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राष्ट्रीय मामले: भारत में एआई नीति और न्यायिक सुधार (जून 2026)

सरकार ने राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति (NPAI) का पूर्ण पैमाने पर कार्यान्वयन शुरू किया
2026-06-07
पृष्ठभूमि: भारत ने आर्थिक विकास और सामाजिक उन्नति के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की परिवर्तनकारी क्षमता को लंबे समय से पहचाना है, जिसके परिणामस्वरूप एक व्यापक राष्ट्रीय एआई नीति (NPAI) का निर्माण हुआ। वर्तमान संदर्भ: केंद्र सरकार ने NPAI के पूर्ण पैमाने पर कार्यान्वयन की घोषणा की है, जिसमें नैतिक एआई ढांचे स्थापित करने, एआई अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने तथा स्वास्थ्य सेवा और कृषि जैसे प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्रों में एआई समाधानों को एकीकृत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह चरण कौशल विकास और एक मजबूत एआई पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर जोर देता है। प्रभाव: इस कदम से एआई नवाचार में भारत की वैश्विक स्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि होने, उन्नत प्रौद्योगिकियों में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलने और सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार होने की उम्मीद है, जिससे देश भर में समावेशी और जिम्मेदार एआई को अपनाया जा सकेगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों में त्वरित न्यायिक सुधारों के लिए निर्देश जारी किए
2026-06-07
पृष्ठभूमि: भारतीय न्याय प्रणाली लगातार मामलों के बैकलॉग और देरी से संबंधित चुनौतियों का सामना कर रही है, जिससे लाखों लोगों के लिए न्याय तक पहुंच प्रभावित हो रही है। आधुनिकीकरण और दक्षता के प्रयास जारी हैं। वर्तमान संदर्भ: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों को व्यापक न्यायिक सुधारों के लिए एक रोडमैप की रूपरेखा तैयार करते हुए निर्देशों का एक ऐतिहासिक सेट जारी किया है। इन निर्देशों में ई-अदालतों को अनिवार्य रूप से अपनाना, वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) तंत्र को बढ़ावा देना और दक्षता बढ़ाने के लिए न्यायिक रिक्तियों को भरने के लिए सख्त समय-सीमा शामिल है। प्रभाव: इस महत्वपूर्ण हस्तक्षेप का उद्देश्य मामलों के लंबितपन को नाटकीय रूप से कम करना, न्याय की गति और पहुंच में सुधार करना और न्यायपालिका में जनता के विश्वास को मजबूत करना है, जिससे देश भर में एक अधिक कुशल और पारदर्शी कानूनी प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा।
वैश्विक जलवायु वित्त शिखर सम्मेलन में नई प्रतिज्ञाएँ
2026-06-07
पृष्ठभूमि: जलवायु परिवर्तन की तात्कालिकता ने विकासशील देशों को शमन और अनुकूलन प्रयासों में सहायता के लिए विकसित राष्ट्रों से पर्याप्त वित्तीय प्रतिबद्धताओं की आवश्यकता को लगातार उजागर किया है, जो पेरिस समझौते का एक मुख्य सिद्धांत है। वर्तमान संदर्भ: पेरिस में हाल ही में संपन्न हुए एक महत्वपूर्ण वैश्विक जलवायु वित्त शिखर सम्मेलन में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से महत्वपूर्ण नई प्रतिज्ञाएँ देखी गईं। ये प्रतिबद्धताएँ विशेष रूप से जलवायु लचीलेपन को मजबूत करने, हरित ऊर्जा संक्रमण को सुविधाजनक बनाने और कमजोर राष्ट्रों में नुकसान व क्षति को संबोधित करने के लिए निर्धारित हैं, जिसका उद्देश्य लगातार फंडिंग अंतर को पाटना है। प्रभाव: इन नए वित्तीय निवेशों से विशेष रूप से अफ्रीका और छोटे द्वीप विकासशील राज्यों में महत्वपूर्ण जलवायु कार्रवाई परियोजनाओं में तेजी आने की उम्मीद है। यह नवीनीकृत अंतर्राष्ट्रीय सहयोग वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और दुनिया भर में सतत विकास मार्गों को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है, जो भविष्य की जलवायु वार्ताओं के लिए एक मिसाल कायम करेगा।
भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी वार्ता ने एफटीए वार्ता को आगे बढ़ाया
2026-06-07
पृष्ठभूमि: भारत और यूरोपीय संघ व्यापार, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा सहयोग के विस्तार पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपनी रणनीतिक साझेदारी को लगातार मजबूत कर रहे हैं। इस सहयोग का उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना और विकसित हो रहे भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखना है। वर्तमान संदर्भ: वार्षिक भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी वार्ता हाल ही में ब्रुसेल्स में आयोजित की गई। प्रमुख चर्चाएँ महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए वार्ताओं में तेजी लाने, महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त प्रयासों के समन्वय पर केंद्रित थीं। प्रभाव: एफटीए का सफल और समय पर समापन द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा और निवेश प्रवाह को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देने की उम्मीद है। इसके अलावा, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा में गहरा सहयोग भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करेगा और यूरोपीय संघ की भू-राजनीतिक स्थिति को बढ़ाएगा, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और पारस्परिक आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा।
RBI ने वित्तीय वर्ष 25 के लिए GDP विकास अनुमान 7% पर बरकरार रखा
2026-06-07
पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) आर्थिक विकास का पूर्वानुमान लगाने के लिए नियमित रूप से मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतकों की समीक्षा करता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) के लिए, केंद्रीय बैंक ने शुरू में मजबूत घरेलू मांग और सुधरती वैश्विक स्थितियों के आधार पर 7% की GDP वृद्धि का अनुमान लगाया था। वर्तमान संदर्भ: अपने नवीनतम मौद्रिक नीति वक्तव्य में, RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने वित्तीय वर्ष 25 के लिए GDP विकास अनुमान को अपरिवर्तित 7% पर बनाए रखने का निर्णय लिया है। यह अनुमान मजबूत घरेलू खपत और निवेश द्वारा समर्थित भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन में विश्वास को दर्शाता है। प्रभाव: विकास अनुमान को बनाए रखने से व्यवसायों और निवेशकों के लिए एक स्थिर दृष्टिकोण मिलता है, जो निरंतर निवेश और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करता है। यह दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक निरंतर आर्थिक विस्तार की उम्मीद करता है, जो रोजगार सृजन और समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
RBI ने वित्तीय वर्ष 25 में मुद्रास्फीति के 4.5% तक कम होने का अनुमान लगाया
2026-06-07
पृष्ठभूमि: मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना RBI की मौद्रिक नीति का प्राथमिक उद्देश्य है। केंद्रीय बैंक मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने और सतत आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए मुद्रास्फीति को एक निर्दिष्ट सीमा के भीतर, आमतौर पर लगभग 4% पर रखने का लक्ष्य रखता है। वित्तीय वर्ष 24 में मुद्रास्फीति में कुछ अस्थिरता देखी गई थी। वर्तमान संदर्भ: RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अनुमान लगाया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) द्वारा मापी गई मुद्रास्फीति के वित्तीय वर्ष 25 में 4.5% तक कम होने की संभावना है। यह अनुमान सामान्य मानसून के मौसम, स्थिर खाद्य कीमतों और मौद्रिक नीति उपायों के प्रभाव की अपेक्षाओं पर आधारित है। प्रभाव: 4.5% तक मुद्रास्फीति में अनुमानित गिरावट सकारात्मक है क्योंकि यह उपभोक्ताओं पर बोझ कम करती है, क्रय शक्ति बढ़ाती है, और निवेश के लिए अधिक अनुकूल वातावरण बनाती है। यह RBI को अपनी मौद्रिक नीति निर्णयों में अधिक लचीलापन भी प्रदान करता है।
मौद्रिक नीति समिति ने रेपो दर को 6.5% पर बरकरार रखा
2026-06-07
पृष्ठभूमि: रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को धन उधार देता है। यह अर्थव्यवस्था में तरलता का प्रबंधन करने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए MPC द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक प्रमुख उपकरण है। फरवरी 2023 से रेपो दर 6.5% पर बनी हुई है। वर्तमान संदर्भ: मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। समिति ने 5-1 के बहुमत से 'वापसी की व्यवस्था' (withdrawal of accommodation) मौद्रिक नीति रुख को जारी रखने के लिए मतदान किया, जिसमें विकास का समर्थन करते हुए मुद्रास्फीति को लक्ष्य के अनुरूप सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। प्रभाव: रेपो दर को 6.5% पर स्थिर रखने से पता चलता है कि वर्तमान मौद्रिक नीति रुख को मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन के लिए उपयुक्त माना जाता है। यह व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए उधार लागत में निरंतरता प्रदान करता है, जो संभावित रूप से निरंतर आर्थिक गतिविधियों का समर्थन करता है।
इसरो का अगली पीढ़ी का NavIC उपग्रह समूह
2026-06-07
पृष्ठभूमि: भारत की स्वदेशी नेविगेशन उपग्रह प्रणाली, NavIC (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन), में वर्तमान में सात उपग्रह हैं। यह भारतीय उपमहाद्वीप और इसकी सीमाओं से 1500 किमी तक फैले क्षेत्र के भीतर सटीक स्थिति, नेविगेशन और समय सेवाएं प्रदान करती है। वर्तमान संदर्भ: इसरो NavIC उपग्रहों की एक नई पीढ़ी लॉन्च करने की योजना बना रहा है, जो वर्तमान उपग्रहों की तुलना में अधिक उन्नत और सक्षम होंगे। इन अगली पीढ़ी के उपग्रहों से NavIC प्रणाली की सटीकता, कवरेज और मजबूती में सुधार होने की उम्मीद है, जिसमें बेहतर प्रदर्शन के लिए अंतर-उपग्रह लिंक भी शामिल हो सकते हैं। प्रभाव: उन्नत NavIC तारामंडल नेविगेशन प्रौद्योगिकी में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा, जिससे जीपीएस जैसी विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम होगी। यह नागरिक अनुप्रयोगों, आपदा प्रबंधन और रणनीतिक उद्देश्यों के लिए बेहतर सेवाएं प्रदान करेगा, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी संप्रभुता को बढ़ावा मिलेगा।
भारत का एआई मिशन: अनुसंधान और विकास पर ध्यान
2026-06-07
पृष्ठभूमि: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एक तेजी से विकसित होने वाला क्षेत्र है जिसमें विभिन्न क्षेत्रों को बदलने की क्षमता है। भारत ने एआई के महत्व को पहचाना है और इस क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: सरकार राष्ट्रीय एआई मिशन पर अपने ध्यान को तेज कर रही है, जिसमें मजबूत अनुसंधान और विकास पहलों पर जोर दिया जा रहा है। इसमें एआई नवाचार को गति देने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग और सरकारी अनुसंधान प्रयोगशालाओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है। स्वास्थ्य सेवा, कृषि, स्मार्ट शहरों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एआई प्रमुख फोकस क्षेत्र हैं, जिसका उद्देश्य नैतिक और जिम्मेदार एआई समाधान विकसित करना है। प्रभाव: एआई आर एंड डी में एक मजबूत प्रयास भारत को एआई तकनीक में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करेगा। इससे भारतीय जरूरतों के अनुरूप स्वदेशी एआई समाधानों का निर्माण होगा, नए उद्योगों और रोजगार सृजन के माध्यम से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, और सार्वजनिक सेवाओं की दक्षता और प्रभावशीलता में वृद्धि होगी।
उन्नत क्वांटम कंप्यूटिंग क्षमताओं का विकास
2026-06-07
पृष्ठभूमि: क्वांटम कंप्यूटिंग कंप्यूटेशन में एक प्रतिमान बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है, जो सबसे शक्तिशाली शास्त्रीय सुपर कंप्यूटरों के लिए भी अनसुलझे समस्याओं को हल करने का वादा करती है। भारत क्वांटम प्रौद्योगिकियों से संबंधित अनुसंधान में निवेश कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: भारत अपनी क्वांटम कंप्यूटिंग क्षमताओं के विकास को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा है, जिसमें स्वदेशी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें अनुसंधान संस्थानों में महत्वपूर्ण निवेश और क्वांटम एल्गोरिदम, त्रुटि सुधार और स्थिर क्यूबिट्स के विकास का पता लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ सहयोग शामिल है। इसका उद्देश्य देश के भीतर एक क्वांटम पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। प्रभाव: उन्नत क्वांटम कंप्यूटिंग क्षमताओं को प्राप्त करने से भारत को दवा खोज, सामग्री विज्ञान, क्रिप्टोग्राफी और जटिल सिमुलेशन जैसे क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक लाभ मिलेगा। यह अत्यधिक कुशल पेशेवरों की एक नई पीढ़ी को भी बढ़ावा देगा और कई वैज्ञानिक और तकनीकी डोमेन में नवाचार को बढ़ावा देगा।
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