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पर्यावरण और पारिस्थितिकी समाचार: वन्यजीव, जैव विविधता, जलवायु

जलवायु परिवर्तन से भारत के तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ा हुआ खतरा
2026-05-20
पृष्ठभूमि: भारत के विस्तृत तटरेखा में मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियाँ और समुद्री घास के बिस्तर जैसे विविध पारिस्थितिकी तंत्र हैं, जो समुद्री जीवन और तटीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान संदर्भ: एक हालिया वैज्ञानिक मूल्यांकन इस बात पर प्रकाश डालता है कि समुद्र के बढ़ते स्तर, चक्रवात जैसी चरम मौसम की घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति और महासागर का अम्लीकरण, जो सभी जलवायु परिवर्तन से जुड़े हैं, इन नाजुक तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। प्रभाव: इन पारिस्थितिकी तंत्रों के क्षरण से जैव विविधता का नुकसान होता है, मछली स्टॉक कम होते हैं जिससे आजीविका प्रभावित होती है, और तटीय समुदायों की प्राकृतिक आपदाओं के प्रति भेद्यता बढ़ जाती है। इन महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए तत्काल अनुकूलन और शमन उपायों की आवश्यकता है।
गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा के लिए नए राष्ट्रीय उद्यान का नामांकन
2026-05-20
पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय उद्यानों का नामांकन जैव विविधता हॉटस्पॉट और स्थानिक प्रजातियों की रक्षा के लिए एक प्रमुख रणनीति है। भारत अपनी समृद्ध प्राकृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए 100 से अधिक राष्ट्रीय उद्यानों का एक नेटवर्क रखता है। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने विशेष रूप से इस क्षेत्र में पाई जाने वाली एक गंभीर रूप से लुप्तप्राय पक्षी प्रजाति के आवास की रक्षा के लिए एक नए क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया है। इस कदम का उद्देश्य आवास क्षरण और अवैध शिकार को रोकना है। प्रभाव: इस नए राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करेगी, जिससे इसके विलुप्त होने से बचा जा सकेगा। यह स्थानीय जैव विविधता को भी बढ़ाएगा, पारिस्थितिक अनुसंधान के लिए अवसर पैदा करेगा, और आसपास के क्षेत्रों में इको-टूरिज्म को बढ़ावा दे सकता है।
हालिया जनगणना में बाघों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई
2026-05-20
पृष्ठभूमि: भारत विलुप्तप्राय प्रजातियों की आबादी की निगरानी के लिए समय-समय पर बाघों की गणना करता रहा है। 1973 में शुरू की गई परियोजना टाइगर पहल, संरक्षण प्रयासों में महत्वपूर्ण रही है। वर्तमान संदर्भ: नवीनतम अखिल भारतीय बाघ अनुमान रिपोर्ट विभिन्न बाघ अभयारण्यों और वन क्षेत्रों में बाघों की आबादी में एक महत्वपूर्ण वृद्धि का संकेत देती है। इस वृद्धि का श्रेय बेहतर संरक्षण उपायों, बढ़ी हुई गश्त और सामुदायिक भागीदारी को दिया जाता है। प्रभाव: बाघों की संख्या में वृद्धि सफल संरक्षण रणनीतियों का प्रतीक है, जो वन पारिस्थितिकी तंत्र के समग्र स्वास्थ्य में योगदान करती है। यह इन क्षेत्रों में इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देता है और वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
आर्द्रभूमि बहाली के लिए राष्ट्रीय पहल शुरू
2026-05-19
पृष्ठभूमि: आर्द्रभूमि महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र हैं जो प्राकृतिक जल फिल्टर और कार्बन सिंक के रूप में कार्य करते हैं। भारत में कई रामसर स्थल हैं जिन्हें तत्काल बहाली की आवश्यकता है। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 19 मई 2026 को 'आर्द्रभूमि बहाली कार्यक्रम' का एक नया चरण शुरू किया। यह पहल आक्रामक प्रजातियों को हटाने और शहरी आर्द्रभूमि में पानी की गुणवत्ता में सुधार करने पर केंद्रित है। प्रभाव: इस कार्यक्रम का उद्देश्य शहरों की बाढ़-शमन क्षमता को बढ़ाना और प्रवासी पक्षियों के आवासों को बहाल करना है, जो भारत के जलवायु अनुकूलन लक्ष्यों में योगदान देगा।
पश्चिमी घाट में नए जैव विविधता विरासत स्थल की घोषणा
2026-05-19
पृष्ठभूमि: जैविक विविधता अधिनियम, 2002 राज्य सरकारों को जैव विविधता के महत्व वाले क्षेत्रों को जैव विविधता विरासत स्थल (BHS) के रूप में अधिसूचित करने का अधिकार देता है। वर्तमान संदर्भ: 18 मई 2026 को, राज्य सरकार ने स्थानिक वनस्पतियों और जीवों की रक्षा के लिए पश्चिमी घाट में एक अद्वितीय गलियारे को आधिकारिक तौर पर BHS घोषित किया। यह क्षेत्र दुर्लभ औषधीय पौधों और लुप्तप्राय उभयचर प्रजातियों के लिए जाना जाता है। प्रभाव: यह दर्जा औद्योगिक अतिक्रमण के खिलाफ कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करता है और समुदाय-आधारित संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देता है।
आर्द्रभूमि संरक्षण और रामसर स्थलों के लिए पहल
2026-05-18
पृष्ठभूमि: आर्द्रभूमियाँ महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र हैं जो जल शोधन, बाढ़ नियंत्रण और समृद्ध जैव विविधता का समर्थन करने सहित कई पारिस्थितिक और आर्थिक लाभ प्रदान करती हैं। भारत में आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र की एक महत्वपूर्ण संख्या है। वर्तमान संदर्भ: भारत रामसर स्थलों की बढ़ती संख्या से स्पष्ट रूप से आर्द्रभूमियों के संरक्षण के वैश्विक प्रयासों में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। सरकार राष्ट्रीय आर्द्रभूमि संरक्षण कार्यक्रम (NWCP) को लागू कर रही है और सामुदायिक-आधारित संरक्षण दृष्टिकोणों को बढ़ावा दे रही है। प्रभाव: इन संरक्षण प्रयासों का उद्देश्य आर्द्रभूमियों के पारिस्थितिक चरित्र की रक्षा और पुनर्स्थापना करना, उनकी जैव विविधता को बढ़ाना और स्थानीय समुदायों और पर्यावरण के लाभ के लिए आर्द्रभूमि संसाधनों के सतत उपयोग को सुनिश्चित करना है।
जैव विविधता संरक्षण के लिए संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार
2026-05-18
पृष्ठभूमि: भारत वनस्पतियों और जीवों की समृद्ध विविधता वाला एक मेगाविविध देश है। पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए इन प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना महत्वपूर्ण है। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों और संरक्षण भंडारों सहित संरक्षित क्षेत्रों के नेटवर्क का विस्तार करने पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। हालिया प्रस्तावों और घोषणाओं में महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारों और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। प्रभाव: संरक्षित क्षेत्रों के विस्तार से लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आश्रय मिलेगा, आवास विखंडन को रोका जा सकेगा, और भारत की अनूठी जैव विविधता के दीर्घकालिक संरक्षण में योगदान मिलेगा, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का समर्थन होगा।
जलवायु लचीलापन और अनुकूलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता
2026-05-18
पृष्ठभूमि: भारत ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए जलवायु लचीलापन और अनुकूलन उपायों की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया है। देश चरम मौसम की घटनाओं और बढ़ते समुद्र स्तर के प्रति संवेदनशील है। वर्तमान संदर्भ: हालिया रिपोर्टें कृषि, जल प्रबंधन और तटीय सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में अनुकूलन रणनीतियों को विकसित करने और लागू करने में भारत के चल रहे प्रयासों पर प्रकाश डालती हैं। जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) और इसके संबद्ध मिशन इन पहलों का मार्गदर्शन करना जारी रखते हैं। प्रभाव: इन प्रयासों का उद्देश्य भारतीय समुदायों और पारिस्थितिक तंत्र की जलवायु परिवर्तन के प्रति भेद्यता को कम करना, अनुकूलन क्षमता को बढ़ाना और सतत विकास पथों को बढ़ावा देना है जो जलवायु झटकों के प्रति लचीले हैं।
सुंदरबन में बढ़ते समुद्र के स्तर पर शोध
2026-05-17
पृष्ठभूमि: यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, सुंदरबन, जलवायु-जनित समुद्र के स्तर में वृद्धि के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। वर्तमान संदर्भ: राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान द्वारा 17 मई 2026 को प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि पिछले एक दशक में सुंदरबन में समुद्र के स्तर में वृद्धि की दर 15% तेज हो गई है। अध्ययन खारे पानी के प्रवेश के कारण मैंग्रोव कवर के नुकसान पर जोर देता है। प्रभाव: यह रॉयल बंगाल टाइगर सहित क्षेत्र की अद्वितीय जैव विविधता के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करता है और आवास के नुकसान को कम करने के लिए तत्काल तटीय प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता है।
वन्यजीवों के लिए ग्रीन कॉरिडोर पहल का शुभारंभ
2026-05-17
पृष्ठभूमि: बुनियादी ढांचे के विकास के कारण आवास विखंडन ने ऐतिहासिक रूप से वन्यजीवों की आवाजाही को खतरे में डाल दिया है। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 16 मई 2026 को राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रवासी प्रजातियों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने हेतु 'ग्रीन कॉरिडोर पहल' शुरू की है। यह परियोजना महत्वपूर्ण क्षेत्रों में वन्यजीव ओवरपास और अंडरपास को एकीकृत करती है। प्रभाव: इस पहल से मानव-पशु संघर्ष और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है, जिससे अलग-थलग पड़ी वन्यजीव आबादी के बीच आनुवंशिक संपर्क सुनिश्चित होगा।
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