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रक्षा और सुरक्षा अपडेट: वरुणास्त्र और अग्नि-पी परीक्षण (मई 2026)

डीआरडीओ ने अग्नि-पी मिसाइल का अंतिम उपयोगकर्ता परीक्षण पूरा किया
2026-05-13
पृष्ठभूमि: अग्नि-पी (प्राइम) 1,000 से 2,000 किमी की मारक क्षमता वाली नई पीढ़ी की कैनिस्टर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल है। वर्तमान संदर्भ: डीआरडीओ और भारतीय सेना ने 13 मई 2026 को अंतिम उपयोगकर्ता परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किए। एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किए गए उड़ान परीक्षण के दौरान मिसाइल ने उच्च सटीकता और विश्वसनीयता का प्रदर्शन किया। प्रभाव: अग्नि-पी का शामिल होना भारत की रणनीतिक निवारक क्षमता को काफी मजबूत करेगा। इसका कैनिस्टराइज्ड डिज़ाइन तेजी से तैनाती और भंडारण की अनुमति देता है, जिससे सशस्त्र बलों को अधिक परिचालन लचीलापन और बेहतर स्ट्राइक क्षमता मिलती है।
आक्रामक विदेशी प्रजातियां भारत की जैव विविधता के लिए खतरा
2026-05-13
पृष्ठभूमि: आक्रामक विदेशी प्रजातियां (IAS) गैर-देशी जीव हैं जो नए वातावरण में स्थापित हो जाते हैं, अक्सर देशी प्रजातियों को पछाड़ देते हैं और पारिस्थितिक तंत्र को बाधित करते हैं। उनका परिचय आकस्मिक या जानबूझकर हो सकता है, जिससे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक और आर्थिक क्षति होती है। वर्तमान संदर्भ: हाल के अध्ययनों और रिपोर्टों ने भारत की समृद्ध जैव विविधता के लिए IAS के बढ़ते खतरे को उजागर किया है। अफ्रीकी कैटफ़िश, पार्थेनियम खरपतवार और जलकुंभी जैसी प्रजातियां व्यापक पारिस्थितिक असंतुलन पैदा कर रही हैं, जो कृषि, मत्स्य पालन और प्राकृतिक आवासों को प्रभावित कर रही हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय इन आक्रामक खतरों की निगरानी और प्रबंधन के लिए रणनीतियों पर तेजी से ध्यान केंद्रित कर रहा है। प्रभाव: IAS के अनियंत्रित प्रसार से देशी प्रजातियों की आबादी में कमी, आवास संरचना में परिवर्तन और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं में व्यवधान होता है। यह संरक्षण प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती प्रस्तुत करता है और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर क्षेत्रों के लिए पर्याप्त आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
भारत में आक्रामक प्रजातियों की निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता
2026-05-13
पृष्ठभूमि: आक्रामक विदेशी प्रजातियों के प्रभावी प्रबंधन के लिए उनकी उपस्थिति का शीघ्र पता लगाने और उनके प्रसार का आकलन करने हेतु मजबूत निगरानी प्रणालियों की आवश्यकता होती है। प्रारंभिक पहचान समय पर हस्तक्षेप की अनुमति देती है, जो बड़े पैमाने पर उन्मूलन प्रयासों की तुलना में अक्सर अधिक लागत प्रभावी होती है। वर्तमान संदर्भ: विशेषज्ञ भारत भर में IAS की निगरानी के लिए अधिक सक्रिय और एकीकृत दृष्टिकोण का आह्वान कर रहे हैं। इसमें पारंपरिक फील्ड सर्वेक्षणों के साथ-साथ रिमोट सेंसिंग और नागरिक विज्ञान पहलों जैसी तकनीकों का लाभ उठाना शामिल है। इसका उद्देश्य आक्रामक प्रजातियों के वितरण और प्रभाव का एक व्यापक डेटाबेस बनाना है, जिससे बेहतर सूचित नीतिगत निर्णय और लक्षित नियंत्रण उपाय सक्षम हो सकें। प्रभाव: बेहतर निगरानी से नए आक्रमणों और संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों की त्वरित पहचान हो सकेगी। यह निवारक उपायों के कार्यान्वयन की अनुमति देगा, जैसे कि बंदरगाहों और सीमाओं पर सख्त जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल, और प्रकोपों को नियंत्रित करने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीमों का विकास, जिससे भारत की प्राकृतिक विरासत की रक्षा होगी।
आईएनएस त्रिकंद ने बहुराष्ट्रीय अभ्यास कटलस एक्सप्रेस 2026 में भाग लिया
2026-05-13
पृष्ठभूमि: भारतीय नौसेना नियमित रूप से अपनी परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने और मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री अभ्यासों में भाग लेती है। ये अभ्यास समुद्री क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान संदर्भ: भारतीय नौसेना के एक प्रमुख युद्धपोत आईएनएस त्रिकंद ने हाल ही में बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास 'कटलस एक्सप्रेस 2026' में भाग लिया है। यह अभ्यास पश्चिमी हिंद महासागर में आयोजित किया गया था और इसमें अमेरिका, ब्रिटेन और अफ्रीकी देशों सहित विभिन्न देशों के नौसैनिक बल शामिल थे। प्रभाव: कटलस एक्सप्रेस 2026 में आईएनएस त्रिकंद की भागीदारी का उद्देश्य अंतरसंचालनीयता को बढ़ाना, समुद्री डोमेन जागरूकता में सुधार करना और समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और तस्करी जैसे समुद्री खतरों का मुकाबला करने की सामूहिक क्षमता को मजबूत करना था। यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की शुद्ध सुरक्षा प्रदाता के रूप में भूमिका को मजबूत करता है।
भारत ने तीरंदाजी विश्व कप चरण 1 में स्वर्ण पदक जीता
2026-05-13
पृष्ठभूमि: तीरंदाजी विश्व कप वर्ल्ड आर्चरी द्वारा आयोजित एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सर्किट है। वर्तमान संदर्भ: शंघाई में आयोजित 2026 चरण 1 प्रतियोगिता में, भारतीय कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने एक रोमांचक फाइनल में शीर्ष वरीयता प्राप्त विरोधियों को हराकर ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता। टीम ने दबाव में असाधारण सटीकता और संयम का प्रदर्शन किया। प्रभाव: यह जीत विश्व तीरंदाजी रैंकिंग में भारत की स्थिति को काफी मजबूत करती है और आगामी एशियाई खेलों और ओलंपिक क्वालीफिकेशन चक्रों के लिए एक बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला कदम है, जो विश्व स्तर पर भारतीय तीरंदाजों के बढ़ते दबदबे को दर्शाता है।
नीरज चोपड़ा ने डायमंड लीग में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया
2026-05-13
पृष्ठभूमि: डायमंड लीग कुलीन ट्रैक और फील्ड एथलेटिक प्रतियोगिताओं की एक वार्षिक श्रृंखला है। वर्तमान संदर्भ: ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने नवीनतम डायमंड लीग मीट के दौरान भाला फेंक में एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है। उनका 89.94 मीटर का थ्रो उनके पिछले व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ से बेहतर था, जिसने उन्हें पोडियम पर शीर्ष स्थान दिलाया। उनका निरंतर प्रदर्शन उनके करियर की पहचान रहा है। प्रभाव: यह रिकॉर्ड तोड़ने वाला थ्रो एथलेटिक्स में एक वैश्विक आइकन के रूप में उनकी स्थिति को मजबूत करता है और अंतरराष्ट्रीय पोडियम फिनिश का लक्ष्य रखने वाले भारतीय एथलीटों के लिए एक उच्च बेंचमार्क स्थापित करता है।
कोणार्क सूर्य मंदिर परिसर के लिए प्रमुख जीर्णोद्धार परियोजना शुरू
2026-05-13
पृष्ठभूमि: ओडिशा में स्थित 13वीं सदी का कोणार्क सूर्य मंदिर, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, लंबे समय से संरचनात्मक चुनौतियों और पर्यावरणीय क्षरण का सामना कर रहा है, जिसके लिए निरंतर संरक्षण प्रयासों की आवश्यकता है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और संस्कृति मंत्रालय ने एक व्यापक, बहु-वर्षीय जीर्णोद्धार परियोजना शुरू की है। मई 2026 में शुरू हुआ यह चरण, आधुनिक संरक्षण तकनीकों और विशेषज्ञ सहयोग का लाभ उठाते हुए, उन्नत संरचनात्मक स्थिरीकरण, जटिल नक्काशी संरक्षण और जल निकासी प्रणाली में सुधार पर केंद्रित है। प्रभाव: यह महत्वपूर्ण पहल भारत की स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत के एक महत्वपूर्ण हिस्से की रक्षा करेगी, इसकी दीर्घायु बढ़ाएगी, ओडिशा में सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देगी और शोधकर्ताओं व भावी पीढ़ियों के लिए प्राचीन कलिंग वास्तुकला में अमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करेगी।
'कच्छ रोगन कला' को भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिला
2026-05-13
पृष्ठभूमि: रोगन कला, गुजरात के कच्छ जिले के नरोना गांव से उत्पन्न कपड़े पर चित्रकला का एक अनूठा और जटिल रूप है, जिसे 300 से अधिक वर्षों से एक ही परिवार द्वारा पारंपरिक रूप से अभ्यास किया जा रहा है, जिसमें अरंडी के तेल-आधारित पेंट का उपयोग होता है। वर्तमान संदर्भ: भौगोलिक संकेतकों के रजिस्ट्रार ने मई 2026 में 'कच्छ रोगन कला' को आधिकारिक तौर पर भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्रदान किया है। यह मान्यता स्थानीय कारीगरों और सांस्कृतिक निकायों द्वारा इसकी अनूठी विरासत और पारंपरिक शिल्प कौशल का दस्तावेजीकरण करने के व्यापक प्रयासों के बाद मिली है, जो इसे नकल से अलग करती है। प्रभाव: जीआई टैग इस दुर्लभ कला रूप को कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा, अनधिकृत उपयोग को रोकेगा और इसकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करेगा। यह कारीगर समुदाय की आर्थिक संभावनाओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा, कच्छ में सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देगा और भारत की समृद्ध शिल्प परंपराओं के संरक्षण व वैश्विक पहचान में योगदान देगा।
भारत-जापान सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं पर केंद्रित
2026-05-13
पृष्ठभूमि: भारत और जापान के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं, दोनों राष्ट्र पारंपरिक कलाओं को महत्व देते हैं। द्विपक्षीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों ने राजनयिक संबंधों को मजबूत करने और आपसी समझ को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 में, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने जापान फाउंडेशन के सहयोग से एक विशेष सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम शुरू किया। यह पहल भारतीय शास्त्रीय नृत्य (कथक, भरतनाट्यम) और जापानी पारंपरिक रंगमंच (नोह, काबुकी) जैसी पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं को कार्यशालाओं, संयुक्त प्रदर्शनों और दोनों देशों में कलाकार निवास के माध्यम से बढ़ावा देने पर केंद्रित है। प्रभाव: इस कार्यक्रम से सांस्कृतिक प्रशंसा गहरी होने, कलात्मक सहयोग को बढ़ावा मिलने और पारंपरिक कला रूपों के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान होने की उम्मीद है। यह भारत-जापान द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा, सांस्कृतिक कूटनीति को प्रोत्साहित करेगा और नई पीढ़ियों को अपनी समृद्ध कलात्मक विरासत से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगा।
अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस 2026: सतत विकास लक्ष्यों पर ध्यान
2026-05-13
पृष्ठभूमि: अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस प्रतिवर्ष 15 मई को मनाया जाता है, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1993 में घोषित किया था। इसका उद्देश्य परिवारों से संबंधित मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उन्हें प्रभावित करने वाली सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय प्रक्रियाओं के ज्ञान में वृद्धि करना है। यह दिन समाज की मूल इकाई के रूप में परिवारों के महत्व को उजागर करने का अवसर प्रदान करता है। वर्तमान संदर्भ: 2026 के पालन से पहले, "परिवार और सतत विकास लक्ष्य" पर चर्चा केंद्रित है, जो वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देती है। विभिन्न संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां और सदस्य देश एजेंडा 2030 की दिशा में प्रगति को तेज करने के लिए परिवार-उन्मुख नीतियों की पड़ताल करने हेतु आभासी और व्यक्तिगत कार्यक्रमों की योजना बना रहे हैं। प्रभाव: यह दिवस सरकारों और नागरिक समाज को परिवार-संवेदनशील नीतियों को मजबूत करने, परिवार कल्याण का समर्थन करने और परिवार संरचनाओं के भीतर गरीबी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे दुनिया भर में समावेशी और लचीले समुदाय बनते हैं।
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