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भारतीय खेल समाचार: बैडमिंटन जीत, भाला रिकॉर्ड, खेलो इंडिया

सरकार ने 20 नए 'खेलो इंडिया स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर' लॉन्च किए
2026-04-18
पृष्ठभूमि: 'खेलो इंडिया' पहल एक प्रमुख सरकारी कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर खेलों को बढ़ावा देना और देश भर में खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। मजबूत बुनियादी ढांचे का विकास इस दृष्टिकोण के लिए महत्वपूर्ण है। वर्तमान संदर्भ: 18 अप्रैल, 2026 को, युवा मामले और खेल मंत्रालय ने विभिन्न राज्यों में 20 नए 'खेलो इंडिया स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर' की स्थापना की घोषणा की। ये अत्याधुनिक केंद्र होनहार एथलीटों को उन्नत प्रशिक्षण सुविधाएं, विशेषज्ञ कोचिंग और खेल विज्ञान सहायता प्रदान करेंगे। प्रभाव: यह विस्तार भारत के खेल बुनियादी ढांचे को काफी बढ़ाएगा, जिससे महत्वाकांक्षी एथलीटों को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण मिलेगा। इससे भविष्य की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत की पदक संभावनाओं को बढ़ावा मिलने और देश भर में एक मजबूत खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
विश्व विरासत दिवस 2026: विरासत और लचीलेपन पर ध्यान
2026-04-18
पृष्ठभूमि: विश्व विरासत दिवस, जिसे स्मारकों और स्थलों के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में भी जाना जाता है, की स्थापना 1982 में इकोरमोस (ICOMOS) द्वारा की गई थी और बाद में यूनेस्को द्वारा इसे मंजूरी दी गई थी। वर्तमान संदर्भ: 18 अप्रैल 2026 को, भारत ने 'विरासत और लचीलापन' विषय के साथ यह दिवस मनाया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने सभी 3,693 केंद्रीय संरक्षित स्मारकों में मुफ्त प्रवेश की घोषणा की। एक प्रमुख आकर्षण लिडार (LIDAR) तकनीक का उपयोग करके कोणार्क सूर्य मंदिर के लिए डिजिटल बहाली परियोजना का अनावरण था। प्रभाव: यह पहल सांस्कृतिक संरक्षण के बारे में सार्वजनिक जागरूकता को बढ़ावा देती है और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भारत के वास्तुशिल्प चमत्कारों की सुरक्षा में आधुनिक तकनीक के एकीकरण को उजागर करती है।
ओडिशा और छत्तीसगढ़ के पारंपरिक शिल्पों को नए GI टैग प्रदान किए गए
2026-04-18
पृष्ठभूमि: भौगोलिक संकेत (GI) टैग उत्पादों की पहचान एक विशिष्ट क्षेत्र से उत्पन्न होने के रूप में करते हैं, जो गुणवत्ता और विशिष्टता सुनिश्चित करते हैं। वर्तमान संदर्भ: अप्रैल 2026 में, भारत की GI रजिस्ट्री ने कई पारंपरिक शिल्पों को टैग प्रदान किए, विशेष रूप से कटक की 'सिल्वर फिलीग्री' (तारकसी) और 'बस्तर आयरन क्राफ्ट' संवर्द्धन। ये शिल्प सदियों के स्वदेशी ज्ञान और कलात्मक उत्कृष्टता का प्रतिनिधित्व करते हैं। संस्कृति मंत्रालय ने जोर दिया कि ये टैग शिल्प नामों के अनधिकृत उपयोग को रोकेंगे। प्रभाव: यह मान्यता स्थानीय कारीगरों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में इन उत्पादों के बाजार मूल्य को बढ़ाती है, और ग्रामीण आजीविका और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देकर 'वोकल फॉर लोकल' पहल का समर्थन करती है।
विश्व विरासत दिवस 2026: जलवायु लचीलेपन पर ध्यान
2026-04-18
पृष्ठभूमि: विश्व विरासत दिवस, जिसे स्मारकों और स्थलों के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में भी जाना जाता है, 1982 में ICOMOS द्वारा प्रस्तावित किया गया था और 1983 में यूनेस्को द्वारा अनुमोदित किया गया था। वर्तमान संदर्भ: 18 अप्रैल 2026 को, यह दिन विश्व स्तर पर 'विरासत और जलवायु लचीलापन' विषय के साथ मनाया जा रहा है, जो ऐतिहासिक स्थलों को पर्यावरणीय क्षरण से बचाने पर केंद्रित है। भारत में, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने संरक्षण प्रयासों को उजागर करने के लिए हम्पी और खजुराहो जैसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों पर विशेष प्रदर्शनियों का आयोजन किया है। प्रभाव: यह आयोजन सांस्कृतिक विरासत की विविधता और स्मारकों की संवेदनशीलता के बारे में जागरूकता बढ़ाता है, जिससे जलवायु परिवर्तन के खिलाफ उनके दीर्घकालिक संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलता है।
विश्व हीमोफिलिया दिवस 2026: सभी के लिए समान पहुंच
2026-04-18
पृष्ठभूमि: विश्व हीमोफिलिया दिवस प्रतिवर्ष 17 अप्रैल को वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हीमोफिलिया के संस्थापक फ्रैंक श्नाबेल की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। वर्तमान संदर्भ: 2026 में, वैश्विक विषय 'सभी के लिए समान पहुंच: सभी रक्तस्राव विकारों की पहचान' है। भारत में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हीमोफिलिया ए और बी के अनियंत्रित मामलों की पहचान करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी स्क्रीनिंग अभियान शुरू किया है, जिसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के साथ एकीकृत किया गया है। प्रभाव: इस आयोजन का उद्देश्य वंशानुगत रक्तस्राव विकारों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना और विशेष देखभाल और किफायती उपचार तक बेहतर पहुंच की वकालत करना है, जिससे आंतरिक रक्तस्राव और फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी की कमी से जुड़ी मृत्यु दर में काफी कमी आएगी।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) - पीएमएवाई-यू का विस्तार
2026-04-18
पृष्ठभूमि: प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), जिसे 2015 में शुरू किया गया था, का उद्देश्य 'सभी के लिए आवास' सुनिश्चित करके सभी पात्र शहरी परिवारों को किफायती आवास प्रदान करना है। यह इन-सीटू स्लम पुनर्विकास, क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना, साझेदारी में किफायती आवास और लाभार्थी-नेतृत्व निर्माण जैसे विभिन्न वर्टिकल के माध्यम से संचालित होती है। वर्तमान संदर्भ: अप्रैल 2026 में, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने पीएमएवाई-यू के एक महत्वपूर्ण विस्तार की घोषणा की, जिसमें टिकाऊ शहरी नियोजन और हरित भवन प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करने पर केंद्रित एक नया चरण पेश किया गया। इस चरण में टियर-2 और टियर-3 शहरों में अतिरिक्त 1.5 मिलियन घरों का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें पर्यावरण-अनुकूल निर्माण सामग्री और स्मार्ट होम सुविधाओं के लिए बढ़ी हुई सब्सिडी शामिल है। प्रभाव: यह विस्तार शहरी आवास की कमी को और दूर करेगा, पर्यावरण के प्रति जागरूक विकास को बढ़ावा देगा और छोटे शहरों में आर्थिक विकास को गति देगा। यह लाखों लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करेगा, शहरी गरीबी को कम करेगा और निर्माण तथा संबद्ध क्षेत्रों में पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
'युवा कौशल विकास अभियान' का शुभारंभ
2026-04-18
पृष्ठभूमि: भारत, अपनी विशाल युवा आबादी के साथ, कौशल विकास को आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए एक आधारशिला मानता है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) जैसी मौजूदा पहलों ने रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया है। वर्तमान संदर्भ: अप्रैल 2026 में, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने 'युवा कौशल विकास अभियान' नामक एक नया प्रमुख कार्यक्रम शुरू किया। इस मिशन का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में 5 मिलियन युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे भविष्य के लिए तैयार कौशल से लैस करना है, जिसमें उद्योग-अकादमिक साझेदारी और डिजिटल शिक्षण प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। प्रभाव: यह पहल कौशल अंतर को काफी हद तक कम करेगी, जिससे भारत का कार्यबल विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेगा। यह युवा रोजगार क्षमता को बढ़ावा देगा, उद्यमिता को प्रोत्साहित करेगा और अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाकर राष्ट्र के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा, जो एक कुशल भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
जल जीवन मिशन (जेजेएम) पर प्रगति रिपोर्ट
2026-04-18
पृष्ठभूमि: जल जीवन मिशन (जेजेएम), जिसे 2019 में शुरू किया गया था, ने 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों को व्यक्तिगत घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने की परिकल्पना की थी। यह सामुदायिक भागीदारी और जल गुणवत्ता निगरानी पर जोर देता है। वर्तमान संदर्भ: अप्रैल 2026 में, जल शक्ति मंत्रालय ने जेजेएम पर एक व्यापक प्रगति रिपोर्ट जारी की, जिसमें 2024 के प्रारंभिक लक्ष्य से परे इसकी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया। रिपोर्ट में 95% से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन सफलतापूर्वक प्रदान करने का विवरण दिया गया, जिसमें अब बुनियादी ढांचे को बनाए रखने, ग्रेवाटर प्रबंधन और जल-तनावग्रस्त क्षेत्रों में समुदाय-नेतृत्व वाली पहलों के माध्यम से जल संरक्षण प्रथाओं को बढ़ावा देने पर नया ध्यान केंद्रित किया गया है। प्रभाव: इस मिशन ने जल-जनित बीमारियों को कम करके सार्वजनिक स्वास्थ्य में नाटकीय रूप से सुधार किया है और पानी इकट्ठा करने के बोझ को कम करके महिलाओं को महत्वपूर्ण रूप से सशक्त बनाया है। नया ध्यान दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करता है, टिकाऊ संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देता है और ग्रामीण भारत में जल प्रबंधन में स्थानीय शासन को मजबूत करता है।
RBI ने डिजिटल रुपये (e₹) के राष्ट्रव्यापी रोलआउट की घोषणा की
2026-04-18
पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को आधुनिक बनाने के लिए 2022 के अंत में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) पायलट शुरू किया था। वर्तमान संदर्भ: 18 अप्रैल, 2026 को, RBI ने खुदरा और थोक दोनों क्षेत्रों के लिए डिजिटल रुपये के पूर्ण पैमाने पर राष्ट्रव्यापी लॉन्च की घोषणा की। इस चरण में सरकारी सब्सिडी के लिए प्रोग्रामेबल भुगतान और मौजूदा UPI QR कोड के साथ एकीकृत ऑफ़लाइन लेनदेन जैसी उन्नत सुविधाएँ पेश की गई हैं। प्रभाव: इस कदम से भौतिक मुद्रा प्रबंधन की लागत में काफी कमी आने, दूरदराज के क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलने और वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।
SEBI ने भारतीय इक्विटी बाजारों के लिए T+0 निपटान चक्र अनिवार्य किया
2026-04-18
पृष्ठभूमि: बाजार दक्षता में सुधार और जोखिमों को कम करने के लिए भारत ने 2023 में T+2 से T+1 निपटान (settlement) में बदलाव किया था। वर्तमान संदर्भ: 18 अप्रैल, 2026 से प्रभावी, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने NSE और BSE पर सभी इक्विटी लेनदेन के लिए T+0 निपटान चक्र अनिवार्य कर दिया है। यह शेयरों और फंडों के उसी दिन हस्तांतरण की अनुमति देता है, जिससे भारत इस तरह के तीव्र निपटान ढांचे को लागू करने वाली पहली बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बन गया है। प्रभाव: यह बदलाव निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण पूंजी को मुक्त करेगा, प्रतिपक्ष जोखिमों को कम करेगा और वैश्विक निवेशकों के लिए भारतीय पूंजी बाजार की समग्र तरलता और आकर्षण को बढ़ाएगा।
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