Current Affairs & MCQs
Latest Questions, Daily Updates & More

विज्ञान और प्रौद्योगिकी अपडेट: इसरो, एआई और अंतरिक्ष मिशन

गगनयान मिशन में एआई का एकीकरण
2026-06-05
पृष्ठभूमि: भारत का महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, गगनयान, का उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजना है। इसमें जटिल मिशन योजना, वास्तविक समय की निगरानी और अंतरिक्ष यात्री सहायता शामिल है। वर्तमान संदर्भ: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को गगनयान मिशन के संचालन में तेजी से एकीकृत किया जा रहा है। मिशन नियंत्रण, चालक दल के स्वास्थ्य की निगरानी और मिशन के महत्वपूर्ण चरणों के दौरान स्वायत्त निर्णय लेने के लिए एआई एल्गोरिदम विकसित किए जा रहे हैं। इस एकीकरण का उद्देश्य सुरक्षा और दक्षता को बढ़ाना है। प्रभाव: गगनयान में एआई का उपयोग न केवल अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा बल्कि मिशन के प्रदर्शन को भी अनुकूलित करेगा। यह भारत के अंतरिक्ष अन्वेषण के प्रयासों के लिए उन्नत तकनीकों का लाभ उठाने में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व करता है।
भारत के अगली पीढ़ी के NavIC उपग्रह विकास के अधीन
2026-06-05
पृष्ठभूमि: भारत की स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन प्रणाली, NavIC (Navigation with Indian Constellation), में वर्तमान में सात उपग्रह हैं। यह सटीक स्थिति, नेविगेशन और समय सेवाएं प्रदान करती है। वर्तमान संदर्भ: इसरो अगली पीढ़ी के NavIC उपग्रहों को सक्रिय रूप से विकसित कर रहा है, जिनमें बेहतर सिग्नल शक्ति और व्यापक कवरेज सहित उन्नत क्षमताएं होंगी। ये नए उपग्रह नेविगेशन प्रौद्योगिकी में भारत की आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। प्रभाव: उन्नत NavIC प्रणाली भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करेगी, नागरिक और रक्षा अनुप्रयोगों के लिए नेविगेशन सेवाओं की सटीकता और विश्वसनीयता में सुधार करेगी, और विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करेगी।
सरकार 'मेक इन इंडिया' पहल के माध्यम से विनिर्माण को बढ़ावा देती है
2026-06-05
पृष्ठभूमि: 'मेक इन इंडिया' पहल को भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र में बदलने और कंपनियों को देश के भीतर विनिर्माण के लिए प्रोत्साहित करने के लिए शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य देश के सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण की हिस्सेदारी बढ़ाना है। वर्तमान संदर्भ: विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने के अपने चल रहे प्रयासों के हिस्से के रूप में, सरकार 'मेक इन इंडिया' पहल को तेज कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स और कपड़ा जैसे प्रमुख क्षेत्रों के लिए नई नीतिगत प्रोत्साहन, सुव्यवस्थित नियामक प्रक्रियाएं और लक्षित सहायता शुरू की जा रही है। घरेलू मूल्यवर्धन बढ़ाने और निर्यात को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। प्रभाव: इस नवीनीकृत प्रयास से औद्योगिक उत्पादन में काफी वृद्धि होने, पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा होने और विनिर्माण क्षेत्र में घरेलू और विदेशी दोनों तरह के निवेश को आकर्षित करने की उम्मीद है। यह वैश्विक बाजारों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा और एक अधिक संतुलित और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था में योगदान देगा।
वित्त वर्ष 27 के अंत तक मुद्रास्फीति 4.5% तक कम हुई
2026-06-05
पृष्ठभूमि: मुद्रास्फीति का प्रबंधन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और सरकार के लिए एक प्रमुख उद्देश्य रहा है। सतत आर्थिक विकास और क्रय शक्ति बनाए रखने के लिए मूल्य स्थिरता महत्वपूर्ण है। वर्तमान संदर्भ: आने वाले वित्तीय वर्ष में मुद्रास्फीति के दबाव में काफी कमी आने की उम्मीद है। पूर्वानुमान बताते हैं कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति वित्त वर्ष 27 के अंत तक लगभग 4.5% तक कम हो जाएगी। यह कमी स्थिर खाद्य अनाज कीमतों, प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और आरबीआई द्वारा की गई विवेकपूर्ण मौद्रिक नीति उपायों के निरंतर प्रभाव के कारण अपेक्षित है। प्रभाव: कम मुद्रास्फीति दर उपभोक्ताओं को उनकी वास्तविक क्रय शक्ति बढ़ाकर और आवश्यक वस्तुओं की लागत को कम करके लाभान्वित करेगी। यह एक अधिक स्थिर मैक्रोइकॉनॉमिक वातावरण भी बनाएगा, जो निवेश को प्रोत्साहित करेगा और सरकार के आर्थिक विकास के उद्देश्यों का समर्थन करेगा। व्यवसायों को अनुमानित लागत संरचनाओं से लाभ होगा।
वित्त वर्ष 27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि 7.5% अनुमानित
2026-06-05
पृष्ठभूमि: भारत ने लगातार मजबूत आर्थिक प्रदर्शन दिखाया है, जिसमें सतत विकास और उन्नति पर ध्यान केंद्रित किया गया है। सरकार घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के लिए विभिन्न नीतियों को लागू कर रही है। वर्तमान संदर्भ: वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अनुमान बताते हैं कि भारत की जीडीपी 7.5% की मजबूत दर से बढ़ने की संभावना है। इस आशावादी पूर्वानुमान का श्रेय मजबूत घरेलू खपत, सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों द्वारा बढ़ी हुई पूंजीगत व्यय और अनुकूल वैश्विक आर्थिक वातावरण को दिया जाता है। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र इस वृद्धि के प्रमुख चालक होने की उम्मीद है। प्रभाव: यह अनुमानित विकास दर भारत के लचीलेपन और एक प्रमुख वैश्विक आर्थिक खिलाड़ी के रूप में उसकी स्थिति को दर्शाती है। इससे रोजगार सृजन, उच्च प्रयोज्य आय और नागरिकों के लिए जीवन स्तर में सुधार होने की उम्मीद है। निरंतर वृद्धि से निवेशकों का विश्वास भी बढ़ेगा और देश की आर्थिक स्थिरता और मजबूत होगी।
भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक वार्ता, एफटीए में प्रगति
2026-06-05
पृष्ठभूमि: भारत और यूरोपीय संघ व्यापार, प्रौद्योगिकी तथा सुरक्षा सहयोग पर केंद्रित अपनी रणनीतिक साझेदारी को लगातार मजबूत कर रहे हैं। वैश्विक चुनौतियों के समाधान हेतु नियमित उच्च-स्तरीय वार्ताएँ आवश्यक हैं। वर्तमान संदर्भ: 18वीं भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी वार्ता 3 जून, 2026 को ब्रुसेल्स में संपन्न हुई। इसमें महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, हरित संक्रमण और आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन पर चर्चा हुई। मुक्त व्यापार समझौते (FTA) वार्ताओं में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई, दोनों पक्षों ने शीघ्र निष्कर्ष की उम्मीद जताई। प्रभाव: यह वार्ता द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करती है, जिससे व्यापार, निवेश और तकनीकी हस्तांतरण बढ़ सकता है। सफल एफटीए दोनों के आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा, भारत को हिंद-प्रशांत में यूरोपीय संघ का महत्वपूर्ण भागीदार बनाएगा और उनके भू-राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाएगा।
वैश्विक जलवायु वित्त शिखर सम्मेलन में प्रमुख प्रतिज्ञाएँ
2026-06-05
पृष्ठभूमि: विकासशील देश लगातार विकसित राष्ट्रों से अधिक जलवायु वित्त की वकालत करते हैं। मौजूदा प्रतिबद्धताएँ अक्सर कम पड़ती हैं, जिससे कमजोर क्षेत्रों में महत्वपूर्ण शमन और अनुकूलन प्रयास बाधित होते हैं। वर्तमान संदर्भ: संयुक्त राष्ट्र और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं द्वारा सह-आयोजित एक महत्वपूर्ण वैश्विक जलवायु वित्त शिखर सम्मेलन 4 जून, 2026 को संपन्न हुआ। इसने 2030 तक सालाना 500 बिलियन डॉलर के लक्ष्य वाली नई प्रतिबद्धताएँ सुरक्षित कीं, जिसमें ग्लोबल साउथ के लिए अभिनव वित्तपोषण तंत्र और ऋण-के-बदले-जलवायु स्वैप स्थापित किए गए। प्रभाव: यह समझौता वैश्विक जलवायु लचीलेपन को काफी बढ़ाएगा और हरित आर्थिक परिवर्तनों को गति देगा। इसका उद्देश्य वित्तीय अंतर को पाटना है, जिससे कमजोर राष्ट्रों को महत्वपूर्ण अनुकूलन परियोजनाओं को लागू करने और समानता को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए
2026-06-05
पृष्ठभूमि: भारत तीव्र आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की अनिवार्यता के बीच संतुलन बनाने की जटिल चुनौती का सामना करता है। पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) सहित कानूनी ढांचे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अक्सर व्याख्या और चुनौतियों के अधीन होते हैं। वर्तमान संदर्भ: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसमें बड़े पैमाने के बुनियादी ढांचा और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए ईआईए आयोजित करने हेतु स्पष्ट और सख्त दिशानिर्देश प्रदान किए गए हैं। इस फैसले में बढ़ी हुई सार्वजनिक परामर्श, स्वतंत्र विशेषज्ञ समीक्षा और मजबूत मंजूरी-पश्चात निगरानी तंत्र अनिवार्य किए गए हैं। प्रभाव: यह फैसला पर्यावरण शासन को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करने, यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार है कि विकास परियोजनाएं टिकाऊ और पारिस्थितिक रूप से जिम्मेदार हों। यह मनमानी मंजूरी पर अंकुश लगाएगा, जैव विविधता की रक्षा करेगा और स्थानीय समुदायों को सशक्त करेगा, जिससे राष्ट्रीय विकास के लिए अधिक संतुलित दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार ने सार्वजनिक सेवा वितरण के लिए नया 'नागरिक-प्रथम शासन ढांचा' पेश किया
2026-06-05
पृष्ठभूमि: भारत सरकार ने सार्वजनिक सेवा वितरण में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए प्रशासनिक सुधारों को लगातार प्राथमिकता दी है। पिछली पहलों ने सेवाओं के डिजिटलीकरण और प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर ध्यान केंद्रित किया था। वर्तमान संदर्भ: प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने एक नया "नागरिक-प्रथम शासन ढांचा" पेश किया है। यह ढांचा सेवा वितरण समय-सीमा को मानकीकृत करता है, एक एकीकृत शिकायत निवारण पोर्टल स्थापित करता है, और सभी केंद्रीय सरकारी विभागों के लिए प्रदर्शन ऑडिट अनिवार्य करता है, जिसमें डिजिटल-प्रथम दृष्टिकोण पर जोर दिया जाता है। प्रभाव: इस व्यापक सुधार का उद्देश्य नौकरशाही देरी को काफी कम करना, सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना और नागरिकों तथा सरकार के बीच अधिक विश्वास पैदा करना है। यह एक अधिक उत्तरदायी, कुशल और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को बढ़ावा देता है, जिससे समग्र जीवन सुगमता बढ़ती है।
राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (एबीडीएम) ने प्रमुख एकीकरण मील का पत्थर हासिल किया
2026-06-05
पृष्ठभूमि: भारत की आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) को एक एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना बनाने के लिए शुरू किया गया था, जिससे स्वास्थ्य रिकॉर्ड और सेवाओं तक निर्बाध पहुंच संभव हो सके। इसका लक्ष्य स्वास्थ्य सेवा के लिए एक व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। वर्तमान संदर्भ: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में सभी प्रमुख सार्वजनिक अस्पतालों और 70% से अधिक निजी स्वास्थ्य सुविधाओं के एबीडीएम ढांचे में सफल एकीकरण की घोषणा की। इस उपलब्धि में चयनित पायलट क्षेत्रों में एआई-संचालित नैदानिक ​​सहायता जैसी उन्नत सुविधाओं का शुभारंभ शामिल है। प्रभाव: यह महत्वपूर्ण विस्तार बेहतर स्वास्थ्य सेवा पहुंच, सुव्यवस्थित रोगी डेटा प्रबंधन और चिकित्सा त्रुटियों में कमी का वादा करता है। यह डेटा-संचालित नीति-निर्माण को सुविधाजनक बनाएगा, सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करेगा और भारत को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के करीब लाएगा।
Home Exams Jobs Current Affairs Mock Tests