LIVE Access Mock Tests, PYP & AI Analytics for 375+ Exams! 7 Days Free Trial ₹99 Start Free Trial
Current Affairs & MCQs
Latest Questions, Daily Updates & More

रक्षा और सुरक्षा समाचार: सैन्य अभ्यास और खरीद पर नवीनतम अपडेट

भारत-अमेरिका ने हिमाचल प्रदेश में शुरू किया 'वज्र प्रहार' विशेष बल अभ्यास
2026-06-10
पृष्ठभूमि: 'वज्र प्रहार' भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सालाना आयोजित होने वाला एक संयुक्त विशेष बल अभ्यास है, जो बारी-बारी से दोनों देशों में होता है। इसका उद्देश्य आतंकवाद विरोधी अभियानों में अंतरसंचालनीयता बढ़ाना और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना है। वर्तमान संदर्भ: इस अभ्यास का 15वां संस्करण 10 जून, 2026 को वाशिंगटन, यूएसए में संयुक्त बेस लुईस-मैककॉर्ड में शुरू हुआ। यह संस्करण उच्च-ऊंचाई वाले जंगल युद्ध और आतंकवाद विरोधी परिदृश्यों पर केंद्रित है। दोनों देशों के विशेष बल कर्मी जटिल अभ्यासों में भाग ले रहे हैं। प्रभाव: यह अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक रक्षा संबंधों को मजबूत करता है, जिससे दोनों देशों के विशेष बलों की विभिन्न और चुनौतीपूर्ण वातावरणों में संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता में सुधार होता है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ती है।
भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों में एआई और रोबोटिक्स का एकीकरण
2026-06-10
पृष्ठभूमि: अंतरिक्ष अन्वेषण मिशन ऐतिहासिक रूप से मानव नियंत्रण और पूर्व-प्रोग्राम किए गए अनुक्रमों पर निर्भर रहे हैं। हालांकि, बढ़ती जटिलता और विशाल दूरियों के कारण उन्नत स्वायत्त प्रणालियों की आवश्यकता होती है। वर्तमान संदर्भ: इसरो और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां भविष्य के मिशनों में, जिसमें संभावित चंद्र और मंगल के प्रयास शामिल हैं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और उन्नत रोबोटिक्स के एकीकरण की सक्रिय रूप से खोज कर रही हैं। ये प्रौद्योगिकियां अंतरिक्ष यान को वास्तविक समय में निर्णय लेने, स्वायत्त रूप से नेविगेट करने, साइट पर डेटा का विश्लेषण करने और अधिक दक्षता और सुरक्षा के साथ जटिल कार्य करने में सक्षम बनाएंगी। प्रभाव: एआई और रोबोटिक्स की तैनाती अंतरिक्ष मिशनों के दायरे और सफलता दर को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगी, जिससे अधिक महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक खोजें संभव होंगी और पृथ्वी से परे दीर्घकालिक मानव उपस्थिति का मार्ग प्रशस्त होगा।
इसरो चंद्रयान-4 चंद्र मिशन की तैयारी में जुटा
2026-06-10
पृष्ठभूमि: भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम ने महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किए हैं, जिसमें चंद्रयान-3 मिशन की सफलता भी शामिल है, जिसने चंद्र दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की थी। वर्तमान संदर्भ: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) कथित तौर पर चंद्रयान-3 के अनुवर्ती मिशन, चंद्रयान-4 की योजना बना रहा है। इस मिशन से चंद्र दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में नमूना वापसी या इन-सीटू संसाधन उपयोग (ISRU) प्रयोगों सहित उन्नत वैज्ञानिक उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद है। प्रभाव: चंद्रयान-4 का उद्देश्य चंद्रमा के भूविज्ञान, जल बर्फ की क्षमता और भविष्य के मानव निवास के लिए उपयुक्तता की हमारी समझ को गहरा करना है, जिससे चंद्र अन्वेषण में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।
RBI ने FY25 के लिए मुद्रास्फीति को 4.5% तक कम होने का अनुमान लगाया
2026-06-10
पृष्ठभूमि: मुद्रास्फीति प्रबंधन RBI का प्राथमिक उद्देश्य है। मूल्य स्थिरता बनाए रखने, क्रय शक्ति की रक्षा करने और सतत आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय रिज़र्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) द्वारा मापी जाने वाली मुद्रास्फीति 4.5% तक कम हो सकती है। यह पूर्वानुमान सामान्य मानसून, स्थिर वैश्विक वस्तु कीमतों और मौद्रिक नीति उपायों के प्रभाव की मान्यताओं पर आधारित है। प्रभाव: मुद्रास्फीति में अनुमानित गिरावट उपभोक्ताओं के लिए उनकी वास्तविक आय और क्रय शक्ति को बढ़ाकर फायदेमंद होगी। यह केंद्रीय बैंक को अपनी मौद्रिक नीति के रुख में अधिक लचीलापन भी प्रदान करता है, जिससे मूल्य दबाव को बढ़ाए बिना विकास का समर्थन करने की संभावना है।
RBI ने FY25 के लिए GDP विकास अनुमान 7.2% पर बनाए रखा
2026-06-10
पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) समय-समय पर देश के आर्थिक विकास का आकलन और पूर्वानुमान करता है। ये पूर्वानुमान अर्थव्यवस्था के समग्र स्वास्थ्य को समझने और नीतिगत निर्णयों का मार्गदर्शन करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान संदर्भ: अपने नवीनतम आकलन में, RBI ने वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) के लिए भारत के वास्तविक GDP विकास के अपने अनुमान को 7.2% पर बनाए रखा है। यह निर्णय निरंतर घरेलू मांग, ग्रामीण खपत में संभावित वृद्धि और सरकारी पूंजीगत व्यय में निरंतरता की उम्मीदों पर आधारित है। प्रभाव: एक मजबूत विकास अनुमान बनाए रखना भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन में विश्वास का संकेत देता है। इससे निवेश को बढ़ावा मिलने, रोजगार सृजन का समर्थन होने और समग्र आर्थिक स्थिरता में योगदान होने की उम्मीद है, हालांकि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं एक कारक बनी हुई हैं।
भारत और यूरोपीय संघ ने मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता संपन्न की
2026-06-10
पृष्ठभूमि: भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए वार्ता एक दशक से भी पहले शुरू हुई थी, लेकिन बाजार पहुंच, शुल्कों और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर मतभेदों के कारण कई गतिरोधों का सामना करना पड़ा। दोनों पक्षों ने आर्थिक विकास की अपार संभावनाओं को पहचाना। वर्तमान संदर्भ: 9 जून, 2026 को ब्रुसेल्स में समाप्त हुई गहन वार्ताओं के दौर के बाद, भारत और यूरोपीय संघ ने अपने महत्वाकांक्षी FTA के लिए वार्ताओं के सफल समापन की घोषणा की। संबंधित संसदों द्वारा अनुसमर्थन लंबित होने पर, इस समझौते पर इस वर्ष के अंत में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। प्रभाव: यह ऐतिहासिक समझौता द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देगा, जिससे वस्तुओं और सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क कम होंगे। यह व्यवसायों के लिए नए बाजार अवसर खोलेगा, आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन को बढ़ाएगा और दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच घनिष्ठ रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देगा।
G7 देशों ने विकासशील देशों के लिए उन्नत जलवायु वित्त का संकल्प लिया
2026-06-10
पृष्ठभूमि: विकासशील देशों ने ऐतिहासिक उत्सर्जन का हवाला देते हुए, जलवायु परिवर्तन से निपटने और इसके प्रभावों के अनुकूल होने के लिए विकसित देशों से अधिक वित्तीय सहायता की वकालत की है। मौजूदा जलवायु वित्त प्रतिबद्धताएं अक्सर कम पड़ जाती हैं, जिससे पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने के वैश्विक प्रयासों में बाधा आती है। वर्तमान संदर्भ: 6-8 जून, 2026 तक इटली में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में, नेताओं ने विकासशील देशों के लिए अपने सामूहिक जलवायु वित्त योगदान को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने का संकल्प लिया। इस प्रतिज्ञा में अनुदान-आधारित वित्तपोषण पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के लिए नए तंत्र शामिल हैं। प्रभाव: यह बढ़ी हुई प्रतिबद्धता विकसित और विकासशील देशों के बीच विश्वास बनाने और विश्व स्तर पर जलवायु कार्रवाई में तेजी लाने के लिए महत्वपूर्ण है। यह नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे और टिकाऊ कृषि में महत्वपूर्ण निवेश को बढ़ावा दे सकता है, जिससे हरित अर्थव्यवस्था में अधिक न्यायसंगत संक्रमण को बढ़ावा मिलेगा।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पूर्वी अफ्रीकी संघर्ष में युद्धविराम का आह्वान किया
2026-06-10
पृष्ठभूमि: हॉर्न ऑफ अफ्रीका में काल्पनिक "वेरिडियन संघर्ष" पिछले एक साल में बढ़ गया है, जिससे लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और एक गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है। क्षेत्रीय मध्यस्थता के प्रयास स्थायी शांति प्राप्त करने में विफल रहे हैं, जिससे स्थिरता और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर व्यापक अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ गई है। वर्तमान संदर्भ: 8 जून, 2026 को, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव 2789 पारित किया, जिसमें युद्धरत गुटों के बीच तत्काल और बिना शर्त युद्धविराम का आह्वान किया गया। प्रस्ताव में मानवीय सहायता तक पहुंच बढ़ाने और शांति प्रयासों में बाधा डालने वाले व्यक्तियों के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों की धमकी भी दी गई है। प्रभाव: इस प्रस्ताव का उद्देश्य युद्धरत पक्षों पर तनाव कम करने और नागरिकों की रक्षा के लिए दबाव डालना है। हालांकि प्रवर्तन एक चुनौती बना हुआ है, यह एक एकीकृत अंतरराष्ट्रीय रुख प्रदान करता है, जो प्रभावित आबादी तक महत्वपूर्ण सहायता पहुंचाने और नए सिरे से राजनयिक वार्ताओं का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
पर्यावरण मंत्रालय ने भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों पर प्रगति रिपोर्ट जारी की
2026-06-10
पृष्ठभूमि: भारत ने जलवायु परिवर्तन शमन रणनीति के हिस्से के रूप में महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता जताई है। स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना सतत विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों पर अपनी वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट में पिछले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्यों को पार करते हुए, सौर और पवन ऊर्जा क्षमता वृद्धि में महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला गया है। यह राष्ट्र की पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए, चल रहे संरक्षण प्रयासों और संरक्षित वन क्षेत्रों के विस्तार का भी विवरण देता है। प्रभाव: यह रिपोर्ट स्वच्छ ऊर्जा की ओर वैश्विक संक्रमण में भारत के नेतृत्व की पुष्टि करती है और इसकी पर्यावरण नीतियों की प्रभावशीलता को दर्शाती है। यह नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों को प्राप्त करने और पारिस्थितिक लचीलापन बढ़ाने के लिए एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
शिक्षा मंत्रालय ने स्कूली पाठ्यक्रम में AI एकीकरण के लिए ढांचा पेश किया
2026-06-10
पृष्ठभूमि: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की परिवर्तनकारी क्षमता को पहचानते हुए, भारत सरकार का लक्ष्य भविष्य के कार्यबल को प्रासंगिक कौशल से लैस करना है। राष्ट्रीय विकास के लिए शिक्षा में एआई को एकीकृत करना महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्तमान संदर्भ: शिक्षा मंत्रालय ने माध्यमिक स्तर से आगे स्कूली पाठ्यक्रम में एआई अवधारणाओं और अनुप्रयोगों को एकीकृत करने के लिए एक नया ढांचा पेश किया है। यह ढांचा एआई से संबंधित महत्वपूर्ण सोच, समस्या-समाधान कौशल और नैतिक समझ विकसित करने पर केंद्रित है। इसमें शिक्षक प्रशिक्षण और आयु-उपयुक्त शिक्षण सामग्री के विकास के लिए दिशानिर्देश शामिल हैं। प्रभाव: यह पहल छात्रों को एआई की मूल बातें, इसके सामाजिक निहितार्थों और इसके संभावित अनुप्रयोगों को समझने में मदद करेगी, जिससे वे प्रौद्योगिकी द्वारा तेजी से आकार लेने वाले भविष्य के लिए तैयार होंगे और भारतीय शिक्षा प्रणाली के भीतर नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
Home Exams Jobs Current Affairs Mock Tests