Current Affairs & MCQs
Latest Questions, Daily Updates & More

राष्ट्रीय मामले भारत: सरकारी नीतियां, न्यायपालिका और योजनाएं

सुप्रीम कोर्ट ने EWS कोटे की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा
2026-04-17
पृष्ठभूमि: आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए कोटा 103वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से पेश किया गया था, जो एससी/एसटी/ओबीसी आरक्षण के दायरे में नहीं आने वालों के लिए उच्च शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण प्रदान करता है। वर्तमान संदर्भ: सुप्रीम कोर्ट की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने हाल ही में EWS आरक्षण की वैधता को बरकरार रखा है, यह फैसला सुनाते हुए कि यह संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन नहीं करता है। अदालत ने कहा कि यह संशोधन भेदभावपूर्ण नहीं है क्योंकि यह ओबीसी के क्रीमी लेयर को बाहर करता है। प्रभाव: यह फैसला आर्थिक मानदंडों के आधार पर सकारात्मक कार्रवाई प्रदान करने की सरकार की नीति को मजबूत करता है, जो भविष्य की आरक्षण नीतियों और भारत में उच्च शिक्षा तथा सार्वजनिक रोजगार के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के कड़ाई से अनुपालन का निर्देश दिया
2026-04-17
पृष्ठभूमि: प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016, उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों को अपने उत्पादों से उत्पन्न प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन के लिए अनिवार्य करते हैं, जिससे चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है और पर्यावरणीय प्रदूषण कम होता है। वर्तमान संदर्भ: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने हाल ही में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इन नियमों के कड़ाई से अनुपालन की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है। इसने अधिकारियों को प्लास्टिक कचरे के उचित पृथक्करण, संग्रह और निपटान सुनिश्चित करने तथा उल्लंघनों पर प्रभावी ढंग से दंडित करने का निर्देश दिया है। प्रभाव: इस निर्देश का उद्देश्य प्लास्टिक प्रदूषण की व्यापक समस्या को नियंत्रित करना, अपशिष्ट प्रबंधन के बुनियादी ढांचे में सुधार करना और टिकाऊ उपभोग पैटर्न को बढ़ावा देना है। इससे भारत में स्वच्छ शहरी और ग्रामीण वातावरण बनने तथा प्लास्टिक कचरे के पारिस्थितिक पदचिह्न को कम करने की उम्मीद है।
सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास के लिए नई पहल शुरू की
2026-04-17
पृष्ठभूमि: भारत सरकार के लिए रोजगार क्षमता बढ़ाने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में, कौशल विकास एक प्रमुख फोकस क्षेत्र है। वर्तमान संदर्भ: ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्रामीण युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल वृद्धि के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से एक नई व्यापक योजना शुरू की है। यह पहल व्यापक पहुंच के लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल का उपयोग करते हुए कृषि, हस्तशिल्प और स्थानीय विनिर्माण जैसे उच्च रोजगार क्षमता वाले क्षेत्रों पर केंद्रित है। प्रभाव: इस कार्यक्रम से ग्रामीण आबादी को प्रासंगिक कौशल से लैस करके सशक्त बनाने की उम्मीद है, जिससे उनकी आय-अर्जन क्षमता बढ़ेगी, ग्रामीण-शहरी प्रवासन कम होगा और देश के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा।
भारत का सेवा पीएमआई रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा
2026-04-17
पृष्ठभूमि: सेवा क्षेत्र के लिए परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) आर्थिक स्वास्थ्य का एक प्रमुख संकेतक है, जो व्यावसायिक गतिविधि को दर्शाता है। 50 से ऊपर का पीएमआई विस्तार का संकेत देता है, जबकि 50 से नीचे संकुचन का सुझाव देता है। वर्तमान संदर्भ: अप्रैल 2026 में, भारत का सेवा पीएमआई मजबूत मांग, नए व्यावसायिक आदेशों और बेहतर रोजगार आंकड़ों से प्रेरित होकर अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया। यह सेवा क्षेत्र के विकास पथ में एक महत्वपूर्ण त्वरण को दर्शाता है। प्रभाव: यह मजबूत प्रदर्शन एक स्वस्थ और विस्तारशील अर्थव्यवस्था का संकेत देता है, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ता है और संभावित रूप से जीडीपी वृद्धि में वृद्धि होती है। यह सेवा क्षेत्र के भीतर रोजगार सृजन का भी संकेत देता है, जो समग्र आर्थिक स्थिरता और उपभोक्ता खर्च में योगदान देता है।
मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच आरबीआई ने रेपो दर बनाए रखी
2026-04-17
पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मुद्रास्फीति को प्रबंधित करने और आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए अपनी मौद्रिक नीति में रेपो दर का उपयोग एक प्रमुख उपकरण के रूप में करता है। रेपो दर में परिवर्तन अर्थव्यवस्था में ऋण दरों को प्रभावित करते हैं। वर्तमान संदर्भ: अप्रैल 2026 की अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने बेंचमार्क रेपो दर को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। यह निर्णय मुद्रास्फीति पर कुछ ऊपरी दबाव के बावजूद लिया गया, जिसमें विकास और मूल्य स्थिरता के प्रति संतुलित दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी गई। प्रभाव: रेपो दर को बनाए रखने से ऋण प्रवाह और निवेश को समर्थन मिलने की उम्मीद है, जिससे आर्थिक विस्तार में सहायता मिलेगी। हालांकि, आरबीआई मुद्रास्फीति पर बारीकी से नजर रखना जारी रखेगा, यदि मूल्य स्थिरता खतरे में पड़ती है तो भविष्य में समायोजन की संभावना के साथ, विकास के उद्देश्यों को मुद्रास्फीति नियंत्रण के साथ संतुलित करेगा।
भारत के विनिर्माण क्षेत्र में मजबूत वृद्धि देखी गई
2026-04-17
पृष्ठभूमि: विनिर्माण क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो जीडीपी और रोजगार में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसके प्रदर्शन को अक्सर विनिर्माण पीएमआई जैसे सूचकांकों के माध्यम से ट्रैक किया जाता है। वर्तमान संदर्भ: अप्रैल 2026 में जारी आंकड़ों ने भारत के विनिर्माण क्षेत्र में एक मजबूत उछाल का संकेत दिया। उत्पादन में वृद्धि, नए ऑर्डर और निर्यात मांग में सुधार प्रमुख चालक थे। व्यावसायिक विश्वास में नवीनीकरण को दर्शाते हुए, इस क्षेत्र में रोजगार के स्तर में भी वृद्धि देखी गई। प्रभाव: विनिर्माण में यह मजबूत वृद्धि समग्र आर्थिक विस्तार के लिए सकारात्मक है, जिससे औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि और आयात पर निर्भरता में कमी आ सकती है। यह एक स्वस्थ आपूर्ति श्रृंखला का भी प्रतीक है और रोजगार सृजन में योगदान देता है, जिससे राष्ट्र की आर्थिक लचीलापन बढ़ता है।
भारत-आसियान शिखर सम्मेलन समुद्री सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए संपन्न
2026-04-17
पृष्ठभूमि: दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन (आसियान) एक प्रमुख क्षेत्रीय संगठन है जिसके साथ भारत के मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं। भारत 1992 से आसियान का संवाद भागीदार रहा है। वर्तमान संदर्भ: 15 अप्रैल, 2026 को वर्चुअली आयोजित 34वें आसियान शिखर सम्मेलन में नेताओं ने समुद्री सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। चर्चाओं में समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने से निपटने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त पहलों पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारत के विदेश मंत्री ने नियम-आधारित व्यवस्था और सहयोगात्मक दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रभाव: शिखर सम्मेलन के परिणाम से भारत की एक्ट ईस्ट नीति को मजबूती मिलने और आसियान देशों के साथ उसकी भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। बढ़ी हुई समुद्री सुरक्षा सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक समृद्धि में योगदान देगा, जिससे व्यापार और कनेक्टिविटी को लाभ होगा।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर प्रस्ताव अपनाया
2026-04-17
पृष्ठभूमि: वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना एक स्थायी चुनौती है, जो जलवायु परिवर्तन, संघर्षों और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों से और बढ़ जाती है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समय-समय पर महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों को संबोधित करती है। वर्तमान संदर्भ: 16 अप्रैल, 2026 को, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भूख और कुपोषण से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को मजबूत करने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव को सर्वसम्मति से अपनाया। प्रस्ताव में सतत कृषि में निवेश बढ़ाने, कमजोर आबादी के लिए भोजन तक पहुंच में सुधार करने और खाद्य वितरण में बाधा डालने वाले व्यापार अवरोधों को दूर करने का आह्वान किया गया है। यह सदस्य देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देता है। प्रभाव: यह प्रस्ताव खाद्य असुरक्षा के मूल कारणों को संबोधित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे अधिक प्रभावी हस्तक्षेपों के लिए संसाधनों और राजनीतिक इच्छाशक्ति को जुटाने की उम्मीद है, जिससे लाखों लोग भुखमरी से बच सकते हैं और विश्व स्तर पर दीर्घकालिक कृषि लचीलापन में सुधार हो सकता है।
वैश्विक जलवायु शिखर सम्मेलन ने उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों में तेजी लाने का वादा किया
2026-04-17
पृष्ठभूमि: जलवायु परिवर्तन एक गंभीर वैश्विक खतरा बना हुआ है, जिसके लिए सभी देशों से तत्काल और महत्वाकांक्षी कार्रवाई की आवश्यकता है। अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन जलवायु लक्ष्यों को निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण मंच हैं। वर्तमान संदर्भ: 'क्लाइमेट एक्शन 2026' शिखर सम्मेलन, जो 17 अप्रैल, 2026 को समाप्त हुआ, में 150 से अधिक देशों ने अपने उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों में तेजी लाने पर सहमति व्यक्त की। भाग लेने वाले देशों ने 2040 तक कोयला बिजली को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने और अगले पांच वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा निवेश में 30% की वृद्धि करने का वचन दिया। विकासशील देशों को उनके संक्रमण में सहायता के लिए एक नया ग्रीन क्लाइमेट फंड भी स्थापित किया गया। प्रभाव: वैश्विक तापन को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिए यह नवीनीकृत वैश्विक प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है। त्वरित लक्ष्यों और बढ़े हुए धन से हरित प्रौद्योगिकियों में नवाचार को बढ़ावा मिलने और अधिक टिकाऊ वैश्विक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, हालांकि कार्यान्वयन की चुनौतियां बनी हुई हैं।
इसरो का NISAR उपग्रह उन्नत पृथ्वी अवलोकन के लिए तैयार
2026-04-17
पृष्ठभूमि: नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (NISAR) मिशन नासा और इसरो के बीच एक संयुक्त पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह मिशन है। इसका उद्देश्य पृथ्वी के भूमि और बर्फीले क्षेत्रों का अभूतपूर्व रिज़ॉल्यूशन पर अवलोकन करना है और वैज्ञानिकों को पृथ्वी की जलवायु में होने वाले परिवर्तनों को समझने में मदद करेगा। वर्तमान संदर्भ: अप्रैल 2026 के मध्य तक, NISAR उपग्रह अपने नियोजित प्रक्षेपण से पहले अमेरिकी सुविधा में अंतिम जांच और अंशांकन से गुजर रहा है। यह मिशन पृथ्वी की सतह की विस्तृत जानकारी प्रदान करने के लिए दोहरी-आवृत्ति रडार इमेजिंग का उपयोग करेगा। प्रभाव: NISAR आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन अध्ययन और भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा, जिससे पृथ्वी विज्ञान और रिमोट सेंसिंग में भारत की क्षमताओं में वृद्धि होगी।
Home Exams Jobs Current Affairs Mock Tests