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रक्षा और सुरक्षा करेंट अफेयर्स: भारत-जापान अभ्यास, DRDO रडार

संयुक्त सैन्य अभ्यास 'धर्म गार्जियन' राजस्थान में संपन्न
2026-05-21
पृष्ठभूमि: भारत नियमित रूप से मित्र देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास करता है ताकि आतंकवाद विरोधी और पारंपरिक युद्ध में अंतर-संचालनीयता और सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ाया जा सके। ये अभ्यास द्विपक्षीय रक्षा संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान संदर्भ: भारतीय सेना और जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास 'धर्म गार्जियन' का 8वां संस्करण राजस्थान में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अभ्यास में सामरिक अभ्यास, विशेष हेलीबोर्न संचालन और शहरी युद्ध परिदृश्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें दोनों पक्षों के महत्वपूर्ण दल शामिल थे। प्रभाव: यह अभ्यास भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देता है, जटिल परिचालन वातावरण में अधिक समझ और समन्वय को बढ़ावा देता है। यह क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और हिंद-प्रशांत में एक शुद्ध सुरक्षा प्रदाता के रूप में उसकी भूमिका को भी मजबूत करता है।
डीआरडीओ ने नई पीढ़ी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का प्रदर्शन किया
2026-05-20
पृष्ठभूमि: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) भारतीय सशस्त्र बलों के लिए उन्नत हथियार प्रणालियों के विकास पर लगातार काम कर रहा है। एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें (एटीजीएम) जमीनी बलों के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान संदर्भ: 19 मई, 2026 को, डीआरडीओ ने अपनी स्वदेशी एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम) की एक नई पीढ़ी का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया। मिसाइल में उन्नत सीकर तकनीक, बेहतर रेंज और आधुनिक बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ बढ़ी हुई भेदन क्षमताएं शामिल हैं। प्रभाव: यह विकास भारतीय सेना की एंटी-आर्मर क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से उन्नत करेगा, जिससे सैनिकों को दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद संरचनाओं को बेअसर करने के लिए एक अधिक शक्तिशाली हथियार मिलेगा।
भारतीय नौसेना ने बड़े समुद्री सुरक्षा अभ्यास का संचालन किया
2026-05-20
पृष्ठभूमि: समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना और उभरते खतरों के खिलाफ तत्परता बनाए रखना भारतीय नौसेना की एक प्रमुख प्राथमिकता है। परिचालन प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए नियमित अभ्यास किए जाते हैं। वर्तमान संदर्भ: 15-17 मई, 2026 के बीच, भारतीय नौसेना ने अरब सागर में एक बड़े पैमाने पर समुद्री सुरक्षा अभ्यास का संचालन किया। इस अभ्यास में समुद्री डकैती विरोधी, आतंकवाद विरोधी और आपदा राहत अभियानों पर ध्यान केंद्रित करते हुए कई अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों, पनडुब्बियों और नौसैनिक विमानों को शामिल किया गया। प्रभाव: इस अभ्यास ने विभिन्न नौसैनिक इकाइयों के बीच अंतरसंचालनीयता और समन्वय को बढ़ाया, जिससे क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा चुनौतियों की एक विस्तृत श्रृंखला का जवाब देने के लिए नौसेना की तत्परता में सुधार हुआ।
भारत ने अग्नि-V मिसाइल का सफल परीक्षण किया
2026-05-20
पृष्ठभूमि: भारत ने अपनी रणनीतिक निवारण क्षमता को बढ़ाने के लिए मिसाइल क्षमताओं का विकास किया है। अग्नि श्रृंखला की मिसाइलें भारत के परमाणु त्रय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वर्तमान संदर्भ: 18 मई, 2026 को, भारत ने एक मोबाइल लॉन्चर से अपनी अग्नि-V अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का एक विकासात्मक परीक्षण सफलतापूर्वक किया। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने और 5,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। प्रभाव: इस सफल परीक्षण से भारत की रणनीतिक रक्षा क्षमताओं में काफी वृद्धि हुई है, एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में उसकी स्थिति मजबूत हुई है और संभावित विरोधियों को रोकने की उसकी क्षमता बढ़ी है।
भारत ने अग्नि-V मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया
2026-05-19
पृष्ठभूमि: भारत अपनी रणनीतिक रक्षा सिद्धांत के हिस्से के रूप में लगातार अपनी मिसाइल क्षमताओं को बढ़ा रहा है। अग्नि श्रृंखला की मिसाइलें भारत के स्वदेशी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) कार्यक्रम का प्रतिनिधित्व करती हैं। वर्तमान संदर्भ: 16 मई, 2026 को, भारत ने ओडिशा के तट से अपनी अग्नि-V मिसाइल का एक विकासात्मक परीक्षण सफलतापूर्वक किया। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और इसकी रेंज 5,000 किलोमीटर से अधिक है, जो इसे भारत के परमाणु त्रय के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति बनाती है। प्रभाव: अग्नि-V के सफल परीक्षण से भारत की रणनीतिक निवारण मुद्रा काफी मजबूत होती है। यह रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित राष्ट्र की उन्नत मिसाइल तकनीक को प्रदर्शित करता है और सहयोगियों को आश्वस्त करता है तथा संभावित विरोधियों को रोकता है।
डीआरडीओ ने अग्नि-पी बैलिस्टिक मिसाइल के विकास को आगे बढ़ाया
2026-05-18
पृष्ठभूमि: अग्नि-पी (प्राइम) एक नई पीढ़ी की, कनस्तर-लॉन्च, परमाणु-सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल है जिसे पुरानी अग्नि-I और अग्नि-II श्रृंखला को बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया है। वर्तमान संदर्भ: डीआरडीओ ने मई 2026 के मध्य तक अग्नि-पी प्रणाली के लिए आधिकारिक तौर पर अंतिम विकास चरण में प्रवेश किया है। इसका ध्यान आधुनिक मिसाइल रक्षा ढालों को चकमा देने के लिए उन्नत मैन्युवरेबल रीएंट्री व्हीकल (MaRV) को एकीकृत करने पर है। प्रभाव: अग्नि-पी का समावेश रणनीतिक बल कमान को अधिक परिचालन लचीलापन और त्वरित तैनाती क्षमता प्रदान करेगा। यह एक महत्वपूर्ण निवारक के रूप में कार्य करता है।
भारतीय नौसेना ने उन्नत ब्रह्मोस का सफल परीक्षण किया
2026-05-18
पृष्ठभूमि: ब्रह्मोस भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया के बीच एक संयुक्त उद्यम है। यह मध्यम दूरी की रैमजेट सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। वर्तमान संदर्भ: 17 मई 2026 को, भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर में एक फ्रंटलाइन विध्वंसक से ब्रह्मोस मिसाइल के उन्नत संस्करण का सफल परीक्षण किया। इस संस्करण में बढ़ी हुई रेंज और स्वदेशी सीकर तकनीक शामिल है। प्रभाव: यह सफल परीक्षण भारत की समुद्री प्रहार क्षमताओं को काफी बढ़ाता है, जो दुश्मन की नौसैनिक संपत्तियों के खिलाफ बेहतर सटीकता सुनिश्चित करता है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करता है।
डीआरडीओ ने उन्नत पारंपरिक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल 'प्रलय-II' का सफल परीक्षण किया
2026-05-17
पृष्ठभूमि: भारत लगातार अपनी मिसाइल क्षमताओं को बढ़ाने पर काम कर रहा है, जिसमें रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) स्वदेशी विकास में सबसे आगे है। 'प्रलय' श्रृंखला सटीक हमलों के लिए डिज़ाइन की गई पारंपरिक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइलों की एक नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती है। वर्तमान संदर्भ: डीआरडीओ ने 16 मई, 2026 को ओडिशा तट से अब्दुल कलाम द्वीप से अपनी पारंपरिक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल के उन्नत संस्करण 'प्रलय-II' के सफल परीक्षण की घोषणा की। मिसाइल ने बढ़ी हुई रेंज और सटीक मारक क्षमता का प्रदर्शन किया, उच्च सटीकता के साथ सभी मिशन उद्देश्यों को पूरा किया। प्रभाव: यह सफल परीक्षण भारत की पारंपरिक प्रतिरोधक क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करता है और इसकी रणनीतिक रक्षा स्थिति को सुदृढ़ करता है। यह महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को रेखांकित करता है और सशस्त्र बलों को भविष्य की परिचालन आवश्यकताओं के लिए एक शक्तिशाली, उच्च-सटीक हथियार प्रणाली प्रदान करता है।
भारत-फ्रांस संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 'वरुण-26' संपन्न
2026-05-17
पृष्ठभूमि: भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग में एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी है। 'वरुण' जैसे संयुक्त नौसैनिक अभ्यास दोनों नौसेनाओं के बीच अंतरसंचालनीयता और समुद्री डोमेन जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। वर्तमान संदर्भ: द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'वरुण-26' का 26वां संस्करण 15 मई, 2026 को अरब सागर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इसमें दोनों देशों के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों, पनडुब्बियों और समुद्री गश्ती विमानों की भागीदारी के साथ उन्नत पनडुब्बी रोधी युद्ध अभ्यास, वायु रक्षा अभ्यास और सामरिक युद्धाभ्यास शामिल थे। प्रभाव: यह अभ्यास भारतीय और फ्रांसीसी नौसेनाओं के बीच परिचालन तत्परता और समन्वय को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। यह सहयोगी सुरक्षा ढाँचों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है और द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करता है।
डीआरडीओ ने उन्नत हाइपरसोनिक मिसाइल इंटरसेप्टर का सफल परीक्षण किया
2026-05-16
पृष्ठभूमि: भारत अपनी बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (बीएमडी) क्षमताओं को मजबूत करने पर लगातार काम कर रहा है, जिसका लक्ष्य विभिन्न हवाई खतरों के खिलाफ एक बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) इस स्वदेशी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्तमान संदर्भ: डीआरडीओ ने ओडिशा तट पर अब्दुल कलाम द्वीप से एक उन्नत हाइपरसोनिक मिसाइल इंटरसेप्टर का सफल परीक्षण-फायरिंग करने की घोषणा की। इंटरसेप्टर ने उच्च गति वाले लक्ष्यों को सटीकता से बेअसर करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया, जो मिसाइल रक्षा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि है। प्रभाव: यह सफल परीक्षण भारत की स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी में एक महत्वपूर्ण छलांग है, जो इसकी रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता और वायु रक्षा शक्ति को बढ़ाता है। यह महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों में भारत की आत्मनिर्भरता की स्थिति को मजबूत करता है, जिससे विदेशी आयात पर निर्भरता कम होती है और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होती है।
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