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आरबीआई नीति और डिजिटल रुपया विस्तार: बैंकिंग अपडेट जून 2026

डिजिटल रुपया (ई-रुपया) पायलट कार्यक्रम नई ऑफ़लाइन क्षमताओं के साथ विस्तारित
2026-06-27
पृष्ठभूमि: भारत ने अपनी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी), ई-रुपया, को थोक और खुदरा दोनों खंडों के लिए पायलट चरणों में लॉन्च किया था ताकि भुगतान प्रणालियों और वित्तीय समावेशन को बढ़ाने में इसके संभावित लाभों का पता लगाया जा सके। प्रारंभिक चरण बुनियादी डिजिटल लेनदेन पर केंद्रित थे। वर्तमान संदर्भ: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 27 जून, 2026 से प्रभावी खुदरा डिजिटल रुपया (ई-रुपया) पायलट कार्यक्रम के महत्वपूर्ण विस्तार की घोषणा की। इस विस्तार में अधिक सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों को शामिल करना, अतिरिक्त शहरों तक कवरेज का विस्तार करना, और महत्वपूर्ण रूप से, नई ऑफ़लाइन लेनदेन क्षमताओं की शुरुआत करना शामिल है। इसका उद्देश्य सीमित इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में ई-रुपये को सुलभ बनाना है। प्रभाव: यह पहल डिजिटल भुगतान को अपनाने में तेजी लाएगी, भौतिक नकदी पर निर्भरता कम करेगी, और विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देगी। ऑफ़लाइन कार्यक्षमता लचीलेपन और उपयोगिता को बढ़ाती है, ई-रुपये को एक मजबूत, संप्रभु-समर्थित डिजिटल विकल्प के रूप में स्थापित करती है जो भविष्य के सीमा-पार भुगतानों को सुव्यवस्थित कर सकता है और फिनटेक नवाचार को बढ़ावा दे सकता है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो दर 6.5% पर बरकरार रखी
2026-06-27
पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए नियमित रूप से द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा करता है। ये समीक्षाएं अर्थव्यवस्था में उधार देने और लेने को प्रभावित करने वाली प्रमुख ब्याज दरों को निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान संदर्भ: 27 जून, 2026 को, मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अपनी नवीनतम समीक्षा संपन्न की, जिसमें सर्वसम्मति से रेपो दर को 6.5% पर बनाए रखने का निर्णय लिया गया। यह निर्णय स्थिर मुद्रास्फीति अनुमानों और मजबूत घरेलू आर्थिक विकास के बीच आया है, जो वर्तमान व्यापक आर्थिक वातावरण में विश्वास का संकेत देता है। प्रभाव: अपरिवर्तित रेपो दर उधारकर्ताओं और निवेशकों के लिए स्थिरता प्रदान करती है, क्योंकि बैंक अपनी वर्तमान उधार दरों को बनाए रखने की संभावना रखते हैं। यह निर्णय विशेष रूप से रियल एस्टेट और विनिर्माण जैसे ब्याज-संवेदनशील क्षेत्रों में निरंतर आर्थिक गतिविधि का समर्थन करता है, जबकि समायोजन को धीरे-धीरे वापस लेने की आरबीआई की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
पीएम-किसान 17वीं किस्त: किसानों के लिए वित्तीय बढ़ावा
2026-06-27
पृष्ठभूमि: पीएम-किसान योजना यह सुनिश्चित करती है कि पात्र किसान परिवारों को सीधे उनके बैंक खातों में वित्तीय सहायता मिले। लाभार्थियों के डेटा के सत्यापन के बाद किस्तों को आम तौर पर समय-समय पर जारी किया जाता है। वर्तमान संदर्भ: पीएम-किसान योजना की 17वीं किस्त जल्द ही जारी होने की उम्मीद है, जो देश भर के लाखों किसानों को महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। यह जारी होना सभी लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी और भूमि रिकॉर्ड सत्यापन के पूरा होने पर निर्भर है। प्रभाव: 17वीं किस्त का समय पर जारी होना किसानों को आगामी कृषि सत्र से संबंधित अपने खर्चों का प्रबंधन करने, आवश्यक आदानों की खरीद करने और उनकी समग्र आर्थिक भलाई में सुधार करने के लिए सशक्त करेगा, जिससे कृषि क्षेत्र की स्थिरता में योगदान मिलेगा।
पीएम-किसान योजना: किसानों के लिए प्रत्यक्ष आय सहायता
2026-06-27
पृष्ठभूमि: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना भारत सरकार द्वारा परिवारों के कृषि और संबद्ध गतिविधियों के साथ-साथ उपयुक्त गैर-कृषि गतिविधियों को शुरू करने के प्रयासों को पूरक बनाने के लिए शुरू की गई थी। वर्तमान संदर्भ: इस योजना का उद्देश्य सभी पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को उनकी भूमि के आकार की परवाह किए बिना प्रति वर्ष 6,000 रुपये की प्रत्यक्ष आय सहायता प्रदान करना है। यह राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे 2,000 रुपये की तीन समान किस्तों में भुगतान की जाती है। प्रभाव: पीएम-किसान ने लाखों किसानों को वित्तीय स्थिरता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे वे बीज, उर्वरक और अन्य कृषि आदानों की अपनी तत्काल जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हुए हैं, जिससे कृषि उत्पादकता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है।
नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस 2026 मनाया गया
2026-06-27
पृष्ठभूमि: हर साल 26 जून को मनाया जाने वाला नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस 1987 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य अवैध दवाओं से समाज को होने वाली गंभीर समस्याओं के बारे में जागरूकता बढ़ाना और नशीली दवाओं के दुरुपयोग से मुक्त दुनिया प्राप्त करने के लिए कार्रवाई और सहयोग को मजबूत करना है। वर्तमान संदर्भ: 2026 के लिए, संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स और अपराध कार्यालय (यूएनओडीसी) ने 'लोग पहले: कलंक और भेदभाव रोकें, रोकथाम को मजबूत करें' विषय पर ध्यान केंद्रित किया। भारत ने नशीली दवाओं के तस्करी नेटवर्क से निपटने के लिए युवा शिक्षा, समुदाय-आधारित पुनर्वास और सीमा पार खुफिया जानकारी साझा करने पर जोर देते हुए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाए। प्रभाव: ये प्रयास नशीली दवाओं की मांग को कम करने, उपचार और पुनर्वास सेवाओं तक पहुंच में सुधार करने और नशे से जूझ रहे व्यक्तियों के प्रति अधिक दयालु दृष्टिकोण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण हैं। अंतर्राष्ट्रीय ड्रग कार्टेल को खत्म करने और कमजोर आबादी की रक्षा के लिए वैश्विक सहयोग महत्वपूर्ण है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम दिवस (MSME दिवस) 2026 मनाया गया
2026-06-27
पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने और नवाचार को बढ़ावा देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करने के लिए 27 जून को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम दिवस के रूप में नामित किया। एमएसएमई कई अर्थव्यवस्थाओं की रीढ़ हैं, जो विश्व स्तर पर रोजगार और सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वर्तमान संदर्भ: एमएसएमई दिवस 2026 पर, भारत ने डिजिटल परिवर्तन, ऋण पहुंच और बाजार संबंधों के लिए एकीकृत सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से एक नया 'एमएसएमई सहयोग' पोर्टल लॉन्च किया। सरकार ने इस क्षेत्र के लचीलेपन और 'आत्मनिर्भर भारत' में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। प्रभाव: इस पहल से भारतीय एमएसएमई को और सशक्त बनाने, उन्हें विस्तार करने, उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने और वैश्विक बाजारों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा, आर्थिक विकास को बढ़ाएगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।
ओडिशा में 12वीं सदी के मंदिर परिसर की खोज
2026-06-27
पृष्ठभूमि: ओडिशा अपनी अनूठी कलिंग वास्तुकला शैली के लिए प्रसिद्ध है, जो ऊंचे शिखर टावरों द्वारा पहचानी जाती है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हाल ही में पुरी जिले में खुदाई के दौरान 12वीं सदी के एक मंदिर परिसर का पता लगाया है। इस स्थल पर जटिल पत्थर की नक्काशी और मुख्य मंदिर के अवशेष मिले हैं। प्रभाव: यह खोज ओडिशा में मध्यकालीन युग के सामाजिक-धार्मिक जीवन के बारे में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करती है। यह कलिंग वास्तुकला के अध्ययन में एक नया अध्याय जोड़ती है और पुरातात्विक पर्यटन और ऐतिहासिक अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल के रूप में कार्य करती है।
प्राचीन ताड़पत्र पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण
2026-06-27
पृष्ठभूमि: भारत में ताड़पत्र पांडुलिपियों का एक विशाल संग्रह है, जिसमें विज्ञान, साहित्य और दर्शन का प्राचीन ज्ञान निहित है। वर्तमान संदर्भ: संस्कृति मंत्रालय ने इन नाजुक दस्तावेजों को नष्ट होने से बचाने के लिए क्षेत्रीय अभिलेखागारों में डिजिटलीकरण की एक राष्ट्रव्यापी परियोजना शुरू की है। प्रभाव: यह पहल दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करती है और शोधकर्ताओं को दुर्लभ ऐतिहासिक ग्रंथों तक डिजिटल पहुंच प्रदान करती है। यह पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और आधुनिक डिजिटल छात्रवृत्ति के बीच की खाई को पाटती है, जिससे भावी पीढ़ियों के लिए भारत की बौद्धिक विरासत की गहरी समझ विकसित होती है।
भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एशियाई खेल 2026 में जीता स्वर्ण पदक, ओलंपिक में स्थान पक्का किया
2026-06-27
पृष्ठभूमि: भारत में हॉकी की एक समृद्ध विरासत है, और राष्ट्रीय टीम अपनी पिछली शान को फिर से हासिल करने के लिए प्रयासरत रही है। एशियाई खेल हॉकी में ओलंपिक के लिए एक महत्वपूर्ण क्वालीफाइंग आयोजन है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एशियाई खेल 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर शानदार जीत हासिल की है। यह उल्लेखनीय उपलब्धि न केवल एशियाई हॉकी में उनके प्रभुत्व का प्रतीक है, बल्कि उन्हें पेरिस ओलंपिक 2028 के लिए एक सीधी क्वालीफिकेशन भी दिलाती है। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में असाधारण कौशल, टीम वर्क और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया। प्रभाव: स्वर्ण पदक जीत भारतीय हॉकी के लिए एक महत्वपूर्ण बढ़ावा है, जिससे खेल में राष्ट्रीय रुचि और समर्थन फिर से जागृत हुआ है। ओलंपिक के लिए सीधी योग्यता टीम को तैयारी के लिए पर्याप्त समय प्रदान करती है, जिससे वैश्विक आयोजन में मजबूत प्रदर्शन की उनकी संभावना बढ़ जाती है और राष्ट्र भर में हॉकी के प्रति उत्साही लोगों की एक नई लहर को प्रेरित करती है।
नीरज चोपड़ा ने एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में भाला फेंक खिताब का बचाव किया
2026-06-27
पृष्ठभूमि: ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा, भाला फेंक में अपनी असाधारण प्रतिभा के लिए जाने जाने वाले भारतीय एथलेटिक्स के एक सम्मानित व्यक्ति हैं। उन्होंने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। वर्तमान संदर्भ: भारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में अपना खिताब सफलतापूर्वक बचाया है। उन्होंने प्रभावशाली थ्रो की एक श्रृंखला के साथ स्वर्ण पदक जीता और इस स्पर्धा में अपना दबदबा फिर से स्थापित किया। इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप में उनकी जीत उन्हें अपने अनुशासन में दुनिया के अग्रणी एथलीटों में से एक के रूप में स्थापित करती है। प्रभाव: चोपड़ा की लगातार सफलता भारत में एथलीटों की एक नई पीढ़ी को प्रेरित करती है, जिससे ट्रैक एंड फील्ड की घटनाओं को बढ़ावा मिलता है। उनकी जीत राष्ट्रीय गौरव लाती है और वैश्विक मंच पर भारतीय एथलीटों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की क्षमता को उजागर करती है, जिससे देश में खेल विकास के लिए अधिक निवेश और समर्थन को प्रोत्साहन मिलता है।
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