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बैंकिंग और वित्त समाचार: आरबीआई नीति, डिजिटल ऋण, हरित वित्त

आरबीआई की द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख दरें अपरिवर्तित
2026-06-07
पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) आर्थिक स्थितियों का आकलन करने और प्रमुख ब्याज दरों को निर्धारित करने के लिए द्विमासिक समीक्षा करती है, जिसका उद्देश्य मुद्रास्फीति नियंत्रण और विकास लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाना है। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 की अपनी समीक्षा में, आरबीआई ने स्थिर मुद्रास्फीति और मजबूत घरेलू आर्थिक विकास का हवाला देते हुए रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखा। एमपीसी ने मुद्रास्फीति को लक्ष्य के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए 'समायोजन की वापसी' के रुख पर जोर दिया। प्रभाव: यह निर्णय उधार देने और लेने की दरों में स्थिरता प्रदान करता है, जिससे व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए पूर्वानुमेयता मिलती है। यह संभावित मुद्रास्फीति दबावों के प्रति सतर्क रहते हुए अर्थव्यवस्था की दिशा में आरबीआई के विश्वास का संकेत देता है, जिससे निवेश और उपभोग को बढ़ावा मिलता है।
आरबीआई ने डिजिटल ऋण देने वाले प्लेटफॉर्म के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए
2026-06-06
पृष्ठभूमि: भारत में डिजिटल ऋण अनुप्रयोगों और प्लेटफॉर्मों के तेजी से प्रसार ने सुविधा प्रदान की है, लेकिन उपभोक्ता संरक्षण, डेटा गोपनीयता और शिकारी ऋण प्रथाओं के संबंध में चिंताएँ भी बढ़ाई हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) इस क्षेत्र की सक्रिय रूप से निगरानी कर रहा है, उधारकर्ताओं की सुरक्षा और निष्पक्ष बाजार आचरण सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत नियामक ढांचे की आवश्यकता को पहचान रहा है। वर्तमान संदर्भ: 5 जून, 2026 को, भारतीय रिज़र्व बैंक ने डिजिटल ऋण देने में लगे सभी विनियमित संस्थाओं, जिनमें बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (NBFCs) और उनके ऋण सेवा प्रदाता (LSPs) शामिल हैं, के लिए व्यापक नए दिशानिर्देश जारी किए। इन दिशानिर्देशों में ऋण शर्तों में बढ़ी हुई पारदर्शिता, सभी शुल्कों का स्पष्ट खुलासा और ऋण रद्द करने के लिए उधारकर्ताओं हेतु अनिवार्य कूलिंग-ऑफ अवधि शामिल है। प्रभाव: ये सख्त नियम उपभोक्ता संरक्षण को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएंगे, अनैतिक प्रथाओं पर अंकुश लगाएंगे और डिजिटल ऋण पारिस्थितिकी तंत्र में उत्पीड़न और धोखाधड़ी की घटनाओं को कम करेंगे। जबकि कुछ फिनटेक के लिए अनुपालन बोझ बढ़ सकता है, यह कदम एक अधिक भरोसेमंद और टिकाऊ वातावरण को बढ़ावा देगा, जिम्मेदार ऋण को बढ़ावा देगा और डिजिटल वित्तीय सेवाओं में जनता के विश्वास को बढ़ाएगा।
आरबीआई ने वैश्विक चुनौतियों और घरेलू विकास के बीच रेपो दर को अपरिवर्तित रखा
2026-06-06
पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने, आर्थिक विकास का समर्थन करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) के माध्यम से द्वि-मासिक मौद्रिक नीति समीक्षा करता है। ये समीक्षाएँ रेपो दर जैसे बेंचमार्क ब्याज दरों को निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो अर्थव्यवस्था में उधार लेने और देने की लागत को प्रभावित करती हैं। एमपीसी के निर्णय घरेलू और वैश्विक आर्थिक स्थितियों के गहन मूल्यांकन पर आधारित होते हैं। वर्तमान संदर्भ: 6 जून, 2026 को अपनी नवीनतम समीक्षा में, आरबीआई की एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो दर को लगातार छठी बार 6.5% पर बनाए रखने का फैसला किया। यह निर्णय लगातार वैश्विक मुद्रास्फीति दबावों और मजबूत, फिर भी असमान, घरेलू आर्थिक विकास के बीच आया है। एमपीसी ने विकास का समर्थन करते हुए मुद्रास्फीति को लक्ष्य के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए धीरे-धीरे आवास वापस लेने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया। प्रभाव: यह स्थिर नीतिगत रुख वित्तीय बाजारों और व्यवसायों के लिए पूर्वानुमेयता प्रदान करता है, जो मूल्य स्थिरता पर आरबीआई के निरंतर ध्यान का संकेत देता है। इससे उधार दरों में स्थिरता आने की उम्मीद है, जिससे उधारकर्ताओं को लाभ होगा और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यह निर्णय मुद्रास्फीति की उम्मीदों को स्थिर करने, सतत आर्थिक सुधार को बढ़ावा देने और एक स्थिर वित्तीय वातावरण सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखता है, जो दीर्घकालिक आर्थिक योजना और निवेशक विश्वास के लिए महत्वपूर्ण है।
व्यापारी लेनदेन के लिए डिजिटल रुपया (ई-रुपया) का विस्तार
2026-06-05
पृष्ठभूमि: आरबीआई ने भौतिक नकदी के सुरक्षित, डिजिटल विकल्प के रूप में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC), जिसे डिजिटल रुपया कहा जाता है, लॉन्च किया। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 तक, आरबीआई ने व्यापारियों द्वारा इसे अपनाने को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल रुपया और यूपीआई क्यूआर कोड के बीच नई इंटरऑपरेबिलिटी सुविधाएँ पेश की हैं। प्रभाव: यह एकीकरण छोटे व्यापारियों को जटिल बुनियादी ढांचे की आवश्यकता के बिना डिजिटल मुद्रा भुगतान स्वीकार करने की अनुमति देता है। इससे व्यवसायों के लिए नकदी प्रबंधन की लागत कम होने और देश भर में खुदरा भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की दक्षता बढ़ने की उम्मीद है।
आरबीआई ने जून 2026 की नीति समीक्षा में रेपो दर को 6.5% पर स्थिर रखा
2026-06-05
पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मुद्रास्फीति और तरलता को नियंत्रित करने के लिए रेपो दर का उपयोग एक प्राथमिक उपकरण के रूप में करता है। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में, आरबीआई ने रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। यह निर्णय मुद्रास्फीति को 4% के लक्ष्य के अनुरूप लाने के लिए केंद्रीय बैंक की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रभाव: यथास्थिति बनाए रखकर, आरबीआई का लक्ष्य टिकाऊ आर्थिक विकास का समर्थन करना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि मूल्य स्थिरता बनी रहे, जिससे बैंकिंग क्षेत्र और उधारकर्ताओं को स्थिरता मिले।
RBI ने प्रमुख नीतिगत दरों पर यथास्थिति बनाए रखी
2026-06-04
पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) मुद्रास्फीति को प्रबंधित करने और आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए प्रमुख ब्याज दरों की नियमित रूप से समीक्षा करती है। निर्णय मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतकों और मुद्रास्फीति लक्ष्यों पर आधारित होते हैं। वर्तमान संदर्भ: अपनी नवीनतम समीक्षा में, RBI की MPC ने रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। समिति ने विकास का समर्थन करते हुए मुद्रास्फीति को धीरे-धीरे लक्ष्य के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए 'वापसी की व्यवस्था' (withdrawal of accommodation) पर ध्यान केंद्रित रखने के लिए भी मतदान किया है। यह निर्णय वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच एक सतर्क दृष्टिकोण को दर्शाता है। प्रभाव: रेपो दर को अपरिवर्तित रखने से अल्पावधि में उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए उधार लेने की लागत स्थिर रहने की उम्मीद है। इस रुख का उद्देश्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की आवश्यकता को सतत आर्थिक विस्तार को बढ़ावा देने के उद्देश्य के साथ संतुलित करना है, जिससे निवेश और उपभोग के लिए एक अनुमानित वातावरण प्रदान किया जा सके।
RBI ने डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म के लिए विनियामक ढांचे को मजबूत किया
2026-06-04
पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने उधारकर्ताओं की सुरक्षा और निष्पक्ष प्रथाओं को सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल लेंडिंग की विनियामक निगरानी को लगातार मजबूत किया है। यह शिकारी ऋण और डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताओं के बाद आया है। वर्तमान संदर्भ: RBI ने डिजिटल लेंडिंग ऐप्स (DLAs) के लिए सख्त अनुपालन अनिवार्य करते हुए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनमें बढ़ी हुई ग्राहक पहचान (KYC) मानदंड, वार्षिक प्रतिशत दर (APR) का पारदर्शी प्रकटीकरण और स्पष्ट शिकायत निवारण तंत्र शामिल हैं। ऋणदाताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऋण-संबंधी सभी डेटा केवल भारत में संग्रहीत हों। प्रभाव: इन उपायों का उद्देश्य अवैध ऋण ऐप्स पर अंकुश लगाना, डेटा के दुरुपयोग को रोकना और अधिक जिम्मेदार डिजिटल लेंडिंग पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना है। उधारकर्ताओं को बढ़ी हुई पारदर्शिता और अनुचित शुल्कों और प्रथाओं के खिलाफ सुरक्षा से लाभ होगा, जिससे डिजिटल वित्तीय सेवाओं में अधिक विश्वास पैदा होगा।
डिजिटल रुपया (ई-रुपया) पायलट का विस्तार
2026-06-03
पृष्ठभूमि: आरबीआई ने भौतिक नकदी के पूरक के रूप में 2022 में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) पायलट लॉन्च किया था। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 में, आरबीआई ने लेनदेन की मात्रा बढ़ाने के लिए ई-रुपये को अधिक व्यापारी-केंद्रित भुगतान गेटवे के साथ एकीकृत करने की घोषणा की। अब ध्यान छोटे खुदरा विक्रेताओं द्वारा निर्बाध अपनाने के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के साथ इंटरऑपरेबिलिटी पर है। प्रभाव: इस विस्तार से बैंकिंग क्षेत्र के लिए नकदी प्रबंधन की लागत कम होने और भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की दक्षता बढ़ने की उम्मीद है, जिससे आम नागरिकों के लिए डिजिटल लेनदेन अधिक सुलभ हो जाएगा।
आरबीआई ने तरलता प्रबंधन ढांचे को मजबूत किया
2026-06-03
पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर अपने तरलता प्रबंधन ढांचे को समायोजित करता है। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 तक, आरबीआई ने प्रणालीगत तरलता का प्रबंधन करने के लिए परिष्कृत उपाय पेश किए हैं, जो मुद्रास्फीति नियंत्रण के साथ ऋण वृद्धि को संतुलित करने पर केंद्रित हैं। इन समायोजनों का उद्देश्य अंतर-बैंक कॉल मनी मार्केट में अत्यधिक अस्थिरता को रोकना है। प्रभाव: यह कदम सुनिश्चित करता है कि बैंक इष्टतम नकद भंडार बनाए रखें, जिससे ब्याज दरों में अचानक उछाल को रोका जा सके। यह ऋण देने के लिए एक स्थिर वातावरण प्रदान करता है।
आरबीआई ने एनबीएफसी के लिए बढ़ी हुई रिपोर्टिंग अनिवार्य की
2026-06-02
पृष्ठभूमि: गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) भारत की वित्तीय प्रणाली में ऋण और अन्य वित्तीय सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आरबीआई एनबीएफसी क्षेत्र की अपनी निगरानी को लगातार मजबूत कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय रिज़र्व बैंक ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं, जिसमें एनबीएफसी से अधिक विस्तृत और बार-बार वित्तीय रिपोर्ट जमा करने की आवश्यकता है। इन बढ़ी हुई रिपोर्टिंग आवश्यकताओं में संपत्ति की गुणवत्ता, तरलता की स्थिति और जोखिम प्रबंधन प्रथाओं पर विस्तृत डेटा शामिल है। इसका उद्देश्य पर्यवेक्षी प्रभावशीलता और संभावित तनाव का शीघ्र पता लगाना है। प्रभाव: यह कदम आरबीआई को एनबीएफसी के स्वास्थ्य और कामकाज में बेहतर अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा, जिससे अधिक सक्रिय नियामक हस्तक्षेप संभव हो सकेगा। यह एनबीएफसी को अपनी आंतरिक डेटा प्रबंधन और जोखिम मूल्यांकन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए भी प्रेरित करेगा, जिससे समग्र वित्तीय स्थिरता में योगदान मिलेगा।
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