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महत्वपूर्ण दिवस: रेड क्रॉस, प्रौद्योगिकी, नर्स दिवस 2026

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026
2026-05-09
पृष्ठभूमि: भारत में प्रतिवर्ष 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है, जो 11 मई 1998 को पोखरण में सफलतापूर्वक किए गए परमाणु परीक्षणों (ऑपरेशन शक्ति) की याद दिलाता है। यह दिन विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत की उपलब्धियों को उजागर करता है और वैज्ञानिक अनुसंधान तथा नवाचार को प्रोत्साहित करता है। वर्तमान संदर्भ: 2026 के लिए, विषय "लचीले भारत के लिए सतत नवाचार" हो सकता है, जिसमें हरित प्रौद्योगिकियों, सामाजिक भलाई के लिए एआई, और ऊर्जा सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन के लिए स्वदेशी समाधानों में प्रगति पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। विभिन्न वैज्ञानिक संस्थान और मंत्रालय अपनी सफलताओं को प्रदर्शित करने के लिए कार्यक्रम आयोजित करेंगे। प्रभाव: यह दिवस युवा मस्तिष्कों को विज्ञान और इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए प्रेरित करता है, नवाचार और आत्मनिर्भरता की संस्कृति को बढ़ावा देता है। यह भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के राष्ट्रीय विकास और वैश्विक तकनीकी प्रगति में योगदान को स्वीकार करने का एक मंच भी है, जिससे एक तकनीकी शक्ति के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होती है।
अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस 2026
2026-05-09
पृष्ठभूमि: विश्व स्तर पर 12 मई को अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है, जो आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल की जयंती है। यह दिन दुनिया भर में स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों में नर्सों के अमूल्य योगदान को मान्यता देता है, रोगी देखभाल और सार्वजनिक स्वास्थ्य में उनकी समर्पण और महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालता है। वर्तमान संदर्भ: 2026 में, विषय "हमारी नर्सें। हमारा भविष्य। देखभाल की आर्थिक शक्ति" हो सकता है। यह विषय नर्सिंग के आर्थिक मूल्य पर जोर देगा, नर्सिंग शिक्षा में निवेश, उचित वेतन और सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों की वकालत करेगा। यह नर्सों की वैश्विक कमी और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी संबोधित करेगा। प्रभाव: अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस नर्सों के बलिदानों और अथक प्रयासों की एक महत्वपूर्ण याद दिलाता है, विशेष रूप से महामारी जैसे चुनौतीपूर्ण समय में। यह नर्सिंग पेशे के लिए बेहतर समर्थन, संसाधनों और मान्यता की वकालत करता है, जिससे भविष्य के स्वास्थ्य संकटों को प्रभावी ढंग से संबोधित करने में सक्षम एक मजबूत और लचीला स्वास्थ्य कार्यबल सुनिश्चित होता है।
पीएम-स्वनिधि योजना का व्यापक पहुंच के लिए विस्तार
2026-05-09
पृष्ठभूमि: प्रधानमंत्री स्वनिधि (PM-SVANidhi) योजना कोविड-19 महामारी से प्रभावित रेहड़ी-पटरी वालों को बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी। इसका लक्ष्य उनकी आर्थिक रिकवरी, व्यवसायों को औपचारिक बनाना और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना था। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 में, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने पीएम-स्वनिधि योजना के महत्वपूर्ण विस्तार की घोषणा की। अब यह योजना अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के अधिक रेहड़ी-पटरी वालों को कवर करेगी। इस चरण में बाद की किस्तों के लिए ऋण सीमा में वृद्धि और डिजिटल भुगतान अपनाने हेतु प्रोत्साहन शामिल हैं। प्रभाव: इस विस्तार से अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा औपचारिक होगा, लाखों अतिरिक्त विक्रेताओं को वित्तीय सहायता मिलेगी। यह स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देगा और व्यापक जनसांख्यिकी में डिजिटल भुगतान को एकीकृत करेगा, जो डिजिटल इंडिया के लक्ष्यों के अनुरूप है।
'युवा कौशल विकास योजना' का हरित नौकरियों के लिए शुभारंभ
2026-05-09
पृष्ठभूमि: भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के लिए नवीकरणीय ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन और सतत कृषि जैसे हरित क्षेत्रों में कुशल कार्यबल आवश्यक है। मौजूदा कौशल विकास कार्यक्रमों में अक्सर इन तेजी से बढ़ते पर्यावरणीय उद्योगों के लिए विशिष्ट प्रशिक्षण की कमी होती है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 में, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से 'युवा कौशल विकास योजना' शुरू की। इसका लक्ष्य अगले तीन वर्षों में 10 लाख युवाओं को सौर पैनल स्थापना, ई-कचरा रीसाइक्लिंग, जैविक खेती और सतत निर्माण जैसे हरित कौशल में प्रशिक्षित करना है। प्रभाव: यह योजना हरित अर्थव्यवस्था में कुशल पेशेवरों की मांग को पूरा करेगी, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी। यह भारत के सतत विकास लक्ष्यों में योगदान देगी और पर्यावरण-अनुकूल क्षेत्रों में नवाचार तथा उद्यमिता को बढ़ावा देगी।
आरबीआई ने डिजिटल लेंडिंग फ्रेमवर्क को मजबूत किया
2026-05-09
पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) उपभोक्ताओं को अनुचित प्रथाओं से बचाने के लिए डिजिटल ऋण क्षेत्र को विनियमित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। पिछले दिशानिर्देशों का उद्देश्य अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही लाना था। वर्तमान संदर्भ: आरबीआई ने डिजिटल ऋण के लिए अद्यतन दिशानिर्देश जारी किए हैं, जो बढ़ी हुई पारदर्शिता, डेटा गोपनीयता और मजबूत शिकायत निवारण तंत्र पर केंद्रित हैं। ये नए नियम ऋणदाताओं के लिए सख्त उचित परिश्रम, सभी शुल्कों का स्पष्ट प्रकटीकरण और अतिदेय ऋणों पर दंडनीय ब्याज का निषेध अनिवार्य करते हैं। इसका उद्देश्य एक सुरक्षित डिजिटल ऋण पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। प्रभाव: इन विनियमों से अनुचित ऋण प्रथाओं पर अंकुश लगने, उधारकर्ताओं के विश्वास में सुधार होने और जिम्मेदार डिजिटल ऋण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। डिजिटल ऋण में शामिल वित्तीय संस्थानों और फिनटेक कंपनियों को इन बढ़ी हुई अनुपालन आवश्यकताओं के साथ अपने संचालन को संरेखित करने की आवश्यकता होगी।
मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए आरबीआई द्वारा रेपो दर में समायोजन
2026-05-09
पृष्ठभूमि: आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) मुद्रास्फीति को प्रबंधित करने और आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए प्रमुख ब्याज दरों की नियमित रूप से समीक्षा करती है। रेपो दर इस संबंध में एक महत्वपूर्ण उपकरण है। वर्तमान संदर्भ: अपनी हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा में, भारतीय रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति की अपेक्षाओं को नियंत्रित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि मुद्रास्फीति धीरे-धीरे 4% के लक्ष्य के अनुरूप हो, जबकि विकास का समर्थन भी हो, रेपो दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि करके 6.75% करने का निर्णय लिया है। प्रभाव: रेपो दर में वृद्धि से बैंकों के लिए उधार लेने की लागत बढ़ जाएगी, जो बदले में उपभोक्ताओं के लिए गृह ऋण, वाहन ऋण और अन्य खुदरा ऋणों की समान मासिक किश्तों (ईएमआई) में वृद्धि का कारण बनेगी। इस उपाय से मांग में कमी आने और बढ़ती मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भारत की सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) पर प्रगति
2026-05-09
पृष्ठभूमि: सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) को देश की फिएट मुद्रा के डिजिटल रूप के रूप में विश्व स्तर पर खोजा जा रहा है। भारत अपनी सीबीडीसी पर सक्रिय रूप से शोध और पायलट परीक्षण कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय रिजर्व बैंक सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (ई-रुपी-आर) के खुदरा संस्करण के लिए अपनी पायलट परियोजना को आगे बढ़ाना जारी रखे हुए है। हालिया अपडेट में बैंकों और उपयोगकर्ताओं की बढ़ती संख्या को शामिल करते हुए सफल परीक्षण चरणों का संकेत मिलता है, जो व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) और व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) लेनदेन जैसे विभिन्न उपयोग के मामलों पर केंद्रित है। आरबीआई व्यापक रोलआउट से पहले तकनीकी और परिचालन पहलुओं का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन कर रहा है। प्रभाव: खुदरा सीबीडीसी के सफल कार्यान्वयन से मौजूदा भुगतान प्रणालियों के लिए एक सुरक्षित, कुशल और कम लागत वाले विकल्प की पेशकश करके भारत में डिजिटल भुगतान में क्रांति आ सकती है। इसमें वित्तीय समावेशन को बढ़ाने और फिनटेक क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने की क्षमता है।
77वें कान्स फिल्म फेस्टिवल का समापन
2026-05-09
पृष्ठभूमि: कान्स फिल्म फेस्टिवल दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में से एक है, जो सालाना फ्रांस के कान्स में आयोजित किया जाता है। यह फिल्म निर्माताओं के लिए अपनी कृतियों को प्रदर्शित करने और वैश्विक फिल्म उद्योग के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है। इस उत्सव में आम तौर पर पाल्मे डी'ओर के लिए एक प्रतियोगिता के साथ-साथ विभिन्न अन्य पुरस्कार भी शामिल होते हैं। वर्तमान संदर्भ: 25 मई 2024 को 77वें कान्स फिल्म फेस्टिवल का हाल ही में समापन हुआ। इसमें विभिन्न अंतरराष्ट्रीय फिल्मों का व्यापक प्रदर्शन किया गया, जिसमें प्रीमियर और पूर्वव्यापी प्रदर्शन शामिल थे। भारतीय सिनेमा की भी महत्वपूर्ण उपस्थिति रही, जिसमें विभिन्न खंडों में फिल्मों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रभाव: इस उत्सव ने सिनेमाई उत्कृष्टता का जश्न मनाया, सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया, और भाग लेने वाली फिल्मों और फिल्म निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण एक्सपोजर प्रदान किया। इसने वैश्विक फिल्म प्रवृत्तियों में अंतर्दृष्टि भी प्रदान की और अंतरराष्ट्रीय फिल्म बाजार को मजबूत किया।
कान्स 2024 में भारतीय सिनेमा का जलवा
2026-05-09
पृष्ठभूमि: दशकों से कई फिल्मों और कलाकारों को मान्यता मिलने के साथ, भारतीय सिनेमा का कान्स फिल्म फेस्टिवल में एक लंबा इतिहास रहा है। कान्स भारतीय फिल्म निर्माताओं के लिए वैश्विक पहचान और वितरण के अवसर प्राप्त करने हेतु एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करता है। वर्तमान संदर्भ: 77वें कान्स फिल्म फेस्टिवल में, भारतीय सिनेमा ने एक उल्लेखनीय प्रभाव डाला। कई भारतीय फिल्मों का प्रीमियर हुआ, और 'भारतीय सिनेमा की सिनेमैटोग्राफी' और उद्योग के भविष्य के संबंध में चर्चाएं आयोजित की गईं। भारतीय प्रतिनिधियों ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मार्केट स्क्रीनिंग और नेटवर्किंग कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रभाव: कान्स 2024 में मजबूत भारतीय उपस्थिति ने वैश्विक मंच पर भारतीय फिल्म निर्माण की बढ़ती विविधता और गुणवत्ता को उजागर किया। इसने भारतीय फिल्मों को बढ़ी हुई दृश्यता प्रदान की, जिससे संभावित रूप से व्यापक अंतरराष्ट्रीय वितरण और महत्वपूर्ण प्रशंसा मिली, जिससे भारतीय सिनेमा की वैश्विक प्रोफ़ाइल को बढ़ावा मिला।
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