मैसूर सिल्क साड़ियों से जुड़े भौगोलिक संकेत (GI) टैग का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
A बुनकरों को वित्तीय सब्सिडी प्रदान करना।
B उत्पाद की उत्पत्ति और गुणवत्ता को प्रमाणित करना, अनधिकृत उपयोग को रोकना।
C उत्पाद को विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बढ़ावा देना।
D सभी खुदरा विक्रेताओं के लिए उत्पाद का एक निश्चित मूल्य स्थापित करना।
उत्तर: B
एक GI टैग उन वस्तुओं की पहचान करता है जो एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से उत्पन्न होती हैं, और उस उत्पत्ति के कारण उनमें विशेष गुण या प्रतिष्ठा होती है, जिससे अनधिकृत उपयोग को रोका जा सके और प्रामाणिकता व गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
12.
अपनी विशिष्ट बुनाई और ज़री के काम के लिए प्रसिद्ध मैसूर सिल्क साड़ियाँ मुख्य रूप से भारत के किस राज्य से संबंधित हैं?
A कर्नाटक
B तमिलनाडु
C आंध्र प्रदेश
D केरल
उत्तर: A
मैसूर सिल्क साड़ियाँ पारंपरिक रूप से मैसूर, कर्नाटक में उत्पादित की जाती हैं, और अपनी शुद्ध रेशम और सोने की ज़री के काम के लिए जानी जाती हैं। इन्हें 2005 में भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त हुआ था।
13.
केवल भौतिक संरक्षण से परे, शैक्षणिक अनुसंधान और सार्वजनिक पहुंच के लिए प्राचीन पांडुलिपियों के गहन डिजिटल संग्रह का एक महत्वपूर्ण दीर्घकालिक लाभ क्या है?
A यह केवल विशिष्ट विद्वानों के एक चयनित समूह तक पहुंच को प्रतिबंधित करता है।
B यह भौतिक पुस्तकालयों और अभिलेखागार संस्थानों की आवश्यकता को काफी कम करता है।
C यह भौगोलिक बाधाओं के बिना वैश्विक पहुंच, अंतःविषय अध्ययन और नई व्याख्याओं की खोज को सुगम बनाता है।
D यह मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में दुर्लभ पांडुलिपियों के वाणिज्यिक मूल्य को बढ़ाने का काम करता है।
उत्तर: C
डिजिटल संग्रह प्राचीन पांडुलिपियों तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाता है, जिससे दुनिया भर के शोधकर्ता और जनता उनका अध्ययन कर सकते हैं। यह वैश्विक पहुंच अंतःविषय अनुसंधान, नई व्याख्याओं और सांस्कृतिक विरासत की गहरी समझ को बढ़ावा देती है, भौगोलिक और भौतिक सीमाओं को पार करती है।
14.
भारत में डिजिटल संग्रह प्रयासों से अक्सर जुड़ा 'ई-ग्रंथ संजीवनी' पोर्टल किस प्राथमिक उद्देश्य की पूर्ति करता है?
A समकालीन भारतीय कलाकारों की ऑनलाइन कला प्रदर्शनियों के लिए एक मंच।
B प्राचीन भारतीय पांडुलिपियों के लिए एक डिजिटल भंडार, उन्हें अनुसंधान और सार्वजनिक देखने के लिए सुलभ बनाना।
C पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और वस्त्रों के लिए एक ई-कॉमर्स साइट।
D पूरे भारत में पुरातात्विक खोजों और उत्खनन रिपोर्टों के लिए एक डेटाबेस।
उत्तर: B
ई-ग्रंथ संजीवनी राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (NMM) द्वारा विकसित एक डिजिटल पोर्टल है, जो डिजिटलीकृत प्राचीन भारतीय पांडुलिपियों तक ऑनलाइन पहुंच प्रदान करता है, जिससे अनुसंधान, शिक्षा और भारत की पाठ्य विरासत के साथ व्यापक सार्वजनिक जुड़ाव सुगम होता है।
15.
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के तहत कौन सा स्वायत्त संगठन भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत के प्रलेखन, संरक्षण और डिजिटल संग्रह के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है?
A भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)
B राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (NMM)
C भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (NAI)
D इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA)
उत्तर: B
राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (NMM), जिसकी स्थापना 2003 में संस्कृति मंत्रालय के तहत हुई थी, भारत की पांडुलिपि संपदा की पहचान, प्रलेखन, संरक्षण और उसे सुलभ बनाने के लिए समर्पित नोडल एजेंसी है, जिसमें व्यापक डिजिटल संग्रह के प्रयास भी शामिल हैं।
16.
कलमकारी कला में आधार कपड़े और रंगाई एजेंटों दोनों के लिए पारंपरिक रूप से किन सामग्रियों का उपयोग किया जाता है?
A सूती कपड़ा और प्राकृतिक वनस्पति रंग।
B रेशमी कपड़ा और सिंथेटिक रंग।
C ऊनी कपड़ा और रासायनिक वर्णक।
D लिनन का कपड़ा और खनिज पेंट।
उत्तर: A
कलमकारी में पारंपरिक रूप से सूती कपड़े का उपयोग आधार के रूप में किया जाता है। रंग प्राकृतिक वनस्पति रंगों से प्राप्त होते हैं, जिन्हें अक्सर जड़ों, पत्तियों, छालों और खनिजों से तैयार किया जाता है, जिससे यह एक पर्यावरण-अनुकूल कला रूप बन जाता है।
17.
कलमकारी कला की श्रीकालाहस्ती शैली मुख्य रूप से निम्नलिखित में से किस विशेषता से प्रतिष्ठित है?
A जटिल पुष्प और फ़ारसी रूपांकनों के साथ ब्लॉक प्रिंटिंग।
B एक 'कलम' (पेन) का उपयोग करके मुक्तहस्त चित्रण और पौराणिक कथाओं का चित्रण।
C ज्यामितीय पैटर्न के साथ रेशम के कपड़े पर कढ़ाई का काम।
D मोम के साथ रेजिस्ट प्रिंटिंग वाली रंगाई तकनीक।
उत्तर: B
श्रीकालाहस्ती कलमकारी की विशेषता 'कलम' (बांस का पेन) का उपयोग करके मुक्तहस्त चित्रण है, जिसमें रूपरेखा बनाई जाती है और रंग भरे जाते हैं, मुख्य रूप से हिंदू महाकाव्यों, पुराणों और धार्मिक देवताओं के दृश्यों को दर्शाया जाता है। इसके विपरीत, मछलीपट्टनम कलमकारी में ब्लॉक प्रिंटिंग का उपयोग होता है।
18.
कलमकारी कला की कौन सी दो विशिष्ट शैलियाँ, जो अपनी अनूठी तकनीकों और क्षेत्रीय उद्गम के लिए जानी जाती हैं, भारत में भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त कर चुकी हैं?
A श्रीकालाहस्ती और मछलीपट्टनम
B तंजावुर और मैसूर
C पोचमपल्ली और गढ़वाल
D कांचीपुरम और अरनी
उत्तर: A
श्रीकालाहस्ती कलमकारी (2007 में GI टैग प्राप्त) और मछलीपट्टनम कलमकारी (2008 में GI टैग प्राप्त) कलमकारी कला की दो प्रमुख शैलियाँ हैं, जो दोनों आंध्र प्रदेश से उत्पन्न हुई हैं और जिन्हें भौगोलिक संकेत टैग प्रदान किए गए हैं।
19.
2026 की शुरुआत तक भारत के किस राज्य के पास पारंपरिक कला और शिल्प रूपों के लिए सबसे अधिक GI टैग हैं?
A तमिलनाडु
B उत्तर प्रदेश
C कर्नाटक
D केरल
उत्तर: B
2026 की शुरुआत तक, उत्तर प्रदेश GI टैग की संख्या में अग्रणी बना हुआ है, विशेष रूप से अपने पारंपरिक हस्तशिल्प और कला रूपों की विविध श्रेणी के लिए।
20.
किसी पारंपरिक कला रूप के लिए GI टैग निम्नलिखित में से किस अधिनियम के तहत कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है?
A कॉपीराइट अधिनियम, 1957
B वस्तुओं का भौगोलिक उपदर्शन (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999
C पेटेंट अधिनियम, 1970
D ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999
उत्तर: B
वस्तुओं का भौगोलिक उपदर्शन (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999, भारत में GI टैग के पंजीकरण और सुरक्षा को नियंत्रित करता है।