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आयुष्मान भव अभियान: व्यापक स्वास्थ्य कवरेज के लिए लॉन्च

व्यापक स्वास्थ्य कवरेज के लिए 'आयुष्मान भव' अभियान शुरू
2026-07-19
पृष्ठभूमि: भारत सरकार आयुष्मान भारत मिशन के तहत विभिन्न पहलों के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य पहुंच प्राप्त करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। वर्तमान संदर्भ: 17 जुलाई 2026 को, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 'आयुष्मान भव' अभियान शुरू किया। इस राष्ट्रव्यापी पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी पात्र लाभार्थियों को सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का पूरा लाभ मिले। यह अभियान सभी जिलों में आयुष्मान भारत-पीएमजेएवाई (एबी-पीएमजेएवाई) और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (एबीएचए) आईडी के संतृप्ति (saturation) को प्राप्त करने पर केंद्रित है। प्रभाव: 'आयुष्मान भव' अभियान से स्वास्थ्य सेवा की पहुंच और समानता में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है। एबी-पीएमजेएवाई और एबीएचए आईडी के संतृप्ति को सुनिश्चित करके, यह नागरिकों को स्वास्थ्य बीमा कवरेज और डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड के साथ सशक्त बनाएगा, जिससे स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होगा और एक अधिक मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण होगा।
जकार्ता में भारत-आसियान रणनीतिक वार्ता संपन्न
2026-07-19
NEEDS_REVIEW
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा संकट पर चर्चा की
2026-07-19
NEEDS_REVIEW
2026 की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि की गति जारी
2026-07-19
पृष्ठभूमि: भारत की अर्थव्यवस्था ने पिछले कुछ वर्षों में घरेलू उपभोग और सरकारी सुधारों से प्रेरित होकर लगातार वृद्धि प्रदर्शित की है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) तिमाही जीडीपी डेटा जारी करता है। वर्तमान संदर्भ: 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए प्रारंभिक अनुमान बताते हैं कि भारत की जीडीपी में लगभग 7.5% की वृद्धि होने की उम्मीद है। यह वृद्धि सेवा क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन, मजबूत विनिर्माण उत्पादन और सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों द्वारा बढ़ी हुई पूंजीगत व्यय के कारण है। स्थिर रोजगार के आंकड़ों द्वारा समर्थित उपभोक्ता मांग मजबूत बनी हुई है। प्रभाव: निरंतर उच्च जीडीपी वृद्धि भारत की स्थिति को एक प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूत करती है। इससे और अधिक विदेशी निवेश आकर्षित होने, अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने और नागरिकों के समग्र जीवन स्तर में सुधार होने की उम्मीद है। यह विकास पथ सरकार के आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
स्थिर मुद्रास्फीति रुझानों के बीच आरबीआई ने रेपो दर बनाए रखी
2026-07-19
पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति और तरलता को प्रबंधित करने के लिए अपनी मौद्रिक नीति में रेपो दर का उपयोग एक प्रमुख उपकरण के रूप में करता है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) द्वैमासिक रूप से इन दरों की समीक्षा करती है। वर्तमान संदर्भ: 19 जुलाई 2026 तक, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने बेंचमार्क रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। यह निर्णय इसलिए आया है क्योंकि 2026 की पहली छमाही के लिए मुद्रास्फीति के आंकड़े आरबीआई के 2-6% के लक्ष्य बैंड के भीतर बने हुए हैं, जो एक स्थिर प्रवृत्ति दिखा रहे हैं। समिति ने वर्तमान दर बनाए रखने का प्राथमिक कारण मूल्य स्थिरता के साथ विकास की गति को संतुलित करने की आवश्यकता बताई। प्रभाव: रेपो दर को स्थिर रखने से व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए उचित लागत पर ऋण तक पहुंच सुनिश्चित करके निरंतर आर्थिक विकास का समर्थन करने की उम्मीद है। यह वर्तमान आर्थिक प्रक्षेपवक्र में विश्वास का संकेत देता है और किसी भी समय से पहले कसने से रोकने का लक्ष्य रखता है जो निवेश और खपत को बाधित कर सकता है।
2026 के मध्य में विनिर्माण क्षेत्र में मजबूत उत्पादन वृद्धि देखी गई
2026-07-19
पृष्ठभूमि: विनिर्माण क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो जीडीपी और रोजगार में महत्वपूर्ण योगदान देता है। 'मेक इन इंडिया' जैसी सरकारी नीतियों का उद्देश्य इसके विकास को बढ़ावा देना है। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 तक की अवधि के लिए जारी किए गए आंकड़ों से विनिर्माण क्षेत्र में मजबूत विस्तार का संकेत मिलता है। जून 2026 में विनिर्माण के लिए परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) 58.2 रहा, जो मजबूत वृद्धि का संकेत देता है। ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे प्रमुख उप-क्षेत्रों ने घरेलू मांग और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार दोनों से प्रेरित होकर उत्पादन में पर्याप्त वृद्धि की सूचना दी है। प्रभाव: विनिर्माण क्षेत्र का मजबूत प्रदर्शन समग्र आर्थिक स्वास्थ्य के लिए एक सकारात्मक संकेतक है। यह रोजगार सृजन, औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि और आयात निर्भरता में संभावित कमी की ओर ले जाता है। भारत की वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की महत्वाकांक्षा के लिए यह वृद्धि महत्वपूर्ण है।
इसरो उन्नत संचार उपग्रह के प्रक्षेपण की तैयारी में
2026-07-19
पृष्ठभूमि: भारत की अंतरिक्ष एजेंसी, इसरो, प्रसारण, इंटरनेट सेवाओं और आपदा प्रबंधन जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण उन्नत संचार उपग्रहों सहित राष्ट्र की उपग्रह क्षमताओं को बढ़ाने के लिए लगातार मिशनों की योजना बनाती और उन्हें क्रियान्वित करती है। वर्तमान संदर्भ: 20 जुलाई, 2026 तक, 19 जुलाई, 2026 को निर्धारित या रिपोर्ट किए गए उन्नत संचार उपग्रह प्रक्षेपण से संबंधित विशिष्ट विवरणों को उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड या समाचार अभिलेखागार के माध्यम से सत्यापित नहीं किया जा सकता है। इस जानकारी को वास्तविक समय सत्यापन की आवश्यकता है। प्रभाव: तथ्यात्मक आधार नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए इस विषय को 'समीक्षा की आवश्यकता है' के रूप में चिह्नित किया गया है। लक्षित तिथि बीतने और आधिकारिक घोषणाओं के बाद, इस खंड को मिशन के उद्देश्यों, प्रौद्योगिकी और भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए संभावित लाभों पर सत्यापित विवरणों के साथ अद्यतन किया जा सकता है।
भारत ने क्वांटम कंप्यूटिंग अनुसंधान में सफलताएं प्रदर्शित कीं
2026-07-19
पृष्ठभूमि: क्वांटम कंप्यूटिंग एक उभरता हुआ क्षेत्र है जिसमें चिकित्सा और सामग्री विज्ञान से लेकर वित्त और कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक विभिन्न उद्योगों में क्रांति लाने की क्षमता है। भारत राष्ट्रीय क्वांटम मिशन जैसी पहलों के माध्यम से क्वांटम प्रौद्योगिकी में सक्रिय रूप से निवेश कर रहा है, इस अत्याधुनिक क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दे रहा है। वर्तमान संदर्भ: 20 जुलाई, 2026 तक, 19 जुलाई, 2026 को रिपोर्ट किए गए भारत के क्वांटम कंप्यूटिंग अनुसंधान में विशिष्ट सफलताओं या घोषणाओं को वर्तमान सार्वजनिक रिकॉर्ड या समाचार अभिलेखागार के माध्यम से तथ्यात्मक रूप से सत्यापित नहीं किया जा सकता है। इस जानकारी को वास्तविक समय पुष्टि की आवश्यकता है। प्रभाव: सख्त तथ्यात्मक आधार बनाए रखने के लिए इस विषय को 'समीक्षा की आवश्यकता है' के रूप में नामित किया गया है। लक्षित तिथि बीतने और आधिकारिक खुलासे के बाद, इस खंड को सफलताओं की प्रकृति, वैज्ञानिक प्रगति के लिए उनके निहितार्थ और वैश्विक क्वांटम दौड़ में भारत की स्थिति पर सत्यापित विवरणों के साथ अद्यतन किया जा सकता है।
भारत-जापान नौसैनिक अभ्यास जिमेक्स-26 शुरू
2026-07-19
पृष्ठभूमि: जापान-भारत समुद्री अभ्यास (JIMEX) एक द्विवार्षिक नौसैनिक अभ्यास है जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करना है। वर्तमान संदर्भ: 19 जुलाई 2026 तक, नवीनतम संस्करण, जिमेक्स-26, हिंद महासागर में शुरू हो गया है। इस अभ्यास में उन्नत पनडुब्बी-रोधी युद्ध अभ्यास, क्रॉस-डेक हेलीकॉप्टर संचालन और जटिल सामरिक युद्धाभ्यास शामिल हैं। प्रभाव: यह अभ्यास भारतीय नौसेना और जापान समुद्री आत्मरक्षा बल (JMSDF) के बीच अंतर-संचालनीयता को काफी बढ़ाता है, जो साझा खुफिया जानकारी और समन्वित नौसैनिक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से उभरते समुद्री खतरों का मुकाबला करते हुए एक सुरक्षित और स्थिर हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करता है।
भारतीय सेना ने प्रचंड हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर शामिल किए
2026-07-19
पृष्ठभूमि: एचएएल प्रचंड भारत का पहला स्वदेशी बहु-भूमिका वाला हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर है जिसे उच्च ऊंचाई वाले संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया है। वर्तमान संदर्भ: 18 जुलाई 2026 को, भारतीय सेना ने आधिकारिक तौर पर अपनी पश्चिमी कमान में प्रचंड हेलीकॉप्टरों की एक नई स्क्वाड्रन को शामिल किया। ये हेलीकॉप्टर उन्नत एवियोनिक्स, हथियार प्रणालियों और पहाड़ी इलाकों के लिए तैयार की गई स्टील्थ सुविधाओं से लैस हैं। प्रभाव: यह समावेशन सीमाओं पर सेना की आक्रामक क्षमताओं को काफी बढ़ाता है। अत्यधिक ऊंचाई पर काम करने की इसकी क्षमता निगरानी और सटीक हमलों में एक निर्णायक बढ़त प्रदान करती है, जिससे चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में भारत की समग्र युद्ध तत्परता बढ़ती है।
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