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रक्षा और सुरक्षा करेंट अफेयर्स: 18 अगस्त 2026 के अपडेट

डीआरडीओ ने उन्नत हाइपरसोनिक मिसाइल इंटरसेप्टर का सफलतापूर्वक परीक्षण किया
2026-08-18
पृष्ठभूमि: भारत का रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) देश की रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास में सबसे आगे रहा है। उन्नत मिसाइल प्रणालियों से उभरते खतरों का मुकाबला करने के लिए हाइपरसोनिक मिसाइल इंटरसेप्टर का विकास महत्वपूर्ण है। वर्तमान संदर्भ: 18 अगस्त 2026 को, डीआरडीओ ने ओडिशा तट से अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी रूप से विकसित एक उन्नत हाइपरसोनिक मिसाइल इंटरसेप्टर के सफल परीक्षण-फायरिंग की घोषणा की। इंटरसेप्टर ने उच्च सटीकता के साथ एक नकली हाइपरसोनिक लक्ष्य को ट्रैक करने और बेअसर करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। प्रभाव: यह महत्वपूर्ण उपलब्धि भारत के बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा कार्यक्रम में एक बड़ी छलांग है, जो परिष्कृत हवाई खतरों से बचाव की उसकी क्षमता को बढ़ाती है। यह महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है और राष्ट्र को ऐसी उन्नत क्षमताओं वाले कुछ चुनिंदा देशों में स्थान देता है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान मिलता है। NEEDS_REVIEW
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने बाघों की आबादी की स्थिति की समीक्षा की
2026-08-18
पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है, जो भारत में बाघों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार है। भारत ने पिछले कुछ दशकों में बाघ संरक्षण में महत्वपूर्ण प्रगति की है। वर्तमान संदर्भ: 18 अगस्त, 2026 तक, NTCA ने विभिन्न बाघ अभयारण्यों में बाघों की आबादी के नवीनतम अनुमानों और आवास की स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई है। समीक्षा में चुनौतियों की पहचान करना, संरक्षण रणनीतियों की प्रभावशीलता का आकलन करना और भविष्य के हस्तक्षेपों की योजना बनाना शामिल है। प्रभाव: यह समीक्षा बाघों के दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह संसाधनों को प्रभावी ढंग से आवंटित करने, अवैध शिकार विरोधी उपायों को मजबूत करने और आवास प्रबंधन में सुधार करने में मदद करेगा, जिससे जैव विविधता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता में योगदान मिलेगा।
वनीकरण और पारिस्थितिकी तंत्र बहाली के लिए 'हरित भारत मिशन' के दूसरे चरण का शुभारंभ
2026-08-18
पृष्ठभूमि: हरित भारत मिशन (GIM) देश में वन और वृक्ष आवरण बढ़ाने और पारिस्थितिकी सेवाओं में सुधार के लिए शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन शमन और अनुकूलन में योगदान करना है। वर्तमान संदर्भ: 17 अगस्त, 2026 को, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने हरित भारत मिशन के दूसरे चरण की शुरुआत की घोषणा की। यह चरण देश भर के महत्वपूर्ण जैव विविधता हॉटस्पॉट में निम्नीकृत वन क्षेत्रों में वनीकरण प्रयासों का विस्तार करने और व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र बहाली परियोजनाओं को शुरू करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। प्रभाव: GIM के दूसरे चरण से भारत के वन आवरण में काफी वृद्धि होने, कार्बन पृथक्करण में सुधार होने और संवेदनशील क्षेत्रों में पारिस्थितिक संतुलन बहाल होने की उम्मीद है। यह स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा और स्थायी आजीविका को बढ़ावा देगा।
प्लास्टिक प्रदूषण से समुद्री जैव विविधता की सुरक्षा पर परामर्श जारी
2026-08-18
पृष्ठभूमि: प्लास्टिक प्रदूषण समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करता है, जो जानवरों द्वारा निगलने और उलझने से वन्यजीवों को प्रभावित करता है और आवासों को degrade करता है। भारत समुद्री प्रदूषण से निपटने के वैश्विक प्रयासों में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। वर्तमान संदर्भ: 16 अगस्त, 2026 को, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भारतीय तटरक्षक बल और समुद्री अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक व्यापक परामर्श जारी किया। परामर्श में समुद्री वातावरण में प्लास्टिक कचरे को प्रवेश करने से रोकने और मौजूदा प्रदूषण को साफ करने के लिए उन्नत उपायों की रूपरेखा तैयार की गई है। प्रभाव: इस सक्रिय परामर्श का उद्देश्य भारत की समृद्ध समुद्री जैव विविधता की रक्षा करना, समुद्री संसाधनों पर निर्भर तटीय अर्थव्यवस्थाओं की रक्षा करना और स्वच्छ महासागरों की दिशा में अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करना है। यह प्लास्टिक प्रतिबंधों के सख्त प्रवर्तन को प्रोत्साहित करता है और नवीन अपशिष्ट प्रबंधन समाधानों को बढ़ावा देता है।
राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2026 के लिए नामांकन खुले
2026-08-18
पृष्ठभूमि: मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार और अर्जुन पुरस्कार सहित राष्ट्रीय खेल पुरस्कार, खेल उत्कृष्टता के लिए भारत के सर्वोच्च सम्मान हैं। वे खेलों में उत्कृष्ट उपलब्धियों और योगदान को मान्यता देते हैं। वर्तमान संदर्भ: वर्ष 2026 के लिए इस पुरस्कार से संबंधित जानकारी वर्तमान में अनुपलब्ध है और सत्यापन की आवश्यकता है। 18 अगस्त, 2026 तक, इस श्रेणी के लिए नामांकन या प्राप्तकर्ताओं के बारे में विशिष्ट विवरण अभी तक आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं किए गए हैं। प्रभाव: संबंधित क्षेत्रों और व्यक्तियों पर इन संभावित पुरस्कारों के प्रभावों को समझने के लिए आगे के अपडेट का इंतजार है। इस सामग्री की समीक्षा की आवश्यकता है।
भारतीय वैज्ञानिक को ग्लोबल इनोवेशन अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया
2026-08-18
पृष्ठभूमि: ग्लोबल इनोवेशन अवार्ड विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में अभूतपूर्व योगदान देने वाले व्यक्तियों या टीमों को मान्यता देता है, जिनका वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण प्रभाव होता है। इसका उद्देश्य अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना है। वर्तमान संदर्भ: वर्ष 2026 के लिए इस पुरस्कार से संबंधित जानकारी वर्तमान में अनुपलब्ध है और सत्यापन की आवश्यकता है। 18 अगस्त, 2026 तक, इस श्रेणी के लिए नामांकन या प्राप्तकर्ताओं के बारे में विशिष्ट विवरण अभी तक आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं किए गए हैं। प्रभाव: संबंधित क्षेत्रों और व्यक्तियों पर इन संभावित पुरस्कारों के प्रभावों को समझने के लिए आगे के अपडेट का इंतजार है। इस सामग्री की समीक्षा की आवश्यकता है।
अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप का समापन
2026-08-18
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भारतीय तैराक ने राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा
2026-08-18
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'विरासत-ए-भारत' डिजिटल पुरालेख परियोजना का शुभारंभ
2026-08-18
पृष्ठभूमि: भारत के पास मौखिक परंपराओं और प्रदर्शन कलाओं सहित अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का एक विशाल भंडार है। वर्तमान संदर्भ: 17 अगस्त 2026 को, संस्कृति मंत्रालय ने इन परंपराओं को डिजिटल बनाने और संरक्षित करने के लिए 'विरासत-ए-भारत' परियोजना शुरू की। यह पहल क्षेत्रीय लोक संगीत और कहानी कहने की तकनीकों को सूचीबद्ध करने के लिए एआई-संचालित उपकरणों का उपयोग करती है। प्रभाव: यह परियोजना सुनिश्चित करती है कि लुप्तप्राय सांस्कृतिक प्रथाओं को भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रलेखित किया जाए। यह शोधकर्ताओं और छात्रों को एक केंद्रीकृत डेटाबेस प्रदान करती है, जिससे भारत के विविध सांस्कृतिक परिदृश्य की गहरी समझ विकसित होती है।
विदर्भ में नए महापाषाण दफन स्थलों की खोज
2026-08-18
पृष्ठभूमि: विदर्भ क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से अपनी महापाषाण संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण है, जो दफन के लिए उपयोग की जाने वाली बड़ी पत्थर की संरचनाओं द्वारा चिह्नित है। वर्तमान संदर्भ: अगस्त 2026 के मध्य में, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने विदर्भ क्षेत्र में कई नए महापाषाण दफन स्थलों की खोज की सूचना दी। इन स्थलों में लौह युग के लोहे के उपकरण, मिट्टी के बर्तन और कंकाल के अवशेष मिले हैं। प्रभाव: ये निष्कर्ष प्राचीन समुदायों की सामाजिक-आर्थिक संरचना और अंतिम संस्कार अनुष्ठानों में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। यह खोज इतिहासकारों को मध्य भारत में शुरुआती निवासियों के प्रवास पैटर्न और तकनीकी प्रगति को समझने में मदद करती है।
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