़ते प्रभावों पर प्रकाश डाला गया
2026-05-02
पृष्ठभूमि: महासागर अम्लीकरण, मुख्य रूप से अतिरिक्त वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण के कारण होता है, एक गंभीर पर्यावरणीय खतरा है। यह प्रक्रिया समुद्री जल के पीएच को कम करती है, जिससे प्रवाल, शंख और प्लवक जैसे कैल्सीफाइंग समुद्री जीव गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं, जो समुद्री खाद्य श्रृंखलाओं का आधार बनते हैं। वर्तमान संदर्भ: यूनेस्को के अंतरसरकारी समुद्र विज्ञान आयोग (IOC) सहित प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक संगठनों के एक संघ ने एक व्यापक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में महासागर अम्लीकरण की बढ़ती दरों और वैश्विक समुद्री जैव विविधता पर इसके देखे गए हानिकारक प्रभावों का विवरण दिया गया है, जिसमें बताया गया है कि विभिन्न महासागर बेसिनों में महत्वपूर्ण सीमाएँ पार की जा रही हैं, जिससे समुद्री जीवन और निर्भर उद्योग खतरे में पड़ रहे हैं। प्रभाव: निष्कर्ष वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी और उन्नत समुद्री संरक्षण रणनीतियों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। इससे समुद्र विज्ञान अनुसंधान के लिए बढ़ी हुई फंडिंग, लचीली जलीय कृषि प्रथाओं के विकास को बढ़ावा देने और स्वस्थ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों पर निर्भर कमजोर समुद्री प्रजातियों और आजीविका की रक्षा के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को मजबूत करने की उम्मीद है।
भारत ने महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति 2026 का अनावरण किया
2026-05-02
पृष्ठभूमि: भारत, एक महा-विविध राष्ट्र, CBD जैसे सम्मेलनों का पालन करते हुए, वैश्विक जैव विविधता संरक्षण प्रयासों में लगातार भाग लेता रहा है। पिछली राष्ट्रीय रणनीतियों ने अपनी समृद्ध प्राकृतिक विरासत की रक्षा के लिए आधारभूत कार्य किया था। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने भारत की राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) 2026 का अनावरण किया है। यह व्यापक योजना कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क के अनुरूप है, जो अगले दशक में प्रजातियों के संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र बहाली और सतत संसाधन प्रबंधन के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करती है, जिसमें सामुदायिक भागीदारी और हरित वित्तपोषण पर जोर दिया गया है। प्रभाव: यह रणनीति जैव विविधता के नुकसान को रोकने, महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को बढ़ाने और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह राज्य-स्तरीय संरक्षण पहलों का मार्गदर्शन करेगी, वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देगी और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी को आकर्षित करेगी, जिससे पर्यावरणीय प्रबंधन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता मजबूत होगी और इसके विविध पारिस्थितिकी तंत्रों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
एकल-उपयोग प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने की पहल
2026-05-01
पृष्ठभूमि: भारत प्लास्टिक प्रदूषण, विशेष रूप से एकल-उपयोग प्लास्टिक (SUPs) के उपयोग को कम करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है, जो पर्यावरण और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा पैदा करते हैं। वर्तमान संदर्भ: सरकार ने कुछ SUP वस्तुओं पर प्रतिबंध लागू किए हैं और विकल्पों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। प्लास्टिक के हानिकारक प्रभावों के बारे में नागरिकों को शिक्षित करने और जिम्मेदार निपटान और रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। प्रभाव: इन उपायों से लैंडफिल और जल निकायों में प्रवेश करने वाले प्लास्टिक कचरे की मात्रा में काफी कमी आने की उम्मीद है, जिससे वन्यजीवों की रक्षा होगी, मिट्टी और पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा, और एक स्वच्छ पर्यावरण में योगदान मिलेगा।
राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना प्रजातियों की रिकवरी पर केंद्रित
2026-05-01
पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना (NWAP) भारत की समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण के लिए एक व्यापक रणनीति है। यह आवास संरक्षण, प्रजाति प्रबंधन और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उपायों की रूपरेखा तैयार करती है। वर्तमान संदर्भ: NWAP के नवीनतम संस्करण में बाघों, हाथियों और गैंडों सहित गंभीर रूप से लुप्तप्राय जानवरों के लिए प्रजाति रिकवरी कार्यक्रमों पर जोर दिया गया है। यह संरक्षित क्षेत्रों के प्रबंधन को मजबूत करने और संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों को शामिल करने पर भी केंद्रित है। प्रभाव: इस नवीनीकृत फोकस का उद्देश्य संकटग्रस्त प्रजातियों की आबादी की स्थिति में काफी सुधार करना, उनके आवासों का संरक्षण करना और भारत के प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र के दीर्घकालिक पारिस्थितिक संतुलन को सुनिश्चित करना है।
2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लिए भारत का जोर
2026-05-01
पृष्ठभूमि: भारत ने COP26 शिखर सम्मेलन में 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने का संकल्प लिया है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य के लिए देश के ऊर्जा क्षेत्र और औद्योगिक प्रथाओं में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन की आवश्यकता है। वर्तमान संदर्भ: सरकार सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है, साथ ही भविष्य के ईंधन के रूप में हरित हाइड्रोजन की खोज भी कर रही है। उद्योगों को स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को अपनाने और ऊर्जा दक्षता में सुधार के लिए प्रोत्साहित करने हेतु नीतियां तैयार की जा रही हैं। प्रभाव: यह परिवर्तन जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है। यह हरित क्षेत्रों में तकनीकी नवाचार और रोजगार सृजन के अवसर भी प्रस्तुत करता है।
Home Exams Jobs Current Affairs Mock Tests