वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच RBI ने रेपो दर 6.5% पर बरकरार रखी
2026-05-01पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मुद्रास्फीति का प्रबंधन करने, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने और आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा करता है। इन समीक्षाओं में रेपो दर जैसी प्रमुख ब्याज दरों पर निर्णय शामिल होते हैं, जो अर्थव्यवस्था में उधार लेने की लागत को प्रभावित करते हैं।
वर्तमान संदर्भ: 1 मई, 2026 को अपनी नवीनतम समीक्षा में, RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने लगातार छठी बार रेपो दर को 6.5% पर बनाए रखने का निर्णय लिया। इसका कारण वैश्विक अनिश्चितताएँ और घरेलू मुद्रास्फीति को लक्षित दायरे में समेकित करने की आवश्यकता बताई गई। MPC ने 'समायोजन वापसी' के अपने रुख को भी दोहराया।
प्रभाव: यह निर्णय RBI के सतर्क दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो विकास की निगरानी करते हुए मुद्रास्फीति नियंत्रण को प्राथमिकता देता है। व्यवसायों को उच्च उधार लागत का सामना करना पड़ सकता है, जिससे निवेश निर्णयों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, यह वित्तीय बाजारों के लिए स्थिरता प्रदान करता है और मूल्य स्थिरता के प्रति केंद्रीय बैंक की प्रतिबद्धता के बारे में निवेशकों को आश्वस्त करता है।