LIGO-इंडिया, एक नियोजित गुरुत्वाकर्षण तरंग वेधशाला, भारत और किस अन्य देश की मौजूदा LIGO वेधशालाओं के बीच एक सहयोगात्मक परियोजना है?
A यूनाइटेड किंगडम
B जापान
C संयुक्त राज्य अमेरिका
D जर्मनी
उत्तर: C
LIGO-इंडिया संयुक्त राज्य अमेरिका में लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी (LIGO) के साथ एक सहयोगात्मक परियोजना है। इसका उद्देश्य भारत में तीसरा LIGO डिटेक्टर स्थापित करना है, जो अमेरिका में मौजूदा दो डिटेक्टरों का पूरक होगा।
22.
लॉन्च वाहनों के लिए पारंपरिक क्रायोजेनिक या हाइपरगोलिक इंजनों की तुलना में अर्ध-क्रायोजेनिक इंजन का उपयोग करने का एक प्रमुख लाभ क्या है?
A उच्च थ्रस्ट-टू-वेट अनुपात
B कम लागत और उच्च दक्षता
C सरल निर्माण प्रक्रिया
D उच्च तापमान पर काम करने की क्षमता
उत्तर: B
अर्ध-क्रायोजेनिक इंजन, विशेष रूप से केरोसिन और LOX का उपयोग करने वाले, प्रदर्शन और लागत के बीच एक अच्छा संतुलन प्रदान करते हैं। वे आम तौर पर उच्च दक्षता प्रदान करते हैं और शुद्ध क्रायोजेनिक इंजनों (जैसे LH2/LOX) की तुलना में संचालित करने और निर्माण करने में कम खर्चीले होते हैं और हाइपरगोलिक इंजनों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन प्रदान करते हैं।
23.
इसरो द्वारा अर्ध-क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण किस आगामी भारतीय लॉन्च वाहन कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है?
A गगनयान कार्यक्रम
B चंद्रयान कार्यक्रम
C नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV)
D पुन: प्रयोज्य लॉन्च व्हीकल (RLV)
उत्तर: C
अर्ध-क्रायोजेनिक इंजन तकनीक विशेष रूप से इसरो के नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) के लिए विकसित की जा रही है। लॉन्च वाहनों की यह नई पीढ़ी भारी पेलोड लॉन्च करने में भारत की क्षमताओं को बढ़ाने और संभावित रूप से लॉन्च लागत को कम करने का लक्ष्य रखती है।
24.
इसरो ने हाल ही में एक अर्ध-क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण किया। नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) के लिए इच्छित इस इंजन के लिए किस प्राथमिक ईंधन संयोजन का परीक्षण किया जा रहा है?
A तरल हाइड्रोजन (LH2) और तरल ऑक्सीजन (LOX)
B केरोसिन (रिफाइंड पेट्रोल) और तरल ऑक्सीजन (LOX)
C मीथेन (CH4) और तरल ऑक्सीजन (LOX)
D ठोस प्रणोदक
उत्तर: B
NGLV के लिए इसरो के अर्ध-क्रायोजेनिक इंजन परीक्षण में ईंधन के रूप में केरोसिन (विशेष रूप से, एक परिष्कृत ग्रेड जिसे अक्सर 'रिफाइंड पेट्रोल' या RP-1 कहा जाता है) और ऑक्सीकारक के रूप में तरल ऑक्सीजन (LOX) का उपयोग किया जाता है। यह अधिक कुशल और लागत प्रभावी लॉन्च वाहनों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
25.
LIGO-India भारत के किस राज्य में स्थित होने की योजना है, जिसे इसकी भूकंपीय स्थिरता और अनुसंधान संस्थानों से निकटता के लिए चुना गया है?
A राजस्थान
B महाराष्ट्र
C तमिलनाडु
D गुजरात
उत्तर: C
LIGO-India महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में स्थापित किया जा रहा है। इस स्थल का चयन भूकंपीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक भूवैज्ञानिक सर्वेक्षणों के बाद किया गया था, जो इस तरह के संवेदनशील उपकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है। यह परियोजना कई भारतीय संस्थानों को शामिल करने वाला एक सहयोग है।
26.
LIGO-India की स्थापना से खगोल भौतिकी और मौलिक भौतिकी में भारत की क्षमताओं में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है। LIGO-India वेधशाला का प्राथमिक वैज्ञानिक लक्ष्य क्या है?
A दूर के सुपरनोवा से न्यूट्रिनो का पता लगाना।
B ब्लैक होल विलय और न्यूट्रॉन स्टार टकराव जैसी ब्रह्मांडीय घटनाओं से गुरुत्वाकर्षण तरंगों का अवलोकन करना।
C उन्नत लेंसिंग तकनीकों का उपयोग करके डार्क मैटर के गुणों का अध्ययन करना।
D ब्रह्मांडीय माइक्रोवेव पृष्ठभूमि विकिरण को अभूतपूर्व सटीकता के साथ मैप करना।
उत्तर: B
LIGO-India का प्राथमिक वैज्ञानिक उद्देश्य, इसके अमेरिकी समकक्षों की तरह, गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाना और उनका अध्ययन करना है। ये तरंगें आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत द्वारा अनुमानित स्पेसटाइम में लहरें हैं और ब्लैक होल और न्यूट्रॉन स्टार के विलय जैसी विनाशकारी ब्रह्मांडीय घटनाओं द्वारा उत्पन्न होती हैं।
27.
LIGO-India एक नियोजित गुरुत्वाकर्षण-तरंग वेधशाला है जिसे भारत में स्थापित किया जाएगा। यह किन प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोगों और भारतीय संस्थानों के बीच एक सहयोगात्मक परियोजना है?
A CERN और TIFR
B LIGO प्रयोगशाला (Caltech/MIT) और भारतीय अनुसंधान संस्थानों का LIGO-India कंसोर्टियम
C ESA और ISRO
D NASA और DRDO
उत्तर: B
LIGO-India, LIGO प्रयोगशाला (Caltech और MIT द्वारा प्रबंधित) द्वारा भारतीय अनुसंधान संस्थानों के एक कंसोर्टियम, जिसमें IUCAA, RRI, और IISERs शामिल हैं, के सहयोग से एक प्रमुख उपक्रम है। इसका उद्देश्य अमेरिका में मौजूदा डिटेक्टरों के पूरक के लिए भारत में तीसरा LIGO डिटेक्टर स्थापित करना है।
28.
NGLV के लिए इसरो द्वारा अर्ध-क्रायोजेनिक इंजन का विकास एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है। NGLV कार्यक्रम के साथ इसरो का प्राथमिक उद्देश्य निम्नलिखित में से कौन सा है?
A विशेष रूप से गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण मिशनों को पूरा करना।
B भारी उपग्रहों और भविष्य के मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों को लॉन्च करने के लिए भारत की क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाना।
C निम्न पृथ्वी कक्षा में छोटे उपग्रहों को लॉन्च करने की लागत को कम करना।
D चंद्र मिशनों के लिए एक पुन: प्रयोज्य लॉन्च प्रणाली विकसित करना।
उत्तर: B
NGLV को एक शक्तिशाली और बहुमुखी लॉन्च वाहन के रूप में देखा जाता है जो विभिन्न कक्षाओं, जिसमें भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा (GTO) शामिल है, में भारी पेलोड ले जाने और मानव अंतरिक्ष उड़ान जैसे भविष्य के महत्वाकांक्षी मिशनों का समर्थन करने में सक्षम है। अर्ध-क्रायोजेनिक इंजन इस बढ़ी हुई क्षमता को प्राप्त करने में एक प्रमुख घटक है।
29.
अर्ध-क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण इसरो के भविष्य के लॉन्च वाहन, नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। कुछ लॉन्च चरणों के लिए पारंपरिक क्रायोजेनिक इंजनों की तुलना में अर्ध-क्रायोजेनिक इंजन का उपयोग करने का एक प्रमुख लाभ क्या है?
A उच्च विशिष्ट आवेग, जिससे पेलोड क्षमता अधिक होती है।
B कम निर्माण लागत और सरल ग्राउंड हैंडलिंग प्रक्रियाएं।
C उच्च तापमान पर काम करने की क्षमता, जिससे इन्सुलेशन की आवश्यकताएं कम हो जाती हैं।
D इंजन के लिए थ्रस्ट-टू-वेट अनुपात में वृद्धि।
उत्तर: B
अर्ध-क्रायोजेनिक इंजन, जो आमतौर पर मिट्टी के तेल और LOX जैसे प्रणोदकों का उपयोग करते हैं, तरल हाइड्रोजन जैसे सुपर-कोल्ड प्रणोदकों का उपयोग करने वाले इंजनों की तुलना में कम निर्माण लागत और सरल ग्राउंड हैंडलिंग के मामले में फायदे प्रदान करते हैं। हालांकि विशिष्ट आवेग शुद्ध क्रायोजेनिक इंजनों की तुलना में थोड़ा कम हो सकता है, समग्र प्रणाली लाभ महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
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इसरो ने हाल ही में एक अर्ध-क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण किया। नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) के लिए इच्छित इस इंजन के लिए किस प्राथमिक ईंधन संयोजन का परीक्षण किया जा रहा है?
A तरल हाइड्रोजन (LH2) और तरल ऑक्सीजन (LOX)
B मिट्टी का तेल (इंडेन) और तरल ऑक्सीजन (LOX)
C मीथेन (CH4) और तरल ऑक्सीजन (LOX)
D अमोनिया (NH3) और नाइट्रोजन टेट्रोक्साइड (NTO)
उत्तर: B
NGLV कार्यक्रम के लिए इसरो के अर्ध-क्रायोजेनिक इंजन परीक्षण में ईंधन के रूप में मिट्टी के तेल (इंडेन) और ऑक्सीकारक के रूप में तरल ऑक्सीजन (LOX) के संयोजन का उपयोग किया जाता है। यह अधिक शक्तिशाली और कुशल लॉन्च वाहनों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।