Current Affairs & MCQs
Latest Questions, Daily Updates & More

कला एवं संस्कृति करेंट अफेयर्स: राखीगढ़ी खोज, कठपुतली पुनरुद्धार

हड़प्पा स्थल पर प्रमुख पुरातात्विक खोज
2026-06-18
पृष्ठभूमि: भारत में एक समृद्ध पुरातात्विक विरासत है, जिसमें विभिन्न प्राचीन स्थलों, विशेषकर सिंधु घाटी सभ्यता से संबंधित स्थलों पर लगातार खुदाई चल रही है। ये खोजें अक्सर प्राचीन संस्कृतियों पर नया प्रकाश डालती हैं। वर्तमान संदर्भ: हरियाणा के राखीगढ़ी स्थल पर हालिया खुदाई में परिपक्व हड़प्पा काल के एक अच्छी तरह से संरक्षित प्राचीन अन्न भंडार और मिट्टी के बर्तनों व मुहरों सहित कई अद्वितीय कलाकृतियाँ मिली हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 17 जून, 2026 को इस खोज की घोषणा की। प्रभाव: यह खोज हड़प्पा सभ्यता की शहरी योजना और आर्थिक गतिविधियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। यह उनकी कृषि पद्धतियों और व्यापार नेटवर्क में आगे के शोध के लिए महत्वपूर्ण प्रमाण प्रदान करता है, जिससे मौजूदा ऐतिहासिक आख्यानों को संशोधित किया जा सकता है और क्षेत्र में अधिक पुरातात्विक रुचि आकर्षित हो सकती है।
पारंपरिक भारतीय कठपुतली कला का संवर्धन
2026-06-18
पृष्ठभूमि: पारंपरिक भारतीय कठपुतली कला, जिसमें कठपुतली (राजस्थान), बोम्मलाट्टम (तमिलनाडु) और तोलपावाकूथु (केरल) जैसे विविध रूप शामिल हैं, भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत लेकिन अक्सर उपेक्षित हिस्सा है, जो आधुनिक समय में चुनौतियों का सामना कर रही है। वर्तमान संदर्भ: संस्कृति मंत्रालय ने संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से 16 जून, 2026 को पारंपरिक भारतीय कठपुतली कला को पुनर्जीवित करने और बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रव्यापी पहल शुरू की। इस कार्यक्रम में कार्यशालाएं, प्रदर्शन और डिजिटल संग्रह शामिल हैं ताकि युवा पीढ़ियों को जोड़ा जा सके और कठपुतली कलाकारों को आजीविका सहायता प्रदान की जा सके। प्रभाव: इस पहल का उद्देश्य लुप्तप्राय कठपुतली रूपों का संरक्षण करना, उनकी निरंतरता सुनिश्चित करना और राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उनकी स्थिति को ऊपर उठाना है। यह कलाकारों के लिए नए अवसर पैदा करेगा, सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देगा और जनता को इन कला रूपों में निहित समृद्ध कहानी कहने की परंपराओं के बारे में शिक्षित करेगा।
सतत गैस्ट्रोनॉमी दिवस 2026
2026-06-18
पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 18 जून को सतत गैस्ट्रोनॉमी दिवस के रूप में नामित किया है, ताकि गैस्ट्रोनॉमी को दुनिया की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विविधता से जुड़ी एक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के रूप में मान्यता दी जा सके। यह सतत खाद्य उपभोग और उत्पादन पैटर्न को बढ़ावा देता है। यह दिन उन पाक प्रथाओं के महत्व पर प्रकाश डालता है जो स्थानीय सामग्री, परंपराओं और पर्यावरण का सम्मान करती हैं। वर्तमान संदर्भ: 2026 में, सतत गैस्ट्रोनॉमी दिवस के समारोहों में स्थानीय स्रोतों पर जोर, खाद्य अपशिष्ट को कम करने और पर्यावरण के अनुकूल पारंपरिक पाक प्रथाओं को बढ़ावा देने की संभावना है। इसमें सतत खाना पकाने पर कार्यशालाएं, खेत-से-मेज पहल और भोजन, संस्कृति और पारिस्थितिक संतुलन के बीच महत्वपूर्ण संबंध को उजागर करने वाले जागरूकता अभियान शामिल हो सकते हैं। प्रभाव: यह अवलोकन उपभोक्ताओं और खाद्य उद्योग को अधिक सतत प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं का समर्थन होता है, जैव विविधता का संरक्षण होता है और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम किया जा सकता है। यह जिम्मेदार खाद्य विकल्पों के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाता है, जो एक स्वस्थ ग्रह और भविष्य की पीढ़ियों के लिए अधिक लचीली खाद्य प्रणालियों में योगदान देता है।
मरुस्थलीकरण और सूखे का मुकाबला करने के लिए विश्व दिवस 2026
2026-06-18
पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 1994 में स्थापित, मरुस्थलीकरण और सूखे का मुकाबला करने के लिए विश्व दिवस, जो 17 जून को मनाया जाता है, का उद्देश्य मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है। यह इन गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान खोजने की तात्कालिकता पर प्रकाश डालता है जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं, विशेषकर शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में। वर्तमान संदर्भ: 2026 के लिए, इस दिन का विषय "भूमि बहाली: हमारी भूमि। हमारा भविष्य।" या इसी तरह का हो सकता है, जो खराब हुई भूमि को बहाल करने और सूखे के प्रति लचीलापन बनाने के महत्व पर जोर देगा। सरकारें, अंतर्राष्ट्रीय संगठन और गैर-सरकारी संगठन नई पहल शुरू करेंगे, सतत भूमि प्रबंधन में हुई प्रगति पर रिपोर्ट देंगे और समुदायों को बहाली प्रयासों में शामिल करेंगे। प्रभाव: यह अवलोकन स्वस्थ भूमि की रक्षा और बहाली के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को जुटाता है, जो खाद्य सुरक्षा, गरीबी उन्मूलन और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के लिए महत्वपूर्ण है। यह पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने, आजीविका का समर्थन करने और सभी के लिए एक सतत भविष्य सुनिश्चित करने में सतत भूमि उपयोग प्रथाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026
2026-06-18
पृष्ठभूमि: भारत के प्रस्ताव के बाद 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रतिवर्ष 21 जून को मनाया जाता है। इसका प्राथमिक उद्देश्य योग के अभ्यास के कई लाभों के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है, जो भारत में उत्पन्न एक प्राचीन शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक अभ्यास है। वर्तमान संदर्भ: 2026 में, भारत, एक प्रस्तावक राष्ट्र के रूप में, "वैश्विक स्वास्थ्य और सद्भाव के लिए योग" या इसी तरह के एक विशिष्ट विषय के साथ वैश्विक समारोहों का नेतृत्व करेगा, जो समग्र कल्याण में इसकी भूमिका पर जोर देगा। आयोजनों में सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर योग प्रदर्शन, कार्यशालाएं और महाद्वीपों में ऑनलाइन सत्र शामिल होंगे, जो एकता और स्वास्थ्य को बढ़ावा देंगे। प्रभाव: यह दिन स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है, लाखों लोगों को शारीरिक फिटनेस, मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक विकास के लिए योग अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है, भारत की समृद्ध विरासत पर प्रकाश डालता है, और वैश्विक स्वास्थ्य पहलों, तनाव कम करने और दुनिया भर में संतुलित जीवन शैली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
पीएम-किसान योजना वित्तीय सहायता से किसानों को सशक्त बनाना जारी रखे हुए है
2026-06-18
पृष्ठभूमि: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना 24 फरवरी, 2019 को कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य देश के सभी भूमि-धारक किसान परिवारों को आय सहायता प्रदान करना है। वर्तमान संदर्भ: यह योजना सुनिश्चित करती है कि पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये प्राप्त हों, जो 2,000 रुपये की तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजे जाते हैं। यह प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण तंत्र पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करता है। प्रभाव: पीएम-किसान ने लाखों छोटे और सीमांत किसानों के वित्तीय लचीलेपन में काफी सुधार किया है, जिससे उन्हें कृषि आदानों में निवेश करने, घरेलू खर्चों का प्रबंधन करने और अप्रत्याशित वित्तीय झटकों से निपटने में मदद मिली है।
सरकार ने पीएम-किसान योजना की प्रगति और किसान पहुंच की समीक्षा की
2026-06-18
पृष्ठभूमि: पीएम-किसान योजना भारतीय सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र का समर्थन करने और किसानों की आजीविका बढ़ाने के लिए एक प्रमुख पहल है। यह प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) मॉडल पर काम करती है। वर्तमान संदर्भ: कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा हालिया समीक्षाओं में योजना के कार्यान्वयन की स्थिति, लाभार्थियों की संख्या और इसके आउटरीच कार्यक्रमों की प्रभावशीलता पर ध्यान केंद्रित किया गया है। अधिक पात्र किसानों को जोड़ने और विशेष रूप से दूरदराज के इलाकों में किस्तों के समय पर वितरण को सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं। प्रभाव: इन समीक्षाओं का उद्देश्य कार्यान्वयन में किसी भी कमी की पहचान करना और योजना की पहुंच को मजबूत करना है, यह सुनिश्चित करना कि इच्छित वित्तीय लाभ प्रभावी ढंग से जमीनी स्तर तक पहुंचे, जिससे ग्रामीण आर्थिक विकास और किसान समृद्धि में योगदान मिले।
आरबीआई की द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर अपरिवर्तित
2026-06-18
पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने और आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा करता है। इन समीक्षाओं में रेपो दर जैसी प्रमुख ब्याज दरों पर निर्णय शामिल होते हैं। वर्तमान संदर्भ: 18 जून, 2026 को अपनी नवीनतम समीक्षा में, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने वैश्विक अनिश्चितताओं और विकास के साथ मुद्रास्फीति नियंत्रण को संतुलित करने की आवश्यकता का हवाला देते हुए रेपो दर को 6.5% पर बनाए रखने का फैसला किया। एमपीसी ने वित्त वर्ष 27 की तीसरी तिमाही के लिए अपनी मुद्रास्फीति के अनुमान को भी थोड़ा ऊपर संशोधित किया। प्रभाव: यह निर्णय एक सतर्क दृष्टिकोण का संकेत देता है, जो उधारकर्ताओं और निवेशकों के लिए स्थिरता प्रदान करता है। बैंक संभवतः वर्तमान उधार दरों को बनाए रखेंगे, जिससे ऋण वृद्धि प्रभावित होगी। दीर्घकालिक वित्तीय क्षेत्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण, उभरती आर्थिक रिकवरी का समर्थन करते हुए मुद्रास्फीति की उम्मीदों को स्थिर रखने पर ध्यान केंद्रित है।
एनपीसीआई ने ग्रामीण डिजिटल वित्तीय समावेशन के लिए 'भारतपे' लॉन्च किया
2026-06-18
पृष्ठभूमि: भारत ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल वित्तीय समावेशन को आक्रामक रूप से बढ़ावा दे रहा है, ताकि अधिक लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में लाया जा सके। यूपीआई जैसे मौजूदा प्लेटफॉर्म को जबरदस्त सफलता मिली है। वर्तमान संदर्भ: नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सहयोग से, विशेष रूप से ग्रामीण भारत के लिए डिज़ाइन किया गया एक नया एकीकृत डिजिटल भुगतान मंच 'भारतपे' लॉन्च किया है। यह यूपीआई, एईपीएस और माइक्रो-एटीएम सेवाओं को एकीकृत करता है, जो सरलीकृत ऑफ़लाइन लेनदेन क्षमताएं और बहुभाषी समर्थन प्रदान करता है। प्रभाव: 'भारतपे' से दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल लेनदेन को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलने, नकदी पर निर्भरता कम होने और वित्तीय साक्षरता बढ़ने की उम्मीद है। यह छोटे व्यापारियों और किसानों को सशक्त करेगा, आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा और वित्तीय समावेशन को गहरा करेगा, जिससे समग्र डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा।
आरबीआई ने हरित वित्त के लिए नया नियामक ढांचा जारी किया
2026-06-18
पृष्ठभूमि: विश्व स्तर पर, केंद्रीय बैंक जलवायु-संबंधी वित्तीय जोखिमों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और स्थायी वित्त को बढ़ावा दे रहे हैं। भारत के वित्तीय क्षेत्र को हरित परियोजनाओं में निवेश को बढ़ावा देने के लिए मजबूत ढांचे की आवश्यकता है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 'हरित वित्त' के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा जारी किया है, जिसमें बैंकों और एनबीएफसी को जलवायु-संबंधी वित्तीय जोखिमों का आकलन और रिपोर्टिंग करने के लिए विशिष्ट नीतियां विकसित करने का निर्देश दिया गया है। यह पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ परियोजनाओं के लिए ऋण देने हेतु प्रोत्साहन भी पेश करता है और हरित पोर्टफोलियो के लिए प्रकटीकरण आवश्यकताओं को रेखांकित करता है। प्रभाव: यह कदम हरित पहलों की ओर पूंजी के प्रवाह को गति देगा, भारत के जलवायु लक्ष्यों और कम कार्बन अर्थव्यवस्था में संक्रमण का समर्थन करेगा। यह जलवायु जोखिमों के खिलाफ वित्तीय प्रणाली के लचीलेपन को भी बढ़ाएगा, बैंकिंग क्षेत्र में जिम्मेदार ऋण और निवेश प्रथाओं को प्रोत्साहित करेगा।
Home Exams Jobs Current Affairs Mock Tests