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पर्यावरण और पारिस्थितिकी करेंट अफेयर्स: गर्मी की लहरें, आर्द्रभूमि संरक्षण

भारत में भीषण गर्मी की चेतावनी जारी, जलवायु अनुकूलन उपायों पर जोर
2026-05-25
पृष्ठभूमि: भारत में मई के महीने में अक्सर तीव्र गर्मी की लहरें आती हैं, जो जलवायु परिवर्तन से और भी गंभीर हो जाती हैं, जिससे स्वास्थ्य संकट और कृषि नुकसान होता है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कई उत्तरी और मध्य राज्यों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जिसमें 48°C से अधिक तापमान का अनुमान है। राज्य सरकारें सार्वजनिक शीतलन केंद्रों और जल वितरण सहित आपातकालीन प्रतिक्रिया योजनाओं को सक्रिय कर रही हैं। प्रभाव: यह बार-बार आने वाला संकट मानव और आर्थिक लागतों को कम करने के लिए मजबूत जलवायु अनुकूलन रणनीतियों, जिसमें प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, सतत शहरी नियोजन और सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा शामिल है, की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
बुनियादी ढांचे के लिए राष्ट्रीय जलवायु लचीलापन ढांचा
2026-05-24
पृष्ठभूमि: चरम मौसम की घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति ने राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे को जलवायु-प्रूफ बनाने की आवश्यकता पैदा कर दी है। वर्तमान संदर्भ: सरकार ने मई 2026 में राजमार्गों और शहरी जल निकासी प्रणालियों सहित सभी प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में जलवायु लचीलापन को एकीकृत करने के लिए एक नया ढांचा शुरू किया है। यह नीति सभी नए सार्वजनिक कार्यों के लिए जलवायु जोखिम मूल्यांकन को अनिवार्य बनाती है। प्रभाव: यह पहल जलवायु-जनित आपदाओं के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करेगी, सार्वजनिक संपत्तियों की स्थायित्व में सुधार करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि भारत का बुनियादी ढांचा विकास जलवायु पैटर्न के सामने टिकाऊ बना रहे।
भारत में संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क का विस्तार
2026-05-24
पृष्ठभूमि: भारत लुप्तप्राय प्रजातियों और आवासों की सुरक्षा के लिए अपने संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क का लगातार विस्तार कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 तक, पर्यावरण मंत्रालय ने पारिस्थितिक कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए पश्चिमी घाट में तीन नए वन्यजीव अभयारण्यों को अधिसूचित किया है। इस कदम का उद्देश्य स्थानिक वनस्पतियों और जीवों को आवास विखंडन से बचाना है। प्रभाव: यह विस्तार जैव विविधता हॉटस्पॉट के संरक्षण को बढ़ावा देगा, जिससे नीलगिरी तहर और विभिन्न स्थानिक उभयचरों जैसी प्रजातियों के दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित किया जा सकेगा, साथ ही क्षेत्र में सतत इको-पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
भारत में आर्द्रभूमियों के सतत प्रबंधन के लिए पहल
2026-05-23
पृष्ठभूमि: आर्द्रभूमियाँ महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र हैं जो महत्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान करती हैं, लेकिन वे मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन से बढ़ते खतरे में हैं। भारत आर्द्रभूमियों पर रामसर कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्ता है। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राज्य सरकारों के साथ मिलकर, भारत की आर्द्रभूमियों के सतत प्रबंधन को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है। हाल की पहलों में एकीकृत प्रबंधन योजनाओं का विकास, स्थानीय समुदायों को शामिल करना और निगरानी और संरक्षण के लिए वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग करना शामिल है। प्रभाव: ये प्रयास आर्द्रभूमियों की अनूठी जैव विविधता के संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन सुनिश्चित करने, बाढ़ और सूखे को कम करने और इन पारिस्थितिक तंत्रों पर निर्भर समुदायों की आजीविका का समर्थन करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह रामसर कन्वेंशन के तहत भारत के अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों के साथ भी संरेखित है।
पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का ध्यान
2026-05-23
पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) जैविक विविधता पर कन्वेंशन के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं को लागू करने के लिए 2002 के जैविक विविधता अधिनियम के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है। वर्तमान संदर्भ: एनबीए ने हाल ही में भारत में विभिन्न निम्नीकृत परिदृश्यों में पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली की दिशा में अपने प्रयासों को तेज किया है। इसमें सामुदायिक भागीदारी, वैज्ञानिक हस्तक्षेप और पारिस्थितिक कार्यों और जैव विविधता हॉटस्पॉट को पुनर्जीवित करने के लिए देशी प्रजातियों को बढ़ावा देना शामिल है। प्रभाव: पारिस्थितिकी तंत्र की सफल बहाली न केवल जैव विविधता और पारिस्थितिक सेवाओं को बढ़ाएगी, बल्कि कार्बन पृथक्करण में भी योगदान देगी, जल सुरक्षा में सुधार करेगी, और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर पैदा करेगी, जिससे भारत के व्यापक पर्यावरणीय और विकासात्मक लक्ष्यों का समर्थन होगा।
जलवायु लचीलापन और अनुकूलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता
2026-05-23
पृष्ठभूमि: भारत ने पेरिस समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं के अनुरूप, जलवायु कार्रवाई और अनुकूलन की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया है। देश अपनी लंबी तटरेखा और कृषि पर निर्भरता के कारण महत्वपूर्ण कमजोरियों का सामना करता है। वर्तमान संदर्भ: हालिया रिपोर्टें विभिन्न राष्ट्रीय मिशनों और राज्य-स्तरीय कार्य योजनाओं के माध्यम से जलवायु लचीलापन बढ़ाने के भारत के चल रहे प्रयासों पर प्रकाश डालती हैं। इनमें नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना, जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों का विकास करना और चरम मौसम की घटनाओं के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना शामिल है। प्रभाव: इन पहलों का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को कम करना, कमजोर समुदायों की रक्षा करना और सतत विकास पथ सुनिश्चित करना है, जिससे भारत वैश्विक जलवायु अनुकूलन रणनीतियों में एक अग्रणी के रूप में स्थापित हो सके।
भारत के हरित हाइड्रोजन मिशन की प्रगति और इसके पर्यावरणीय लाभ
2026-05-22
पृष्ठभूमि: भारत ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की शुरुआत हरित हाइड्रोजन उत्पादन और उपयोग के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में खुद को स्थापित करने की दृष्टि से की थी। इस मिशन का लक्ष्य कार्बन उत्सर्जन को काफी कम करना और राष्ट्र की ऊर्जा स्वतंत्रता को बढ़ाना है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 में जारी एक व्यापक रिपोर्ट ने मिशन में महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला। इसमें कई बड़े पैमाने पर हरित हाइड्रोजन उत्पादन सुविधाओं के सफल चालू होने और उन्हें बिजली देने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के एकीकरण का विवरण दिया गया। प्रभाव: यह प्रगति भारत की जलवायु कार्रवाई प्रतिबद्धताओं के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे जीवाश्म ईंधन से दूर संक्रमण में तेजी आएगी। इससे कई हरित रोजगार सृजित होने, नवीकरणीय ऊर्जा में महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित होने और सतत ऊर्जा संक्रमण में भारत के नेतृत्व को मजबूत करने की उम्मीद है, जो वैश्विक डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों में योगदान देगा।
भारत की नई राष्ट्रीय जैव विविधता संरक्षण योजना 2026
2026-05-22
पृष्ठभूमि: भारत, एक महा-विविध राष्ट्र होने के नाते, आवास विनाश, जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण से अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए बढ़ते खतरों का सामना कर रहा है। इन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए मौजूदा संरक्षण रणनीतियों को व्यापक उन्नयन की आवश्यकता है। वर्तमान संदर्भ: 22 मई, 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने "राष्ट्रीय जैव विविधता संरक्षण योजना 2026-2030" का अनावरण किया। यह महत्वाकांक्षी योजना पारिस्थितिकी तंत्र बहाली, लक्षित प्रजाति संरक्षण और देश भर में सतत संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। प्रभाव: इस योजना का उद्देश्य भारत के प्रयासों को वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों, विशेष रूप से कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क के साथ संरेखित करना है। इससे भारत की पारिस्थितिकीय लचीलापन में उल्लेखनीय वृद्धि होने, हरित विकास को बढ़ावा मिलने और संरक्षण पहलों में सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
आर्द्रभूमि बहाली के लिए राष्ट्रीय रणनीति
2026-05-21
पृष्ठभूमि: आर्द्रभूमि जल शोधन और बाढ़ शमन के लिए महत्वपूर्ण हैं, फिर भी वे शहरीकरण के कारण गंभीर गिरावट का सामना कर रहे हैं। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मई 2026 में राष्ट्रीय आर्द्रभूमि बहाली कार्यक्रम का एक नया चरण शुरू किया है। यह चरण प्रकृति-आधारित समाधानों के माध्यम से शहरी आर्द्रभूमि के कायाकल्प पर केंद्रित है। प्रभाव: इन पारिस्थितिक बफ़र्स को बहाल करके, यह पहल शहरी जलवायु लचीलापन और भूजल पुनर्भरण को बढ़ाने का लक्ष्य रखती है। यह वैज्ञानिक निगरानी को स्थानीय सामुदायिक भागीदारी के साथ एकीकृत करती है, जिससे बढ़ते वैश्विक तापमान के बीच इन महत्वपूर्ण आवासों का दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुनिश्चित होता है।
नई जैव विविधता विरासत स्थल अधिसूचना
2026-05-21
पृष्ठभूमि: जैविक विविधता अधिनियम, 2002 राज्य सरकारों को जैव विविधता महत्व के क्षेत्रों को जैव विविधता विरासत स्थल (BHS) के रूप में अधिसूचित करने का अधिकार देता है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 में, सरकार ने दुर्लभ स्थानिक वनस्पतियों और जीवों की रक्षा के लिए एक नए क्षेत्र को BHS के रूप में नामित किया है। इसका उद्देश्य अद्वितीय पारिस्थितिक तंत्र को औद्योगिक अतिक्रमण से बचाना है। प्रभाव: यह अधिसूचना समुदाय-नेतृत्व वाले संरक्षण प्रयासों को सुनिश्चित करती है, जिससे स्थानीय निकायों को प्राकृतिक संसाधनों का स्थायी प्रबंधन करने का अधिकार मिलता है। यह 2030 तक 30% भूमि की रक्षा के लिए कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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