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भारत-यूरोपीय संघ FTA और UNSC सुधार: प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय अपडेट

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति
2026-04-24
पृष्ठभूमि: भारत और यूरोपीय संघ एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए एक दशक से अधिक समय से बातचीत कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना है। शुरुआती वार्ता में बाधाएँ आईं, लेकिन हाल के वर्षों में गहरे आर्थिक संबंधों के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए इसे नए सिरे से शुरू किया गया। वर्तमान संदर्भ: अप्रैल 2026 के अंत तक, भारत-यूरोपीय संघ FTA वार्ता के कई प्रमुख अध्यायों में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है, विशेष रूप से वस्तुओं, सेवाओं और निवेश संरक्षण के लिए बाजार पहुंच से संबंधित। ब्रुसेल्स और नई दिल्ली में उच्च-स्तरीय राजनयिक वार्ताओं से वर्ष के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देने की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का संकेत मिलता है। प्रभाव: एक सफल FTA भारत और यूरोपीय संघ दोनों के लिए पर्याप्त आर्थिक अवसर खोलेगा, जिससे द्विपक्षीय व्यापार अरबों डॉलर तक बढ़ सकता है। यह भारतीय व्यवसायों को यूरोपीय बाजार तक अधिक पहुंच प्रदान करेगा और भारत में अधिक यूरोपीय निवेश आकर्षित करेगा, जिससे रोजगार सृजन और तकनीकी आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन की प्रगति समीक्षा
2026-04-24
पृष्ठभूमि: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का उद्देश्य भारतीय शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार लाना है, जो समग्र विकास और कौशल-आधारित सीखने पर केंद्रित है। वर्तमान संदर्भ: शिक्षा मंत्रालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नई शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन की प्रगति की लगातार निगरानी और समीक्षा कर रहा है। मुख्य फोकस क्षेत्रों में मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता कार्यक्रमों का कार्यान्वयन, पाठ्यक्रम का पुनर्गठन, शिक्षक प्रशिक्षण और व्यावसायिक शिक्षा का एकीकरण शामिल है। प्रभाव: नई शिक्षा नीति 2020 का सफल कार्यान्वयन भारत के शैक्षिक परिदृश्य को बदलने के लिए तैयार है, इसे 21वीं सदी की जरूरतों के प्रति अधिक न्यायसंगत, सुलभ और प्रासंगिक बना रहा है, जिससे आलोचनात्मक सोच और आजीवन सीखने को बढ़ावा मिलेगा।
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए NPCI ने रूपे नेटवर्क का विस्तार किया
2026-04-24
पृष्ठभूमि: भारत में एक मजबूत भुगतान अवसंरचना बनाने और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) की स्थापना की गई थी। वर्तमान संदर्भ: NPCI अपने स्वदेशी कार्ड नेटवर्क, रूपे की पहुंच और स्वीकृति का विस्तार करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। अधिक व्यापारियों को जोड़ने, लेनदेन क्षमताओं को बढ़ाने और 'डिजिटल इंडिया' दृष्टिकोण के अनुरूप घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के लेनदेन के लिए रूपे को एक पसंदीदा भुगतान विधि के रूप में बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं। प्रभाव: रूपे नेटवर्क के विस्तार से वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलने, अंतरराष्ट्रीय कार्ड नेटवर्क के लिए एक लागत प्रभावी विकल्प प्रदान करने और भारत भर में डिजिटल भुगतान को अपनाने में तेजी लाने की उम्मीद है, जिससे उपभोक्ताओं और व्यवसायों दोनों को लाभ होगा।
सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लिए 'आयुष्मान भवः' अभियान शुरू
2026-04-24
पृष्ठभूमि: भारत सरकार ने लगातार अपने नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवा की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू की गई हैं। वर्तमान संदर्भ: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 'आयुष्मान भवः' अभियान शुरू किया है, जो एक राष्ट्रव्यापी पहल है जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी स्वास्थ्य सेवाएं प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे। यह अभियान देश भर के प्रत्येक गांव और शहरी वार्ड में सभी स्वास्थ्य योजनाओं और सेवाओं की संतृप्ति प्राप्त करना चाहता है। प्रभाव: इस अभियान से स्वास्थ्य सेवाओं की डिलीवरी में काफी सुधार होने की उम्मीद है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी पीछे न छूटे। इसका उद्देश्य निवारक, उपचारात्मक और प्रोत्साहक सेवाओं सहित व्यापक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना है, जिससे आबादी के समग्र स्वास्थ्य परिणामों में सुधार हो।
ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए नया नियामक ढांचा
2026-04-23
पृष्ठभूमि: डिजिटल स्ट्रीमिंग के तेजी से विकास के साथ, सरकार ने ओटीटी सामग्री को नियंत्रित करने के लिए आईटी नियम, 2021 पेश किए थे। वर्तमान संदर्भ: अप्रैल 2026 तक, सरकार ने ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए स्व-नियमन और आयु-वर्गीकरण तंत्र को मजबूत करने हेतु अद्यतन अनुपालन ढांचे को अनिवार्य कर दिया है। इसमें सामग्री वर्गीकरण और शिकायत निवारण पर सख्त निगरानी शामिल है। प्रभाव: इन उपायों का उद्देश्य रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना है, ताकि डिजिटल सामग्री आयु के अनुकूल रहे और दर्शकों को हानिकारक सामग्री से बचाया जा सके।
73वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा
2026-04-23
पृष्ठभूमि: 1954 में स्थापित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारत में सबसे प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कार हैं, जिनका संचालन फिल्म समारोह निदेशालय द्वारा किया जाता है। वर्तमान संदर्भ: 23 अप्रैल 2026 को, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 73वें संस्करण के विजेताओं की घोषणा की, जिसमें पिछले वर्ष की सर्वश्रेष्ठ फीचर और गैर-फीचर फिल्मों को सम्मानित किया गया। प्रभाव: ये पुरस्कार भारतीय सिनेमा में कलात्मक गुणवत्ता के लिए एक मानक के रूप में कार्य करते हैं, क्षेत्रीय फिल्मों की व्यावसायिक संभावनाओं को बढ़ाते हैं और विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमियों के कलाकारों को राष्ट्रीय पहचान प्रदान करते हैं।
आरबीआई ने डिजिटल ऋण देने वाले प्लेटफॉर्म के लिए कड़े मानदंड पेश किए
2026-04-23
पृष्ठभूमि: डिजिटल ऋण देने वाले ऐप्स के तेजी से प्रसार ने शिकारी प्रथाओं, अत्यधिक ब्याज दरों और डेटा गोपनीयता उल्लंघनों के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे आरबीआई को मौजूदा नियमों की समीक्षा करने के लिए प्रेरित किया गया है। वर्तमान संदर्भ: 22 अप्रैल, 2026 को, भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल ऋण देने के लिए व्यापक नए दिशानिर्देशों का अनावरण किया। ये मानदंड अनिवार्य करते हैं कि सभी ऋण संवितरण और पुनर्भुगतान सीधे उधारकर्ता और विनियमित इकाई (आरई) के बीच होने चाहिए, जिससे धन प्रवाह में ऋण सेवा प्रदाताओं (एलएसपी) की भूमिका समाप्त हो जाएगी। शुल्क, ब्याज दरों और डेटा उपयोग में पारदर्शिता अब सख्ती से लागू की गई है। प्रभाव: इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ाना, अनैतिक वसूली प्रथाओं पर अंकुश लगाना और डिजिटल ऋण पारिस्थितिकी तंत्र में अधिक जवाबदेही लाना है। यह वैध खिलाड़ियों के लिए संचालन को सुव्यवस्थित करने और धोखाधड़ी वाले खिलाड़ियों को बाहर निकालने की उम्मीद है, जिससे डिजिटल क्रेडिट के लिए एक सुरक्षित और अधिक पारदर्शी वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।
मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच आरबीआई ने रेपो दर में यथास्थिति बनाए रखी
2026-04-23
पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) मुद्रास्फीति और विकास को प्रभावित करने वाली प्रमुख ब्याज दरों को निर्धारित करने के लिए आर्थिक संकेतकों की नियमित समीक्षा करती है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं और घरेलू मुद्रास्फीति के रुझान हाल के नीतिगत निर्णयों के केंद्र में रहे हैं। वर्तमान संदर्भ: 23 अप्रैल, 2026 को समाप्त हुई अपनी द्विमासिक समीक्षा में, आरबीआई ने रेपो दर को 6.50% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। यह निर्णय सतर्क दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो सतत आर्थिक विकास का समर्थन करते हुए मुद्रास्फीति को लक्ष्य सीमा के भीतर रखने की आवश्यकता को संतुलित करता है। एमपीसी ने 'समायोजन की वापसी' के अपने रुख को दोहराया। प्रभाव: रेपो दर में यह स्थिरता बैंकों और उधारकर्ताओं के लिए पूर्वानुमेयता प्रदान करने की उम्मीद है। यह मूल्य स्थिरता के प्रति आरबीआई की प्रतिबद्धता का संकेत देता है, जो गृह और ऑटो ऋणों के लिए उधार दरों को प्रभावित कर सकता है, और अर्थव्यवस्था में समग्र ऋण वृद्धि पर असर डाल सकता है।
मनरेगा ग्रामीण रोजगार प्रदान करना जारी रखे हुए है
2026-04-23
पृष्ठभूमि: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) 2005 में अधिनियमित किया गया था ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल मैनुअल काम करने के लिए स्वेच्छा से काम करते हैं, वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान किया जा सके। वर्तमान संदर्भ: सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए मनरेगा के कार्यान्वयन की निगरानी और धन आवंटित करना जारी रखे हुए है कि ग्रामीण परिवारों के पास रोजगार के अवसर हों, खासकर कृषि के कम मौसम के दौरान। समय पर मजदूरी भुगतान और उत्पादक सामुदायिक संपत्तियों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित है। प्रभाव: मनरेगा ग्रामीण समुदायों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा जाल रहा है, जिसने आजीविका सुरक्षा को बढ़ाया है, संकटग्रस्त प्रवासन को कम किया है, और समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों को सशक्त बनाया है। यह सड़कों, जल संरक्षण संरचनाओं और स्वच्छता सुविधाओं जैसी टिकाऊ संपत्तियों के निर्माण के माध्यम से ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास में भी योगदान देता है।
मुद्रा योजना सूक्ष्म उद्यमों को सशक्त बनाती है
2026-04-23
पृष्ठभूमि: प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) अप्रैल 2015 में गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि लघु और सूक्ष्म उद्यमों को ₹10 लाख तक के ऋण प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी। ऋण बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) और सूक्ष्म वित्त संस्थानों (MFIs) द्वारा प्रदान किए जाते हैं। वर्तमान संदर्भ: PMMY महत्वाकांक्षी उद्यमियों और छोटे व्यवसायों के लिए औपचारिक ऋण तक पहुंच की सुविधा प्रदान करना जारी रखे हुए है। योजना ऋणों को 'शिशु' (₹50,000 तक), 'किशोर' (₹50,001 से ₹5 लाख), और 'तरुण' (₹5 लाख से ₹10 लाख) में वर्गीकृत करती है, जो व्यवसाय वृद्धि के विभिन्न चरणों को पूरा करती है। प्रभाव: यह योजना रोजगार सृजन, उद्यमिता को बढ़ावा देने और औपचारिक बैंकिंग चैनलों तक पहुंच की कमी वाले लोगों को पूंजी प्रदान करके वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में सहायक रही है। यह भारत की अर्थव्यवस्था के एक प्रमुख चालक, एमएसएमई क्षेत्र के विकास का समर्थन करता है।
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