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कला और संस्कृति करेंट अफेयर्स: जीआई टैग और अजंता भित्तिचित्र

कच्छी रोगन कला को जीआई टैग
2026-05-21
पृष्ठभूमि: रोगन कला गुजरात के कच्छ क्षेत्र की एक प्राचीन वस्त्र चित्रकला शिल्प है, जिसमें अरंडी के तेल से बने गाढ़े रंग का उपयोग करके जटिल पैटर्न बनाए जाते हैं। यह अनूठी कला, जिसे पारंपरिक रूप से कुछ ही परिवार अभ्यास करते हैं, हाल के दशकों में पहचान और बाजार पहुंच की कमी के कारण गिरावट का सामना कर रही थी। वर्तमान संदर्भ: 20 मई, 2026 को, भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री ने 'कच्छी रोगन कला' को प्रतिष्ठित जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग प्रदान किया। संस्कृति मंत्रालय द्वारा समर्थित यह महत्वपूर्ण कदम, इस उत्कृष्ट शिल्प से जुड़े पारंपरिक ज्ञान और अनूठी पहचान को सुरक्षित रखने का लक्ष्य रखता है। प्रभाव: जीआई टैग अनधिकृत उपयोग के खिलाफ कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा, प्रामाणिकता और गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा। इससे शेष कारीगर परिवारों की आजीविका को बढ़ावा मिलने, कला के बाजार मूल्य में वृद्धि होने और इसकी वैश्विक पहचान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे इसके दीर्घकालिक संरक्षण और सांस्कृतिक पुनरुद्धार में योगदान मिलेगा।
भारतीय एथलेटिक्स दल वैश्विक ट्रैक मीट के लिए तैयार
2026-05-21
पृष्ठभूमि: भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (AFI) जमीनी स्तर के विकास और विशेष प्रशिक्षण शिविरों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 में, भारतीय एथलेटिक्स टीम आगामी ग्लोबल ट्रैक मीट के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रही है। एथलीट सहनशक्ति और गति में सुधार के लिए उच्च ऊंचाई वाले केंद्रों में प्रशिक्षण ले रहे हैं। हाल के घरेलू ट्रायल में कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटे हैं, जो खिलाड़ियों के बेहतरीन शारीरिक फॉर्म को दर्शाते हैं। प्रभाव: इस कठोर प्रशिक्षण से वैश्विक स्तर पर पदक तालिका में सुधार की उम्मीद है, जो उत्कृष्टता की संस्कृति को बढ़ावा देगा।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन ओपन में ऐतिहासिक जीत दर्ज की
2026-05-21
पृष्ठभूमि: पिछले एक दशक में भारतीय बैडमिंटन की वैश्विक रैंकिंग में काफी सुधार हुआ है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 तक, भारतीय शटलरों ने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन ओपन में कई पदक जीते हैं, जो उनके असाधारण रणनीतिक खेल को दर्शाता है। इस टूर्नामेंट में दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी शामिल थे, जिसने भारतीय दल के कौशल की परीक्षा ली। प्रभाव: यह प्रदर्शन बीडब्ल्यूएफ विश्व रैंकिंग में भारत की स्थिति को मजबूत करता है और आगामी विश्व चैंपियनशिप से पहले खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाता है, जिससे उभरती प्रतिभाओं को बेहतर सीडिंग और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलती है।
डॉ. आलोक वर्मा को शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया
2026-05-21
पृष्ठभूमि: विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार भारत का सर्वोच्च बहु-विषयक विज्ञान पुरस्कार है, जो वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है। यह विभिन्न वैज्ञानिक विषयों में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देता है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक डॉ. आलोक वर्मा को इंजीनियरिंग विज्ञान श्रेणी में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। सतत ऊर्जा समाधानों, विशेष रूप से कुशल सौर सेल प्रौद्योगिकी में उन्नत सामग्रियों पर उनके अग्रणी शोध को उजागर किया गया। पुरस्कार समारोह इस वर्ष के अंत में निर्धारित है। प्रभाव: यह सम्मान डॉ. वर्मा के महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदान को स्वीकार करता है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आगे के शोध को प्रेरणा मिलती है। यह वैज्ञानिक उत्कृष्टता और नवाचार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है, युवा वैज्ञानिकों को प्रभावशाली अनुसंधान करने के लिए प्रेरित करता है।
डॉ. प्रिया शर्मा ने जीता अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार 2026
2026-05-21
पृष्ठभूमि: अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विश्व के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कारों में से एक है, जो उत्कृष्ट अनुवादित कथा साहित्य को मान्यता देता है। इसका उद्देश्य विश्व साहित्य को बढ़ावा देना और अंतर्राष्ट्रीय लेखकों को व्यापक अंग्रेजी भाषी दर्शकों तक पहुंचाना है। वर्तमान संदर्भ: प्रसिद्ध भारतीय लेखिका डॉ. प्रिया शर्मा को उनके समीक्षकों द्वारा प्रशंसित उपन्यास 'इकोज़ ऑफ द गंगा' के लिए अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है, जिसका हिंदी से अनुवाद सुश्री अंजलि सिंह ने किया है। यह घोषणा 20 मई 2026 को लंदन में की गई। प्रभाव: यह सम्मान वैश्विक मंच पर भारतीय साहित्य को महत्वपूर्ण रूप से ऊपर उठाता है, अधिक अनुवादों और अंतर्राष्ट्रीय पाठकों को प्रोत्साहित करता है। यह महत्वाकांक्षी भारतीय लेखकों और अनुवादकों को भी प्रेरित करता है, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान और विविध आख्यानों के प्रति सराहना बढ़ती है।
आर्द्रभूमि बहाली के लिए राष्ट्रीय रणनीति
2026-05-21
पृष्ठभूमि: आर्द्रभूमि जल शोधन और बाढ़ शमन के लिए महत्वपूर्ण हैं, फिर भी वे शहरीकरण के कारण गंभीर गिरावट का सामना कर रहे हैं। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मई 2026 में राष्ट्रीय आर्द्रभूमि बहाली कार्यक्रम का एक नया चरण शुरू किया है। यह चरण प्रकृति-आधारित समाधानों के माध्यम से शहरी आर्द्रभूमि के कायाकल्प पर केंद्रित है। प्रभाव: इन पारिस्थितिक बफ़र्स को बहाल करके, यह पहल शहरी जलवायु लचीलापन और भूजल पुनर्भरण को बढ़ाने का लक्ष्य रखती है। यह वैज्ञानिक निगरानी को स्थानीय सामुदायिक भागीदारी के साथ एकीकृत करती है, जिससे बढ़ते वैश्विक तापमान के बीच इन महत्वपूर्ण आवासों का दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुनिश्चित होता है।
नई जैव विविधता विरासत स्थल अधिसूचना
2026-05-21
पृष्ठभूमि: जैविक विविधता अधिनियम, 2002 राज्य सरकारों को जैव विविधता महत्व के क्षेत्रों को जैव विविधता विरासत स्थल (BHS) के रूप में अधिसूचित करने का अधिकार देता है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 में, सरकार ने दुर्लभ स्थानिक वनस्पतियों और जीवों की रक्षा के लिए एक नए क्षेत्र को BHS के रूप में नामित किया है। इसका उद्देश्य अद्वितीय पारिस्थितिक तंत्र को औद्योगिक अतिक्रमण से बचाना है। प्रभाव: यह अधिसूचना समुदाय-नेतृत्व वाले संरक्षण प्रयासों को सुनिश्चित करती है, जिससे स्थानीय निकायों को प्राकृतिक संसाधनों का स्थायी प्रबंधन करने का अधिकार मिलता है। यह 2030 तक 30% भूमि की रक्षा के लिए कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
DRDO ने उन्नत तटीय निगरानी रडार प्रणाली का अनावरण किया
2026-05-21
पृष्ठभूमि: भारत की विशाल तटरेखा को समुद्री खतरों, जिसमें घुसपैठ, तस्करी और अवैध मछली पकड़ना शामिल है, का मुकाबला करने के लिए मजबूत निगरानी क्षमताओं की आवश्यकता है। DRDO राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाने के लिए स्वदेशी समाधान विकसित करने पर लगातार काम कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने अपनी नई पीढ़ी के उन्नत तटीय निगरानी रडार (ACSR) प्रणाली का सफलतापूर्वक अनावरण किया है और इसके परीक्षण शुरू कर दिए हैं। यह अत्याधुनिक रडार, AI-संचालित विश्लेषण से लैस, भारत के तटों के साथ समुद्री गतिविधियों की निगरानी के लिए बढ़ी हुई पहचान सीमा और सटीकता का वादा करता है। प्रभाव: ACSR की तैनाती भारत के तटीय रक्षा बुनियादी ढांचे को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेगी, वास्तविक समय की खुफिया जानकारी प्रदान करेगी और उभरती समुद्री चुनौतियों के खिलाफ प्रतिक्रिया क्षमताओं में सुधार करेगी। यह महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है और नौसेना सुरक्षा को मजबूत करता है।
संयुक्त सैन्य अभ्यास 'धर्म गार्जियन' राजस्थान में संपन्न
2026-05-21
पृष्ठभूमि: भारत नियमित रूप से मित्र देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास करता है ताकि आतंकवाद विरोधी और पारंपरिक युद्ध में अंतर-संचालनीयता और सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ाया जा सके। ये अभ्यास द्विपक्षीय रक्षा संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान संदर्भ: भारतीय सेना और जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास 'धर्म गार्जियन' का 8वां संस्करण राजस्थान में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अभ्यास में सामरिक अभ्यास, विशेष हेलीबोर्न संचालन और शहरी युद्ध परिदृश्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें दोनों पक्षों के महत्वपूर्ण दल शामिल थे। प्रभाव: यह अभ्यास भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देता है, जटिल परिचालन वातावरण में अधिक समझ और समन्वय को बढ़ावा देता है। यह क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और हिंद-प्रशांत में एक शुद्ध सुरक्षा प्रदाता के रूप में उसकी भूमिका को भी मजबूत करता है।
भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा उष्णकटिबंधीय रोगों के लिए एआई-संचालित दवा खोज में सफलता
2026-05-21
पृष्ठभूमि: उष्णकटिबंधीय रोग, विशेष रूप से विकासशील देशों में, एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बने हुए हैं। पारंपरिक दवा खोज अक्सर एक समय लेने वाली, महंगी और अक्षम प्रक्रिया होती है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) इसे गति देने की परिवर्तनकारी क्षमता प्रदान करती है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने एक प्रमुख दवा कंपनी के सहयोग से एक महत्वपूर्ण सफलता की घोषणा की। उन्होंने डेंगू और मलेरिया जैसे उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों के लिए नए दवा उम्मीदवारों की पहचान करने के लिए उन्नत एआई और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग किया। उनके एआई मॉडल ने लाखों यौगिकों की तेजी से जांच की, जिससे प्रीक्लिनिकल परीक्षणों के लिए कई आशाजनक अणुओं की पहचान हुई, जिससे प्रारंभिक खोज चरण काफी कम हो गया। प्रभाव: यह एआई-संचालित दृष्टिकोण दवा खोज में क्रांति ला सकता है, इसे तेज और अधिक लागत प्रभावी बना सकता है, खासकर उन बीमारियों के लिए जिनमें कम निवेश होता है। इसमें वंचित आबादी के लिए नए उपचार विकसित करने, वैश्विक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करने और भारत को एआई-संचालित बायोमेडिकल अनुसंधान में अग्रणी के रूप में स्थापित करने की अपार क्षमता है।
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