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पर्यावरण और पारिस्थितिकी करेंट अफेयर्स: लक्षद्वीप MPA, शहरी हरियाली नीति

भारत ने लक्षद्वीप में नए समुद्री संरक्षित क्षेत्र की घोषणा की
2026-06-11
पृष्ठभूमि: भारत में विशेष रूप से इसके द्वीप क्षेत्रों में समृद्ध समुद्री जैव विविधता है। लक्षद्वीप के प्रवाल भित्तियाँ महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र हैं जो जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों से खतरों का सामना कर रहे हैं। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने लक्षद्वीप में कई एटोल को शामिल करते हुए एक नए समुद्री संरक्षित क्षेत्र (MPA) की आधिकारिक घोषणा की है। यह निर्णय इसके अद्वितीय समुद्री वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से व्यापक वैज्ञानिक सर्वेक्षणों और सामुदायिक परामर्शों के बाद लिया गया है। प्रभाव: यह घोषणा कमजोर प्रवाल प्रजातियों, विविध मछली आबादी और अन्य समुद्री जीवों के संरक्षण को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगी। इससे विनियमित इको-टूरिज्म और मत्स्य पालन के माध्यम से स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका का समर्थन होने की उम्मीद है, जिससे जैव विविधता संरक्षण पर भारत की वैश्विक प्रतिबद्धताओं में योगदान मिलेगा।
भारतीय नौसेना ने वरुणास्त्र-एक्स का परीक्षण किया
2026-06-11
पृष्ठभूमि: वरुणास्त्र श्रृंखला भारत के स्वदेशी भारी-वजन वाले टारपीडो विकास कार्यक्रम का प्रतिनिधित्व करती है, जिसका उद्देश्य पानी के नीचे युद्ध क्षमताओं को बढ़ाना है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय नौसेना ने 11 जून 2026 को 'वरुणास्त्र-एक्स' का पहला समुद्री परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। यह उन्नत संस्करण अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में बेहतर ध्वनिक होमिंग और लंबी दूरी की क्षमता रखता है। वास्तविक समुद्री परिस्थितियों में इसके प्रदर्शन का परीक्षण करने के लिए बंगाल की खाड़ी में परीक्षण किए गए। प्रभाव: वरुणास्त्र-एक्स का शामिल होना नौसेना की पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमताओं को मजबूत करेगा, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में बेहतर समुद्री सुरक्षा और प्रतिरोध सुनिश्चित होगा।
इंडस-एक्स रणनीतिक रोडमैप को अंतिम रूप दिया गया
2026-06-11
पृष्ठभूमि: भारत-अमेरिका रक्षा त्वरण पारिस्थितिकी तंत्र (INDUS-X) को रक्षा स्टार्टअप और उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था। वर्तमान संदर्भ: 10 जून 2026 को, दोनों देशों के अधिकारियों ने संयुक्त अनुसंधान और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में तेजी लाने के लिए एक व्यापक रोडमैप को अंतिम रूप दिया। इसमें रक्षा के लिए एआई-संचालित निगरानी और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे विशिष्ट फोकस क्षेत्र शामिल हैं। प्रभाव: यह पहल विदेशी आयात पर निर्भरता को काफी कम करेगी, भारतीय रक्षा स्टार्टअप को वैश्विक बाजारों तक पहुंचने के लिए सशक्त बनाएगी और महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगी।
इसरो चंद्रयान-4 चंद्र दक्षिणी ध्रुव मिशन के लिए तैयार
2026-06-11
पृष्ठभूमि: भारत के चंद्रयान कार्यक्रम ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, जिसमें चंद्रयान-3 का चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग शामिल है। पानी की बर्फ की संभावित उपस्थिति के कारण यह क्षेत्र अत्यधिक वैज्ञानिक रुचि का है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) कथित तौर पर अपने अगले महत्वाकांक्षी चंद्र मिशन, चंद्रयान-4 की योजना बना रहा है। इस मिशन से अपने पूर्ववर्तियों की सफलताओं पर निर्माण करने की उम्मीद है, जिसमें चंद्र दक्षिणी ध्रुव से उन्नत वैज्ञानिक अन्वेषण और संभावित रूप से नमूना वापसी क्षमता पर प्राथमिक ध्यान दिया जाएगा। प्रभाव: चंद्रयान-4 का उद्देश्य वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की स्थिति को और मजबूत करना, चंद्र संसाधनों पर महत्वपूर्ण डेटा का योगदान करना और अंतरिक्ष विज्ञान में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है। यह वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की भविष्य की पीढ़ियों को भी प्रेरित करेगा।
वित्त वर्ष 25 में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति के 4.5% तक कम होने का अनुमान
2026-06-11
पृष्ठभूमि: खुदरा मुद्रास्फीति, जिसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) द्वारा मापा जाता है, मूल्य स्थिरता का एक प्रमुख संकेतक है और यह घरेलू क्रय शक्ति को प्रभावित करती है। आरबीआई मौद्रिक नीति के प्रबंधन के लिए मुद्रास्फीति की बारीकी से निगरानी करता है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय रिज़र्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति 4.5% तक कम हो जाएगी। यह अनुमान सामान्य मानसून, स्थिर वैश्विक वस्तु कीमतों और खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सरकारी आपूर्ति-पक्ष के हस्तक्षेपों की प्रभावशीलता पर आधारित है। प्रभाव: कम मुद्रास्फीति दर उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद है क्योंकि यह उनकी वास्तविक आय और क्रय शक्ति को बढ़ाती है। यह आरबीआई को अपनी मौद्रिक नीति निर्णयों में अधिक लचीलापन भी प्रदान करती है, जिससे संभावित रूप से स्थिर ब्याज दरें और आर्थिक विकास को समर्थन मिल सकता है।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 25 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.2% पर बरकरार रखा
2026-06-11
पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) समय-समय पर देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि का आकलन और पूर्वानुमान जारी करता है। यह पूर्वानुमान भारतीय अर्थव्यवस्था के समग्र स्वास्थ्य और दिशा को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। वर्तमान संदर्भ: अपने नवीनतम आकलन में, आरबीआई ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि के अनुमान को 7.2% पर बनाए रखने का निर्णय लिया है। यह निर्णय निरंतर घरेलू मांग, बेहतर ग्रामीण उपभोग और मजबूत निवेश गतिविधियों की अपेक्षाओं पर आधारित है। प्रभाव: यह स्थिर वृद्धि का अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन में विश्वास को दर्शाता है। इससे आगे निवेश को बढ़ावा मिलने, रोजगार सृजन में सहायता मिलने और सकारात्मक कारोबारी माहौल में योगदान मिलने की उम्मीद है, जो सरकार के आर्थिक उद्देश्यों में सहायक होगा।
G7 नेताओं ने जलवायु कार्रवाई और ऊर्जा सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया
2026-06-11
पृष्ठभूमि: जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा G7 चर्चाओं में आवर्ती विषय हैं, जो इन महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियों से निपटने में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की साझा जिम्मेदारी को दर्शाते हैं। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान, नेताओं ने स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में परिवर्तन को तेज करने और विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं और तकनीकी नवाचार के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश बढ़ाने और विशेष रूप से कमजोर राष्ट्रों के लिए जलवायु अनुकूलन और शमन रणनीतियों पर सहयोग बढ़ाने का वचन दिया। प्रभाव: इस नवीनीकृत प्रतिबद्धता से जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में वैश्विक प्रयासों को बढ़ावा मिलने, हरित प्रौद्योगिकियों में नवाचार को बढ़ावा मिलने और भाग लेने वाले राष्ट्रों और व्यापक अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए अधिक स्थिर और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
G7 शिखर सम्मेलन 2026 वैश्विक आर्थिक स्थिरता और AI शासन पर ध्यान केंद्रित करते हुए संपन्न
2026-06-11
पृष्ठभूमि: ग्रुप ऑफ सेवन (G7) कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका से मिलकर बना एक अंतर-सरकारी राजनीतिक मंच है। इसे अक्सर दुनिया की प्रमुख उन्नत अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने वाला माना जाता है। वर्तमान संदर्भ: 8-10 जून, 2026 तक आयोजित 2026 G7 शिखर सम्मेलन, बढ़ती मुद्रास्फीति और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों के बीच वैश्विक आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए संपन्न हुआ। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शासन के लिए अंतर्राष्ट्रीय ढांचे स्थापित करने के उद्देश्य से चर्चाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा समर्पित था, जिसका लक्ष्य संभावित जोखिमों को कम करते हुए जिम्मेदार नवाचार को बढ़ावा देना है। प्रभाव: शिखर सम्मेलन के परिणामों से सदस्य देशों के बीच समन्वित आर्थिक नीतियों का मार्गदर्शन करने और वैश्विक AI विनियमन के लिए एक मिसाल कायम करने की उम्मीद है, जो संभावित रूप से तकनीकी विकास और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
विधि मंत्रालय ने एकीकृत नागरिक रजिस्ट्री परामर्श शुरू किया
2026-06-11
पृष्ठभूमि: भारत वर्तमान में जन्म, मृत्यु और प्रवास रिकॉर्ड के लिए खंडित डेटाबेस पर निर्भर है। वर्तमान संदर्भ: विधि और न्याय मंत्रालय ने प्रस्तावित 'एकीकृत नागरिक रजिस्ट्री' (UCR) के लिए राष्ट्रव्यापी परामर्श प्रक्रिया शुरू की है। यह परियोजना भारत में सभी महत्वपूर्ण आंकड़ों के लिए एक एकल, वास्तविक समय डेटाबेस बनाने का प्रयास करती है। प्रभाव: UCR जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे कानूनी दस्तावेजों के जारी होने को सुव्यवस्थित करेगा, जिससे कई पहचान प्रमाणों की आवश्यकता कम हो जाएगी। यह सरकार को सटीक जनसांख्यिकीय डेटा प्रदान करेगा, जिससे नीति निर्माण और सामाजिक कल्याण के लिए बेहतर संसाधन आवंटन संभव होगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय शासन डिजिटल अवसंरचना को मंजूरी दी
2026-06-11
पृष्ठभूमि: सरकार नौकरशाही में देरी को कम करने के लिए प्रशासनिक कार्यप्रवाह को डिजिटल बनाने पर काम कर रही है। वर्तमान संदर्भ: 10 जून 2026 को, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'राष्ट्रीय शासन डिजिटल अवसंरचना' (NGDI) ढांचे को मंजूरी दी। इस पहल का उद्देश्य अलग-अलग राज्य और केंद्रीय डेटाबेस को एक एकीकृत क्लाउड-आधारित आर्किटेक्चर में जोड़ना है। प्रभाव: NGDI अंतर-विभागीय समन्वय को बढ़ाएगा, डेटा अतिरेक को कम करेगा और नागरिक-केंद्रित सेवाओं के प्रसंस्करण में तेजी लाएगा। यह कागज रहित और पारदर्शी शासन मॉडल की दिशा में एक बड़ा बदलाव है, जिससे कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में मदद मिलेगी।
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