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भारत के राष्ट्रीय मामले: डिजिटल स्वास्थ्य और न्यायिक सुधार

सरकार ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के दूसरे चरण के विस्तार की घोषणा की
2026-05-21
पृष्ठभूमि: 2021 में शुरू किया गया आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM), जिसे पहले NDHM कहा जाता था, का उद्देश्य एक राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। इसके मुख्य घटकों में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते (ABHA), स्वास्थ्य पेशेवर रजिस्ट्री (HPR) और स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री (HFR) शामिल हैं। प्रारंभिक चरण ने मूलभूत डिजिटल अवसंरचना पर ध्यान केंद्रित किया। वर्तमान संदर्भ: 20 मई, 2026 को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने ABDM के दूसरे चरण की शुरुआत की घोषणा की, जिसका लक्ष्य निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और राज्य-विशिष्ट स्वास्थ्य पहलों के साथ गहरा एकीकरण करना है। यह चरण सभी स्वास्थ्य सेवाओं में अंतरसंचालनीयता, सुरक्षित डेटा विनिमय और रोगी सहमति प्रबंधन पर जोर देता है। प्रभाव: इस विस्तार से स्वास्थ्य सेवा पहुंच और दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होने, चिकित्सा त्रुटियों को कम करने और नागरिकों को उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड पर अधिक नियंत्रण प्रदान करने की उम्मीद है। यह बीमा दावों को सुव्यवस्थित करेगा और डेटा-संचालित नीति-निर्माण को सुविधाजनक बनाएगा, अंततः सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में आगे बढ़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों/विधायकों के खिलाफ मामलों के त्वरित निपटान के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए
2026-05-21
पृष्ठभूमि: संसद सदस्यों (सांसदों) और विधान सभा सदस्यों (विधायकों) के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का मुद्दा लंबे समय से चिंता का विषय रहा है, जो शासन और सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित करता है। विभिन्न न्यायिक हस्तक्षेपों ने पहले भी मुकदमों की धीमी गति को संबोधित करने की कोशिश की है। वर्तमान संदर्भ: 19 मई, 2026 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालयों और विशेष अदालतों को व्यापक निर्देश जारी किए, जिसमें वर्तमान और पूर्व विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों के त्वरित निपटान को अनिवार्य किया गया। न्यायालय ने गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों पर ध्यान केंद्रित करते हुए समर्पित पीठों और समयबद्ध कार्यक्रम स्थापित करने पर जोर दिया। प्रभाव: इस ऐतिहासिक फैसले से मामलों के बैकलॉग में उल्लेखनीय कमी आने, त्वरित न्याय सुनिश्चित करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं की अखंडता को बनाए रखने की उम्मीद है। यह सार्वजनिक प्रतिनिधियों के बीच अधिक जवाबदेही लाएगा और कानून के शासन को मजबूत करेगा, जिससे एक स्वच्छ राजनीतिक परिदृश्य को बढ़ावा मिलेगा।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार पर चर्चा तेज
2026-05-21
पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की मांग दशकों से चली आ रही है, जिसका उद्देश्य समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाना है। प्रमुख मांगों में स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यता का विस्तार शामिल है, विशेष रूप से भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान (G4) जैसे विकासशील देशों के लिए। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 में, संयुक्त राष्ट्र महासभा में चर्चाएँ तेज हो गईं। सदस्य देशों ने UNSC सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ताओं (IGN) के लिए एक ठोस समय-सीमा पर जोर दिया। अफ्रीका और एशिया से अधिक प्रतिनिधित्व, साथ ही वीटो शक्ति की समीक्षा पर सहमति बढ़ रही है। प्रभाव: सफल सुधार UNSC की वैधता और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में प्रभावशीलता को बढ़ा सकता है, इसे अधिक प्रतिनिधि और लोकतांत्रिक बना सकता है। विफलता बहुपक्षीय संस्थानों में विश्वास को कम कर सकती है।
आसियान-मर्कोसुर मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताओं में प्रगति
2026-05-21
पृष्ठभूमि: आसियान और मर्कोसुर ने लंबे समय से गहरे आर्थिक संबंधों की खोज की है। दोनों गुट महत्वपूर्ण उभरते बाजारों का प्रतिनिधित्व करते हैं, और एक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पर्याप्त व्यापार और निवेश के अवसर खोल सकता है, जिससे दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 में, आसियान और मर्कोसुर के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने मुलाकात की, जिसमें टैरिफ, सेवाओं और निवेश सहित प्रमुख अध्यायों पर महत्वपूर्ण प्रगति की सूचना दी गई। लक्ष्य 2027 की शुरुआत तक एक व्यापक FTA को अंतिम रूप देना है। प्रभाव: यह FTA सदस्य देशों के लिए व्यापार की मात्रा को बढ़ावा देगा, आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाएगा और आर्थिक लचीलेपन को बढ़ाएगा। यह भविष्य के अंतर-महाद्वीपीय व्यापार समझौतों के लिए एक मिसाल भी कायम कर सकता है।
आरबीआई ने तरलता प्रबंधन पर सतर्क रुख बरकरार रखा
2026-05-21
पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) विकास और मुद्रास्फीति के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रणालीगत तरलता का प्रबंधन करता है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 तक, आरबीआई ने खाद्य और ऊर्जा क्षेत्रों में लगातार मुद्रास्फीति के दबाव को दूर करने के लिए तटस्थ तरलता रुख बनाए रखने का निर्णय लिया है। केंद्रीय बैंक वैश्विक बाजार की अस्थिरता और घरेलू ऋण मांग पर बारीकी से नजर रख रहा है। प्रभाव: इस निर्णय का उद्देश्य ब्याज दरों को स्थिर करना है, जिससे व्यवसायों और व्यक्तियों के लिए ऋण लेने की लागत अनुमानित बनी रहे, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को समर्थन मिले।
कॉर्पोरेट ग्रीन बॉन्ड जारी करने में उछाल
2026-05-21
पृष्ठभूमि: ग्रीन बॉन्ड निश्चित आय वाले उपकरण हैं जिन्हें विशेष रूप से जलवायु और पर्यावरण परियोजनाओं का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 में, भारतीय निगमों ने नवीकरणीय ऊर्जा और टिकाऊ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निधि देने के लिए ग्रीन बॉन्ड जारी करने में काफी वृद्धि की है। यह बदलाव ईएसजी-अनुपालन वाली संपत्तियों के लिए वैश्विक निवेशक मांग और भारत में अनुकूल नियामक ढांचे द्वारा संचालित है। प्रभाव: हरित परियोजनाओं में पूंजी का बढ़ता प्रवाह भारत के नेट-जीरो अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण में तेजी लाएगा, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करेगा और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
इसरो ने उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-08 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया
2026-05-21
पृष्ठभूमि: भारत की अंतरिक्ष एजेंसी, इसरो, पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों के प्रक्षेपण में एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड रखती है, जो विभिन्न राष्ट्रीय आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये मिशन संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी और आपदा प्रतिक्रिया के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करते हैं। वर्तमान संदर्भ: इसरो ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 'EOS-08' नामक उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। उन्नत हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग और सिंथेटिक अपर्चर रडार से लैस, EOS-08 कृषि मूल्यांकन, शहरी नियोजन और पर्यावरणीय अध्ययनों के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा प्रदान करेगा। इस मिशन में एक उन्नत जीएसएलवी एमके-III संस्करण का उपयोग किया गया, जो भारत की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है। प्रभाव: EOS-08 भारत की रिमोट सेंसिंग क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है, जो जलवायु मॉडलिंग, आपदा पूर्वानुमान और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के लिए अधिक सटीक डेटा प्रदान करता है। यह सतत विकास के लिए सूचित निर्णय लेने में नीति निर्माताओं को सशक्त करेगा और वैश्विक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत के नेतृत्व को मजबूत करेगा।
भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा उष्णकटिबंधीय रोगों के लिए एआई-संचालित दवा खोज में सफलता
2026-05-21
पृष्ठभूमि: उष्णकटिबंधीय रोग, विशेष रूप से विकासशील देशों में, एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बने हुए हैं। पारंपरिक दवा खोज अक्सर एक समय लेने वाली, महंगी और अक्षम प्रक्रिया होती है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) इसे गति देने की परिवर्तनकारी क्षमता प्रदान करती है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने एक प्रमुख दवा कंपनी के सहयोग से एक महत्वपूर्ण सफलता की घोषणा की। उन्होंने डेंगू और मलेरिया जैसे उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों के लिए नए दवा उम्मीदवारों की पहचान करने के लिए उन्नत एआई और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग किया। उनके एआई मॉडल ने लाखों यौगिकों की तेजी से जांच की, जिससे प्रीक्लिनिकल परीक्षणों के लिए कई आशाजनक अणुओं की पहचान हुई, जिससे प्रारंभिक खोज चरण काफी कम हो गया। प्रभाव: यह एआई-संचालित दृष्टिकोण दवा खोज में क्रांति ला सकता है, इसे तेज और अधिक लागत प्रभावी बना सकता है, खासकर उन बीमारियों के लिए जिनमें कम निवेश होता है। इसमें वंचित आबादी के लिए नए उपचार विकसित करने, वैश्विक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करने और भारत को एआई-संचालित बायोमेडिकल अनुसंधान में अग्रणी के रूप में स्थापित करने की अपार क्षमता है।
संयुक्त सैन्य अभ्यास 'धर्म गार्जियन' राजस्थान में संपन्न
2026-05-21
पृष्ठभूमि: भारत नियमित रूप से मित्र देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास करता है ताकि आतंकवाद विरोधी और पारंपरिक युद्ध में अंतर-संचालनीयता और सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ाया जा सके। ये अभ्यास द्विपक्षीय रक्षा संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान संदर्भ: भारतीय सेना और जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास 'धर्म गार्जियन' का 8वां संस्करण राजस्थान में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अभ्यास में सामरिक अभ्यास, विशेष हेलीबोर्न संचालन और शहरी युद्ध परिदृश्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें दोनों पक्षों के महत्वपूर्ण दल शामिल थे। प्रभाव: यह अभ्यास भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देता है, जटिल परिचालन वातावरण में अधिक समझ और समन्वय को बढ़ावा देता है। यह क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और हिंद-प्रशांत में एक शुद्ध सुरक्षा प्रदाता के रूप में उसकी भूमिका को भी मजबूत करता है।
DRDO ने उन्नत तटीय निगरानी रडार प्रणाली का अनावरण किया
2026-05-21
पृष्ठभूमि: भारत की विशाल तटरेखा को समुद्री खतरों, जिसमें घुसपैठ, तस्करी और अवैध मछली पकड़ना शामिल है, का मुकाबला करने के लिए मजबूत निगरानी क्षमताओं की आवश्यकता है। DRDO राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाने के लिए स्वदेशी समाधान विकसित करने पर लगातार काम कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने अपनी नई पीढ़ी के उन्नत तटीय निगरानी रडार (ACSR) प्रणाली का सफलतापूर्वक अनावरण किया है और इसके परीक्षण शुरू कर दिए हैं। यह अत्याधुनिक रडार, AI-संचालित विश्लेषण से लैस, भारत के तटों के साथ समुद्री गतिविधियों की निगरानी के लिए बढ़ी हुई पहचान सीमा और सटीकता का वादा करता है। प्रभाव: ACSR की तैनाती भारत के तटीय रक्षा बुनियादी ढांचे को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेगी, वास्तविक समय की खुफिया जानकारी प्रदान करेगी और उभरती समुद्री चुनौतियों के खिलाफ प्रतिक्रिया क्षमताओं में सुधार करेगी। यह महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है और नौसेना सुरक्षा को मजबूत करता है।
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