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पर्यावरण और पारिस्थितिकी समाचार: जलवायु, जैव विविधता, वन्यजीव और संरक्षण

जलवायु लचीलापन और अनुकूलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता
2026-05-18
पृष्ठभूमि: भारत ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए जलवायु लचीलापन और अनुकूलन उपायों की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया है। देश चरम मौसम की घटनाओं और बढ़ते समुद्र स्तर के प्रति संवेदनशील है। वर्तमान संदर्भ: हालिया रिपोर्टें कृषि, जल प्रबंधन और तटीय सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में अनुकूलन रणनीतियों को विकसित करने और लागू करने में भारत के चल रहे प्रयासों पर प्रकाश डालती हैं। जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) और इसके संबद्ध मिशन इन पहलों का मार्गदर्शन करना जारी रखते हैं। प्रभाव: इन प्रयासों का उद्देश्य भारतीय समुदायों और पारिस्थितिक तंत्र की जलवायु परिवर्तन के प्रति भेद्यता को कम करना, अनुकूलन क्षमता को बढ़ाना और सतत विकास पथों को बढ़ावा देना है जो जलवायु झटकों के प्रति लचीले हैं।
जैव विविधता संरक्षण के लिए संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार
2026-05-18
पृष्ठभूमि: भारत वनस्पतियों और जीवों की समृद्ध विविधता वाला एक मेगाविविध देश है। पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए इन प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना महत्वपूर्ण है। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों और संरक्षण भंडारों सहित संरक्षित क्षेत्रों के नेटवर्क का विस्तार करने पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। हालिया प्रस्तावों और घोषणाओं में महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारों और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। प्रभाव: संरक्षित क्षेत्रों के विस्तार से लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आश्रय मिलेगा, आवास विखंडन को रोका जा सकेगा, और भारत की अनूठी जैव विविधता के दीर्घकालिक संरक्षण में योगदान मिलेगा, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का समर्थन होगा।
आर्द्रभूमि संरक्षण और रामसर स्थलों के लिए पहल
2026-05-18
पृष्ठभूमि: आर्द्रभूमियाँ महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र हैं जो जल शोधन, बाढ़ नियंत्रण और समृद्ध जैव विविधता का समर्थन करने सहित कई पारिस्थितिक और आर्थिक लाभ प्रदान करती हैं। भारत में आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र की एक महत्वपूर्ण संख्या है। वर्तमान संदर्भ: भारत रामसर स्थलों की बढ़ती संख्या से स्पष्ट रूप से आर्द्रभूमियों के संरक्षण के वैश्विक प्रयासों में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। सरकार राष्ट्रीय आर्द्रभूमि संरक्षण कार्यक्रम (NWCP) को लागू कर रही है और सामुदायिक-आधारित संरक्षण दृष्टिकोणों को बढ़ावा दे रही है। प्रभाव: इन संरक्षण प्रयासों का उद्देश्य आर्द्रभूमियों के पारिस्थितिक चरित्र की रक्षा और पुनर्स्थापना करना, उनकी जैव विविधता को बढ़ाना और स्थानीय समुदायों और पर्यावरण के लाभ के लिए आर्द्रभूमि संसाधनों के सतत उपयोग को सुनिश्चित करना है।
डॉ. प्रिया शर्मा को प्रतिष्ठित विज्ञान रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया
2026-05-18
पृष्ठभूमि: भारत राष्ट्रीय पुरस्कारों के माध्यम से वैज्ञानिक उत्कृष्टता को लगातार मान्यता देता है। "विज्ञान रत्न" विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उत्कृष्ट योगदान का सम्मान करने वाला एक प्रमुख पुरस्कार है, जो नवाचार को प्रोत्साहित करता है। वर्तमान संदर्भ: प्रसिद्ध खगोल भौतिक विज्ञानी डॉ. प्रिया शर्मा को 17 मई, 2026 को प्रतिष्ठित "विज्ञान रत्न" पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें एक्सोप्लैनेट और ब्लैक होल पर उनके अभूतपूर्व शोध के लिए सम्मानित किया गया, जिससे ब्रह्मांड की हमारी समझ में महत्वपूर्ण प्रगति हुई। प्रभाव: यह सम्मान डॉ. शर्मा की प्रतिभा और अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की बढ़ती क्षमताओं को रेखांकित करता है। इसका उद्देश्य युवा दिमागों, विशेषकर महिलाओं को, STEM करियर बनाने के लिए प्रेरित करना है, जिससे राष्ट्रीय अनुसंधान और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यावरण कार्यकर्ता रोहन मेहता को अंतर्राष्ट्रीय ग्लोबल पीस लॉरिएट पुरस्कार मिला
2026-05-18
पृष्ठभूमि: वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियाँ समर्पित प्रयासों की मांग करती हैं। अंतर्राष्ट्रीय निकाय अक्सर उन व्यक्तियों को मान्यता देते हैं जो अपने पर्यावरणीय कार्यों के माध्यम से शांति और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वर्तमान संदर्भ: भारतीय पर्यावरण कार्यकर्ता रोहन मेहता को 16 मई, 2026 को विश्व पर्यावरण परिषद द्वारा 2026 के लिए "ग्लोबल पीस लॉरिएट" से सम्मानित किया गया। उन्हें ग्रामीण भारत में स्थायी कृषि पद्धतियों और समुदाय-नेतृत्व वाले संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए उनके अथक कार्य के लिए सम्मानित किया गया। प्रभाव: यह अंतर्राष्ट्रीय मान्यता भारत के जमीनी स्तर के पर्यावरण आंदोलनों और जलवायु परिवर्तन से निपटने में स्थानीय समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालती है। इससे स्थायी पहलों के लिए समर्थन बढ़ने और वैश्विक पर्यावरणीय प्रबंधन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता मजबूत होने की उम्मीद है।
भारतीय एथलेटिक्स टीम ने रिले रेस में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया
2026-05-18
पृष्ठभूमि: भारतीय रिले टीम टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के तहत वैश्विक रैंकिंग में सुधार के लिए कठोर प्रशिक्षण ले रही है। वर्तमान संदर्भ: 17 मई 2026 को, पुरुष 4x400 मीटर रिले टीम ने इंटरनेशनल एथलेटिक्स मीट में रिकॉर्ड समय दर्ज करते हुए अपना पिछला राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पीछे छोड़ दिया। यह प्रदर्शन भारतीय ट्रैक और फील्ड इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। प्रभाव: यह उपलब्धि आगामी विश्व चैंपियनशिप से पहले भारतीय एथलीटों का मनोबल बढ़ाती है, जो वैश्विक स्प्रिंटिंग आयोजनों में भारत के उभरते हुए प्रभाव को दर्शाती है।
भारत ने एशियन बैडमिंटन मास्टर्स में जीत हासिल की
2026-05-18
पृष्ठभूमि: भारत में बैडमिंटन की लोकप्रियता बढ़ी है, जिसे बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) द्वारा जमीनी स्तर के विकास कार्यक्रमों के माध्यम से समर्थन मिला है। वर्तमान संदर्भ: 18 मई 2026 को आयोजित फाइनल में, भारतीय दल ने एशियन बैडमिंटन मास्टर्स में दो स्वर्ण पदक जीते, जिसमें असाधारण रणनीतिक खेल और सहनशक्ति का प्रदर्शन किया गया। यह जीत शीर्ष वरीयता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय विरोधियों के खिलाफ मिली, जो भारतीय टीम में प्रतिभा की गहराई को उजागर करती है। प्रभाव: यह जीत अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन सर्किट में भारत की स्थिति को मजबूत करती है और खेल बुनियादी ढांचे में निवेश को बढ़ावा देती है।
कच्छी रोगन कला को मिला प्रतिष्ठित जीआई टैग
2026-05-18
पृष्ठभूमि: कच्छ, गुजरात की रोगन कला एक अनूठी वस्त्र चित्रकला शिल्प है, जिसका समृद्ध इतिहास है। इसे पारंपरिक रूप से कुछ ही परिवार अरंडी के तेल-आधारित रंगों का उपयोग करके जटिल पैटर्न बनाते हैं। यह प्राचीन कला लुप्तप्राय कारीगरों और बाजार प्रतिस्पर्धा की चुनौतियों का सामना कर रही थी। वर्तमान संदर्भ: भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए, भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री ने 18 मई, 2026 को 'कच्छी रोगन कला' को आधिकारिक तौर पर जीआई टैग प्रदान किया। यह मान्यता स्थानीय कारीगर समुदायों और सांस्कृतिक निकायों के वर्षों के प्रयासों का परिणाम है। प्रभाव: जीआई टैग कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा, अनधिकृत उपयोग को रोकेगा और प्रामाणिकता सुनिश्चित करेगा। इससे कारीगरों की आर्थिक आजीविका को बढ़ावा मिलेगा, कला रूप की वैश्विक दृश्यता बढ़ेगी और गुजरात में सांस्कृतिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा।
ओडिशा के जाजपुर जिले में प्राचीन बौद्ध स्तूप की खोज
2026-05-18
पृष्ठभूमि: ओडिशा में समृद्ध बौद्ध विरासत है, जिसमें ललितगिरि, रत्नागिरि और उदयगिरि जैसे महत्वपूर्ण प्राचीन स्थल शामिल हैं। पुरातात्विक अन्वेषणों से अक्सर क्षेत्र के ऐतिहासिक धार्मिक परिदृश्य में नई अंतर्दृष्टि मिलती है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 17 मई, 2026 को ओडिशा के जाजपुर जिले में एक उल्लेखनीय रूप से अच्छी तरह से संरक्षित प्राचीन बौद्ध स्तूप और मठ परिसर की खोज की घोषणा की। प्रारंभिक आकलन से पता चलता है कि यह स्थल 7वीं-8वीं शताब्दी ईस्वी का है, जिसमें जटिल नक्काशी और संभवतः अवशेष शामिल हैं। प्रभाव: यह महत्वपूर्ण खोज भारत के बौद्ध पुरातात्विक मानचित्र को समृद्ध करती है, पूर्वी भारत में बौद्ध धर्म के प्रसार और विकास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है। इससे विद्वानों और पर्यटकों को आकर्षित होने की उम्मीद है, जिससे यह स्थल एक प्रमुख विरासत पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस 2026
2026-05-18
पृष्ठभूमि: अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस प्रतिवर्ष 18 मई को मनाया जाता है ताकि सांस्कृतिक आदान-प्रदान, संस्कृतियों के संवर्धन और लोगों के बीच आपसी समझ, सहयोग और शांति के विकास में संग्रहालयों की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया जा सके। इसकी स्थापना 1977 में अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय परिषद (ICOM) द्वारा की गई थी। वर्तमान संदर्भ: 2026 के लिए, विषय "नवाचार और डिजिटल परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में संग्रहालय" पर केंद्रित हो सकता है, इस बात पर जोर देते हुए कि संग्रहालय आगंतुकों के अनुभवों को बेहतर बनाने, विरासत को संरक्षित करने और दुनिया भर में विविध दर्शकों को जोड़ने के लिए नई तकनीकों को कैसे अपना रहे हैं। दुनिया भर में कार्यक्रम डिजिटल पहलों और अभिनव प्रदर्शनियों का प्रदर्शन करेंगे। प्रभाव: यह दिवस संग्रहालयों के साथ सार्वजनिक जुड़ाव को प्रोत्साहित करता है, सांस्कृतिक विरासत के प्रति सराहना को बढ़ावा देता है और शैक्षिक अवसरों को बढ़ावा देता है। यह संग्रहालयों के लिए समकालीन सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने और तेजी से बदलती दुनिया में अपनी प्रासंगिकता प्रदर्शित करने के लिए एक मंच के रूप में भी कार्य करता है।
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